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Exclusive: बेटे आदित्य रावल की डिजिटल डेब्यू फिल्म ‘Bamfaad’ के सेट पर जाने से पहले परेश रावल ने दी थी ये खास सलाह

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर परेश रावल के बेटे आदित्य रावल एंटरटेनमेंट की दुनिया में एंट्री करने जा रहे हैं. आदित्य Zee5 की ओरिजिनल वेब फिल्म 'बमफाड़' में डेब्यू कर रहे हैं. फिल्म का ट्रेलर सामने आ चुका है. जिसमें आदित्य 'बमफाड़' अंदाज में नजर आ रहे हैं. यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 पर इसी शुक्रवार को रिलीज होगी. अनुराग कश्यप के को-प्रोडक्शन में बन रही फिल्म 'बम्फाड' में आदित्य के अपोजिट साउथ की फिल्म अर्जुन रेड्डी फेम एक्ट्रेस शालिनी पांडे नजर आएंगी. टीम पीपिंग मून ने वेब फिल्म से डेब्यू कर रहे स्टार किड आदित्य रावल से की खास बातचीत.
 
बॉलीवुड की एक जानी मानी फैमिली से आप आते है. आप आसानी से एक मेनस्ट्रीम फिल्म से डेब्यू कर सकते थे पर आपने वेब फिल्म से डेब्यू करना क्यो चुना ?
न तो मेरे माता-पिता और न ही मैंने 'प्रॉपर लॉन्च' की कोई प्लानिंग की थी. मैंने हमेशा सोचा हैं कि कड़ी मेहनत के बिना कुछ नहीं हो सकता है और आप तैयार है तो बस आपको अच्छा मौका चाहिए होता है. फिल्म 'बमफाड़' की जो चीज मुझे सबसे ज्यादा अट्रैक्ट की वो फिल्म की स्क्रिप्ट और मैं जिन लोगों के साथ काम कर रहा था. फिल्म को बहुत दिल से बनाया गया है और हम चाहते थे ये फिल्म ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और  ZEE5 ऐसा ही एक मंच है. 

क्या आपके पिता फिल्म को लेकर हुई आपकी ट्रेनिंग में शामिल हुए थे ? 
मैं भले ही एक फिल्मी परिवार से हूं पर फिर भी मैंने अपने रोल और विजन के लिए खुद को पूरा समर्पित किया. फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले मैंने 1 महीने की वर्कशॉप की. मैंने हमेशा अपने पापा के साथ बहुत अच्छी अच्छी फिल्मों को देखा है. मैंने पापा के कई थिएटर शोज देखे है और उन्हे 15-20 बार या बोले तो बार बार रिहर्सल करते देखा है. मैं पापा से सिखकर ही बड़ा हुआ हूं.उनसे बेहतर मुझे कोई नहीं समझ सकता हैं और ना ही कोई सिखा सकता है. जहां तक मेरी फिल्मों को लेकर ट्रेनिंग की बात है तो मैंने छह महीने थिएटर किया, लंदन स्कूल ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स में थिएटर तैयार किया. फिर मैं न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ द आर्ट्स में गया और लेखन, नाटक लेखन और पटकथा लेखन की पढ़ाई की. मेरे माता-पिता औपचारिक रूप से शामिल नहीं थे, लेकिन वे मुझे मार्गदर्शन और सलाह देने के लिए हमेशा मौजूद रहते हैं. अगर मुझे किसी चीज की जरूरत है, तो वे हमेशा हाथ में हैं. 

 क्या नेपोटिस्म विवाद से आपको फर्क पड़ता है ? 
नेपोटिज्म सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, हर फिल्ड का हिस्सा है. हां मुझे इस बात से बहुत फायदा हुआ है क्योंकी मेरे माता पिता इसी लाइन से हैं. मेरे पेरेंट्स इस इंडसट्री में बहुत सफलता मिली है. उनकी ही पहचान की वजह से मैं यहा हूं. उनके मार्गदर्शन और सलाह की ही वजह से मुझे लोगों तक पहुँचने में आसानी हुई है. अक्सर कुछ लोगों से मिलना भी बहुत मुश्किल होता है पर मैं सौभाग्यशाली हूं कि मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ. आपके पास टैलेंट है अच्छा है पर पहुंच भी होना जरूरी है. 

 

फिल्म में अपने केरेक्टर नासिर जमाल के बारे में कुछ बताइये ?
फिल्म के बारे में जो मुझे बहुत आकर्षित करता है वह है मेरा केरेक्टर नासिर जमाल का. वह रियल लाइफ में जो हूं मेरा फिल्म में केरेक्टर उससे अक दम अलग हैं. मैं मुंबई का लड़का हूं और मुझे भारत के चारों कोनों में घूम चुका हूं. मैं सभी तरह के लोगों से मिल सकता हूं और पढ़ाई के लिए विदेश जाने का भी मौका मिला. नासिर का जन्म इलाहाबाद में हुआ है और उनका व्यक्तित्व मेरे अपने से बहुत अलग है. नासिर के बोलने का तरीका, उसका खुद को सम्भालने का तरीका, कई स्थितियों में उसके रिएक्शन मुझसे बिल्कुल अलग है. लोग उसे बमफाड़ कहते हैं और उसकी मुलाकात उसी की तरह एक बमफाड़ लड़की से होती है, फिल्म का जो नाम है 'बमफाड़' यह नॉर्थ इंडिया में यूज किया जाने वाला एक शब्द है, जिसका मतलब विस्फोट करने वाला होता है.  
 
अनुराग कश्यप की फिल्म में काम करके कैसा लग रहा है?
सच कहूं मुझे अब भी यकीन नहीं होता मैंने सर के साथ काम किया है. सर की ब्लैक फ्राइडे और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों का मैं कायल हूं. मैं हमेशा उसके साथ काम करने का सपना देखता था. अगर भविष्य में मुझे फिर उनके साथ काम करने को मिले तो यह मेरे लिए फिर आश्चर्यजनक होगा. 

 

फिल्म में आपको साथ शालिनी पांडे, विजय वर्मा और जतिन सरना भी हैं. उनके साथ शूटिंग का आपका एक्सपीरियंस कैसा रहा?
सभी के साथ काम करने का एक्सपीरियंस बहुत अच्छा था. हम सब ने एक टीम की तरह काम किया. बहुत मजा आया. सिर्फ ये तीन नहीं बल्कि हमारे सभी को-स्टार शानदार थे. उनमें से हर एक प्रतिभाशाली है और सबने बहुत अच्छा काम किया है. 

 
 

आपकी पहली वेब फिल्म पर काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा? आपको ये रोल कैसे मिला ? 
फिल्म की पूरी शूटिंग में कुछ ना कुछ सिखने को मिलाय हर कदम पर नया एक्सपीरियंस मिला. 5 साल पहले जब मैंने करण बजाज को एक ऑडिशन दिया था करण कास्टिंग डायरेक्टर हैं. मैं उस किरदार के लिए तब बहुत छोटा था, जिसकी उन्हें तलाश थी. लेकिन करण भाई ने उस ऑडिशन को याद रखा और जब उन्होंने अस फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी, उन्होंने मेरे बारे में सोचा और ऑडिशन के लिए फिर बुलाया.

 

अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में बताए ?
कुछ लाइनअप है. जिसको लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं. जैसे ही मुझे परमिशन मिलती है, मैं उनके बारे में जरूर बताऊंगा. 

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