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155 Hours: डायरेक्टर विनोद कापड़ी के साथ प्रोड्यूसर वजीर सिंह लेकर आ रहे हैं एक और दिलचस्प कहानी

वॉर फिल्म्स अक्सर एक्शन ड्रामा से भरपूर रहती हैं, जिसमे हमें वीरता, साहस और देशभक्ति भर-भर के देखने मिलता है. लेकिन आपको बता दें कि यह कहानी अलग है. यह फिल्म एक सैनिक के बारे में एक मानवीय नाटक है, जो अपने देश की ही नहीं, बल्कि अपने साथी सैनिक की भी बात रखता है, भले ही उसकी वजह से उसका मिशन और अधिक असंभव बन जाए.

इस प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट की घोषणा करने के बाद, भुज: द प्राइड ऑफ इंडिया (1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित), सिलेक्ट मीडिया होल्डिंग्स एलएलपी एक और कहानी की घोषणा करने में गर्व महसूस कर रही है, जिसे बताने की जरूरत है. इस फिल्म का टाइटल '155 Hours' रखा गया है, जो कि 1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित है.

155 Hours की कहानी कैप्टन करम सिंह विर्क और हवलदार बलदेव सिंह की सच्ची कहानी पर आधारित है. जिसमे आप उनकी देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और वह कैसे एक सेना नेता होने के नाते अपनी खुद की टीम का ख्याल रखता है.

फिल्म सिख रेजिमेंट के एक युवा कमांडो सैनिक बलदेव सिंह के बारे में है, जो पाकिस्तान के जंगलों में फंसे हुए थे और उनके दोनों पैरों और एक हाथ में गोली लगी थी. उस समय उनके पास अगर कोई था तो वह उनके सबसे अच्छे दोस्त, एक और सैनिक की लाश. बलदेव सिंह बिना किसी भोजन या पानी के 155 घंटे मौत से लड़कर जिंदा थे.

यह कमांडर करम सिंह विर्क की भी कहानी है, जिसका मिशन पाकिस्तान के घने जंगलों पर छापा मार कर अपने घायल सैनिक बलदेव सिंह से किया गया अपना वादा पूरा करना था. उनका वादा यह था कि उसे जिंदा (उसके गांव) लेकर जाएंगे.

इस फिल्म में जो एक्टर कमांडर करम सिंह विर्क और बलदेव सिंह की भूमिका निभाएंगे उनके नाम की जल्द घोषणा की जाएगी. फिल्म को पिहू फेम समीक्षकों द्वारा प्रशंसित निर्देशक विनोद कापड़ी द्वारा डायरेक्ट और लिखा गया है, साथ ही इसे गिन्नी खनूजा और वजीर सिंह द्वारा प्रोड्यूस किया जा रहा है.

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