भारतीय वेब शो के बारे में 'द जोया फैक्टर' के डायरेक्टर अभिषेक शर्मा ने दिया यह बड़ा बयान, कहा 'सेंसरशिप नहीं है तो कुछ भी बन रहा है'

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'तेरे बिन लादेन', 'द शौकीन्स' और हाल ही में जॉन इब्राहिम की फिल्म 'परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरण' के डायरेक्टर अभिषेक शर्मा ने हमसे बातचीत के दौरान भारतीय वेब शोज के बारे में खुलकर बात की. जल्द ही रिलीज होने वाली सोनम कपूर और दुलकीर सलमान की फिल्म 'द जोया फैक्टर' को डायरेक्ट करने वाले अभिषेक ने इस बातचीत के दौरान वेब शो में अपने इंट्रेस्ट, वेब शोज में सेंसरशिप का जुड़ने जैसी कई बातों पर अपनी राय दी है. उन्होंने यह तक कहा कि उन्हें भारतीय वेब शो गरीब लगते हैं!

अभिषेक ने कहा, "वेब के लिए कुछ एक्ससिटिंग आएगा तो ही करूंगा. मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि हमारे यहां वेब शो गरीब क्यों लग रहे है. इंटरनेशनली जो प्रोडक्शन वैल्यू है वो फिल्मो के लेवल की होती है. चाहे आप शो 'डार्क' को ले लो, जो जर्मन शो है, 'माय स्टेक' जो यूरोपियन शो है. हमारे शो बहुत टीवी जैसे लगते है. हमारी फिल्मे अच्छी लगती है, स्टैण्डर्ड बहुत अच्छा हो रहा है फिल्मों का, लेकिन वेब शो बिलकुल उस लेवल पर नहीं है. पता नहीं क्यों प्रोडक्शन में कमी है, क्या हमे उतने बजट नहीं मिल रहे, कहानी में भी कमाल नहीं लग रहा. वही घिसा पीटा चल रहा है."

अभिषके ने यह भी कहा कि सेंसरशिप नहीं है इसलिए लोग कुछ भी बना रहे हैं. "सेंसरशिप नहीं है तो कुछ भी बन रहा है. वो गलत तरीके से है. बहुत वल्गर शोज है, मैं बहुत से शो अपनी फैमिली के साथ नहीं देख सकता, हालांकि, मैं इनका नाम नहीं ले सकता. वेब शो इंडिया में गलत तरीके से बन रहे हैं. वल्गेरिटी कर सकते हो, झटपट पैसा है ...इस वजह से बन रहा है तो गलत ही है. मैं सही रीजन के लिए बनाना चाहता हूं. कोई कहानी होगी जो वेब शो के लिए सही है, उसका लेवल है वेब शो जैसा, उतना बजट हो जितना जरूरी है तो मैं जरूर करूंगा. सिर्फ करने के लिए मैं वेब शो नहीं करूंगा, मैं अपना नाम क्यों खराब करूं. मैं नाम नहीं ले सकता लेकिन एक मेरे मित्र है जिन्होंने बहुत अच्छी कहानी लिखी, मेरी डेट मैच नहीं हो रही नहीं तो मैं वो जरूर करता. जो भी वो शो बनाएगा, वो बहुत अच्छा बनाएगा... ये मैं जानता हूं", अभिषेक ने कहा.

अभिषेक ने यह भी कहा कि वेब सीरीज को लेकर मेरी अलग अप्रोच है इसलिए मैं शायद घुस नहीं पा रहा. सिर्फ बनाने के लिए नहीं बना चाहिए. बाहर का कोई शो लो उसे यहां रीमेक वेब शो में तब्दील कर दो, ये गलत है. इन्हे पता नहीं होता कि ऑडियंस कौन हैं, फिल्मों में तो रिएक्शन्स दीखते हैं. वेब शो में नहीं पता चलता कि कौन क्या देख रहा है?

सेंसरशिप को क्या वेब सीरीज से जुड़ना चाहिए, इसपर अभिषेक कहते हैं, "अगर ऐसे ही चलता रहा तो हम न्योता दे रहे हैं, फिर हम गालियां देते हैं, कप्लेन करते हैं. मेरे लिए सेंसर बोर्ड बहुत ही कमाल स्तंभ रहा है. मेरी हर फिल्म सेंसरबोर्ड को पसंद आई है. आप देखिये, 'द शौकीन्स' जो वल्गर हो सकती थी लेकिन, वैसे नहीं बनाई गई. 'तेरे बिन लादेन' जब बनी तो टेररिज्म मुकाम पे था मगर, सेंसरबोर्ड ने कुछ नहीं किया. सेंसरबोर्ड आपका हितैषी है, आपका दुश्मन नहीं है. आप खुद दुश्मन बना रहे हैं उसे. आप जो परिवार के साथ नहीं देख सकते तो वो सेंसरशिप को न्योता देना ही है. अभी वेब शो एक नया मीडियम है, जो मेकर्स है इनके, ये उनकी जिम्मेदारी है कि वो इसे कैसे लेकर जा रहे हैं. हम इंटरनेशनल लेवल पर लेकर जा सकते हैं, इसमें कोई शक नहीं है मगर, क्या हम उसे इतना टाइम दे रहे हैं, इसे बनाने के पीछे क्या सही वजह है? सिर्फ बनाने के लिए नहीं, बल्कि उस कहानी को दिखाना चाहिए जो वेब शो के जरिये ही दिखाई जा सके. वेब सीरीज एक तरह से उपन्यास है. उसके चैप्टर्स होते है."

'द जोया फैक्टर' की बात की जाए तो यह फिल्म 20 सितम्बर 2019 को रिलीज होगी.

 

(Source: Peepingmoon)

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