'Lootcase' Review: कमजोर स्टोरीलाइन के बावजूद कुणाल केमू और गजराज राव की परफेक्ट कॉमिक टाइमिंग ने जीता दिल

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Film: लूटकेस
Cast: कुणाल खेमू, गजराज राव, रसिका दुग्गल, रणवीर शौरी और विजय राज 
Director: राजेश कृष्णन
Rating: 3 मून्स

राजेश कृष्णन की 'लूटकेस' भले ही अपनी स्टोरीलाइन में थोड़ी कमजोर हो लेकिन इसकी भरपाई शानदार एक्टर्स काफी हद तक कर देते हैं. मुंबई के एक मिडिल क्लास आदमी जिसका किरदार कुणाल खेमू ने निभाया है उसकी जिंदगी के इर्द गिर्द घूमती ये फिल्म की एनर्जी शानदार है और आपको हंसने के मौके भरपूर मिलेंगे. जिसका क्रे़डिट हमें कुणाल के अलावा गजराज राव, रसिका दुग्गल, रणवीर शौरी और विजय राज जैसे शानदार कलाकारों को देना होगा.

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कहानी की बात करें तो लूटकेस थोड़ी पेचीदा है. नंदन कुमार यानि कुणाल खेमू अपनी आम जिंदगी और बेकार सी नौकरी से परेशान है लेकिन उसकी जिंदगी बदल जाती है एक लाल बैग से जिसमें ढेर सारा कैश है. अपनी बीवी लता यानि रसिका दुग्गल से डरा ये आदमी सूटकेस को अपने पड़ोसी के घर छुपा देता है.लेकिन उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि यही सूटकेस जो कि लूटकेस है वो उसकी जिंदगी में भूचाल ला देगा. दरअसल ये पैसा लूट का है जिसे एक राजनेता पाटिल यानि गजराज राव की बीवी से लूटा गया है. इस कहानी में एंट्री होती है एक माफिया बाला राठौड़ यानि विजय राज और भ्रष्ट पुलिसवाले कोल्टे यानि रनवीर शौरी की जिसके बाद शुरु होता है कनफ्यूजन और कॉमेडी का कारवां जो ज्यादातर जगह खींचा खींचा सा लगता है.


फिल्म की जान इसके एक्टर की शानदार अदाकारी है. अपने मराठी एक्सेंट के साथ कुणाल खेमू ने आम नहीं बल्कि बहुत ही खास रोल निभाया है जो दर्शकों को भरपूर मजा देता है. गजराज राव ने तालियां बजाने लायक काम किया है. अपने खतरनाक पंचलाइंस से वो पूरी फिल्म में छाए रहते हैं और दर्शक उनके बार बार सीन में आने का इंतजार करते हैं. विजय राज ने हमेशा की तरह बेहतरीन काम किया है वहीं रणवीर शौरी भी काफी मजेदार लगे हैं. रसिका दग्गल जो कि एक मिडिल क्लास वाइफ के रोल में हैं उन्होने छोटी छोटी बातें किरदार में दिखाईं हैं जो अलग चार्म पैदा करते हैं.

राजेश कृष्णन का डायरेक्शन ठीक है लेकिन कपिल सावंत की राइटिंग फिल्म को नुकसान पहुंचाती है. सिनेमैटोग्राफर सानू जॉन का कैमरा रियल मुंबई और कमाल के शॉट्स के साथ फिल्म को अच्छा लुक देता है तो आनंद सुबाया की एडिटिंग कमजोर है. रोहन-विनायक और अमर मांगरुलकर का  म्यूजिक फिल्म के साथ जाता है.
कुछ कमियों को छोड़ दें तो 'लूटकेस' एक देखने लायक फिल्म है जिसमें एंटरटेनमेंट इसके शानदार कलाकारों की वजह से ही आता है. 

पीपिंगमून की तरफ से 'लूटकेस' को 3 मून
 

(Transcripted By: Varsha Dixit)

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