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जेल में काटी रातें, टैक्सियां धोईं, कारपेंटर का काम किया... ये है अजय देवगन के पिता वीरू देवगन का स्ट्रगल

बॉलीवुड में नाम और काम कमाना आसान नहीं है और इस इंडस्ट्री में अपना पैर ज़माने के लिए अच्छे अच्छों को खून पसीना बहाना पड़ता है. लेकिन ये स्ट्रगल सभीं के सामने आए ये जरुरी नहीं है. चमचमाती इस बॉलीवुड दुनिया में कब ये स्ट्रगल अंधेरें में खो जाता है, पता ही नहीं चलता. ऐसे ही अंधेरें में गुम, एक ख़ास शख्स के स्ट्रगल पर हम इस रिपोर्ट के ज़रिये प्रकाश डालने वाले हैं. हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड एक बेहतरीन एक्टर्स में से एक अजय देवगन के पिता वीरू देवगन की. आज 27 मई 2019 को सुबह उन्होंने अपनी आखिरी सांसें ली.

लेजेंड्री एक्शन डायरेक्टर और कोरियोग्राफर रहे वीरू देवगन का बॉलीवुड सफर 14 साल की उम्र में ही शुरू हो गया था. बता दें कि महज़ 14 साल की उम्र में आंखों में बॉलीवुड का सपना लिया वीरू अमृतसर से मुंबई की ट्रैन में चढ़ गए. घर से भाग कर और वो भी बिना टिकट के. इस सफर में उनके साथ उनके कुछ दोस्त भी थे. 

सफर शुरू हुआ नहीं कि सामने आ गया TC. वीरू समेत उनके सभीं दोस्त पकड़े गए और सप्ताह भर तक जेल की हवा खाई. बहार निकले तो भूखे पेट और मुंबई की लम्बी इमारतों को देख धीरे धीरे दोस्तों की इस गैंग ने हार मानना शुरू कर दिया. लेकिन, वीरू इस बम्बई से रिश्ता जोड़ने आए थे और वो भी बॉलीवुड वाला रिश्ता.

आप जानकार चौंक जाएंगे कि वीरू ने पैसे कमाने के लिए टैक्सियां धोईं और कारपेंटर का काम भी किया. और जब ठीक ठाक पैसा जमा कर लिया तो फिल्म स्टूडियोज के चक्कर लगाने शुरू किये. लेकिन उन्हें जल्द ही समझ आ गया कि बॉलीवुड के सिल्वर स्क्रीन पर खूबसूरती का होना बहुत जरुरी है, चॉकलेटी चेहरे वाले ही हीरो बनते हैं और इस वजह से उनका यहां कुछ नहीं हो सकता. 

लेकिन, बॉलीवुड से नाता तोड़ने का उनका मन जरा भी नहीं था. इसलिए एक्शन और डायरेक्शन में वेर्रु ने अपनी किस्मत आजमाई और यहां उनकी किस्मत का सिक्का जोरों से उछला. उन्होंने इंकार (1977), मिस्टर नटवरलाल (1979), क्रान्ती (1981), हिम्मतवाला (1983), शहंशाह (1988), त्रिदेव (1989), बाप नम्बरी बीटा दस नम्बरी (1990), फूल और कांटे (1991) जैसी तकरीबन 80 फिल्मों में एक्शन निर्देशन किया.  इसके अलावा उन्होंने ‘हिंदुस्तान की कसम’ नामक फिल्म का निर्देशन भी किया था जिसमें उनके बेटे अजय देवगन भी थे. 

लेकिन, फिल्म में हीरो बनने का उनका सपना उनके बेटे ने पूरा किया. अजय को हीरो बनाना अब उनका सपना बन गया था, जिसके लिए उन्होंने बहुत काम उम्र में अजय को फिल्मों से जोड़ा, एक्शन सीक्वेंस कैसे शूट होते यहीं ये दिखाए, कॉलेज के दौरान डांस क्लासेज लगवाए, घर पर जिम बनवाया, हॉर्स राइडिंग सिखाई. अजय को बचपन से ही फिल्म और फिल्म के सेट्स पर माहौल से अवगत करवाया.  इन सबके चलते आज अजय कहां यहीं ये तो आप और हम जानते ही हैं.  

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