डेथ एनिवर्सरी स्पेशल: हीरो बनना चाहते थे लेकिन बन गए विलेन, पढ़ें अमरीश पुरी की लाइफ के फैक्ट्स

2006 में आई कच्ची सड़क अमरीश पुरी की अंतिम फिल्म साबित हुई थी.

हिंदी सिनेमा के सबसे खूंखार और खतरनाक विलेन के रूप में पहचान बनाने वाले अमरीश पुरी की आज डेथ एनिवर्सरी है.12 जनवरी, 2005 को उनका निधन ब्रेन हेमरेज के चलते हो गया था.वह कुछ समय के लिए कोमा में चले गए थे और कभी वापस नहीं लौटे.22 जून, 1932 को जन्मे अमरीश पुरी को हीरो बनना था लेकिन किस्मत ने उन्हें विलेन बना दिया.

दरअसल जब वह 22 साल के थे तो उन्होंने एक स्क्रीन टेस्ट दिया था जिसमें उन्हें यह कहकर रिजेक्ट कर दिया गया कि उनकी शक्ल हीरो की तरह नहीं है.तब निराश न होते हुए अमरीश पुरी ने अपने एक्टिंग प्रेम के चलते थिएटर का रुख किया.थिएटर के साथ-साथ अमरीश पुरी एक इंश्योरेन्स कंपनी में भी काम करते थे.

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कई दिनों तक उन्होंने दोनों जगह अपना संघर्ष जारी रखा.थिएटर में उनके काम को काफी सराहा गया और ऐसे ही काम करते-करते उन्हें कई कमर्शियल में भी काम मिल गया.फिल्मों में काम पाने का संघर्ष आखिरकार तब खत्म हुआ जब 39 साल की उम्र में देवआनंद की प्रेम पुजारी में एक रोल ऑफर हुआ.अमरीश पुरी को 1972 में आई रेशमा और शेरा के जरिए पहचान मिली.सुनील दत्त के प्रोडक्शन में बनी इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और वहीदा रहमान जैसे सितारे भी थे.

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इसके बाद ईमान धरम (1976), जानी दुश्मन (1979), हम पांच (1980), अंधा कानून (1983), कूली (1983), मेरी जंग (1984), नगीना (1986), मिस्टर इंडिया (1987), शहंशाह (1987), त्रिदेव (1988), राम लखन (1989), आज का अर्जुन (1990), विश्वात्मा (1992), करन-अर्जुन (1994), दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995), घातक (1996), परदेस (1997), विरासत (1997), बादशाह (1999), गदर (2001), मुझसे शादी करोगी (2004), किसना (2005) जैसी फिल्मों में अमरीश पुरी का काम देखने को मिला.

उन्होंने अपने करियर में तकरीबन 400 फिल्मों में काम किया.अपने काम के दम पर ही उन्हें हॉलीवुड से कई ऑफर मिले.1982 में आई रिचर्ड एटनबर्ग की फिल्म गांधी में भी नजर आए.वहीं स्टीवन स्पीलबर्ग की हॉलीवुड फिल्म इंडियानो जोन्स के लिए तो अमरीश जी ने अपने बाल तक मुंडवा लिए थे.अमरीश पुरी पहले इस फिल्म में काम नहीं करना चाहते थे लेकिन रिचर्ड एटनबर्ग के कहने पर वह मान गए.

2006 में आई कच्ची सड़क अमरीश पुरी की अंतिम फिल्म साबित हुई थी.उनकी जुबान से निकले डायलॉग आज भी याद किये जाते हैं.चाहे मिस्टर इंडिया का मोगैम्बो खुश हुआ हो या फिर दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे का जा सिमरन जा जी ले अपनी जिन्दगी.हर डायलॉग और किरदार से अमरीश पुरी ने अपनी ऐसी पहचान छोड़ी जो हर सिनेमा प्रेमी के दिल में हमेशा ताजा रहेगी.