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बॉलीवुड के ब्लाइंड आइटम्स पर फूटा अभय देओल का गुस्सा, कहा- 'किसी के दिमाग, करियर को प्रभावित कर सकते हैं ये आर्टिकल्स'

अभय देओल हमेशा से ही अपनी बात बेबाकी से रखते हैं. चाहे वो कोई भी मुद्दा हो. हाल ही में अभिनेता अभय देओल ने बॉलीवुड के ब्लाइंड आइटम्स को लेकर और कई लोग इंडस्ट्री को लेकर कई मुद्दों पर गलत बोल रहे हैं को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया है. अभय ने कहा कि, 'कुछ लोग हैं इस समय फिल्म इंडस्ट्री में चल रहे मुद्दों का फायदा उठा रहे हैं , केवल अपने एजेंडे को आगे बढ़ा के लिए. इन लोगों के अलावा कई लोग हैं जो वास्तव में बदलाव चाहते हैं.'

एक लीडिंग वेबसाइट से बात करते हुए अभय ने कहा कि,'भविष्य की पीढ़ियों को पता होना चाहिए कि इस इंडस्ट्री में क्या होना चाहिए.' अभय ने आगे कहा कि,'बहुत लंबे समय के लिए, कुछ लोगों के करियर को निशाना बनाया गया है सिर्फ इसलिए कि वो किसी के आगे पिछे नहीं धूमते या किसी की गलत चीज को बोल देते हैं.' वहीं अभय ने सुशांत सिंह राजपूत के बारे में लिखे गए ब्लाइंड आइटम्स के बारे में भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि, 'जो ये लिख रहा है उसके लिए ये चीजे ठीक है पर दूसरों के लिए इस तरह की अफवाह असर कर सकती है. कई लोग काफी संवेदनशील होते हैं. कई बार ये ब्लाइंड आइटम्स किसी के दिल को तोड़ देने वाले होते है. इससे किसी के दिमाग पर असर पड़ सकता है या उनके करियर को भी प्रभावित कर सकता था.'

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बता दें कि, इससे पहले अभय ने नेपोटिज्म पर भी अपने राय रखते हुए कहा था कि, 'नेपोटिजम कोई छोटी चीज नहीं है. मैंने अपने परिवार के साथ अपनी केवल एक पहली फिल्म बनाई और मैं खुशनसीब हूं कि अपने बलबूते पर यहां तक पहुंच सका हूं और पापा ने हमेशा इसी को बढ़ावा दिया है. यह हर देश में एक अहम भूमिका निभाता है लेकिन यहां भारत में इसने एक नया आयाम पा लिया है. मुझे लगता है कि जातिवाद इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाता है जो पूरी दुनिया के मुकाबले यहां ज्यादा है. जाति के कारण ही एक बेटा अपने पिता के प्रफेशन को अपनाता है जबकि बेटी से उम्मीद की जाती है कि वह शादी करके हाउसवाइफ बन जाए. अगर हम बेहतर परिवर्तन के लिए गंभीर हैं तो हमें केवल एक पहलू या एक इंडस्ट्री पर फोकस नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे यह कोशिश अधूरी रह जाएगी. हमें विकास की संस्कृति बनाने की जरूरत है, आखिर हमारे फिल्ममेकर्स, पॉलिटिशन और बिजनसमैन कहां से आते हैं? वे भी सभी के जैसे लोग हैं. वे इसी सिस्टम में पले-बढे़ है जैसे कि बाकी लोग. वह केवल अपनी संस्कृति की परछाई हैं. हर माध्यम में टैलेंट को आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए.'
(Source: Bollywood Hungama)

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