अपनी अनोखी मुस्कान, अनूठे अंदाज, आकर्षक चेहरे और चॉकलेटी हीरो वाली छवि वाले शशि कपूर का आज न‍िधन हो गया. लंबे समय से वो बीमार चल रहे थे. मुंबई के कोकिलाबेन अस्‍पताल में आख‍िरी सांस लीं. रव‍िवार की रात उन्‍हें छाती के दर्द की वजह से अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था.

उनकी अंतिम यात्रा में कपूर खानदान से ऋषि कपूर, रणबीर कपूर, रणधीर कपूर जैसे सदस्य दिखाई दिए. घरवालों ने आज शाम उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी. इस अंतिम यात्रा के दौरान बॉलीवुड जगत के दिग्गज अभिनेताओं के अलावा बॉलीवुड के कई नामी शख्सियत भी शामिल हुए.

अपने खास अंदाज से हिंदी सिने जगत पर चार दशकों तक राज करने वाले शशि कपूर को अभिनय विरासत में मिला था. हिंदी सिनेमा के पितामह कहे जाने पिता और उनकी नाट्य मंडली के संपर्क में रहते हुए शशि कपूर ने छोटी उम्र से ही अभिनय करना शुरू कर दिया था. शशि ने अभिनय का अपना करियर 1944 में अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर के नाटक ‘शकुंतला’ से शुरू किया था.

शशि कपूर को तीन बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है. 1979 में शशि द्वारा निर्मित फिल्म जुनून को बेस्ट फीचर फिल्म अवॉर्ड मिला. 1986 में फिल्म न्यू देल्ही टाइम्स के लिए बेस्टर एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला. 1994 में फिल्म ‘मुहाफिज’ के लिए स्पेशल ज्युरी अवॉर्ड. साथ ही उन्हें 2014 का दादासाहेब फालके अवॉर्ड भी देने की घोषणा हुई है.

1961 में वह फिल्म ‘धर्म पुत्र’ से बतौर हीरो बड़े पर्दे पर आए थे. फ‍िल्म ‘चोरी मेरा काम’, ‘फांसी’, ‘शंकर दादा’, ‘दीवार’, ‘त्रिशूल’, ‘मुकद्दर’, ‘पाखंडी’, ‘कभी-कभी’ और ‘जब जब फूल खिले’ जैसी करीब 116 फिल्मों में अभिनय किया था. जिसमें 61 फिल्मों में शशि कपूर बतौर हीरो पर्दे पर आए और करीब 55 मल्टीस्टारर फिल्मों के हिस्सा बने थे.