गुरु दत्त की बायोपिक को लेकर बेटी ने उठाए सवाल पर बोली फिल्ममेकर भावना तलवार, कहा- 'उनकी फिल्म से किसी के परिवार में कोई दुखी नही होगा'  

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पिछले साल जुलाई के महीने में भावना तलवार की तरफ से घोषित की गई फिल्म 'प्यासा' पर कॉपीराइट का उल्लंघन करने का मुकदमा दर्ज होने का मामला सामने आया है. यह फिल्म फिल्मकार गुरु दत्त की बायोपिक है जिस पर गुरु दत्त और गीता दत्त की बेटी नीना मेमन ने भावना को एक कानूनी नोटिस भेजा है. इस नोटिस में कहा गया है कि भावना ने गुरु दत्त की बायोपिक बनाने की घोषणा करने से पहले गुरु दत्त की फैमिली में से किसी की इजाजत नहीं ली. यह उनके परिवार के सर्वाधिकारों का उल्लंघन है.
 

वही एक लीडिंग वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में भावना ने कहा कि उन्हे नीना मेमन की तरफ से कोई भी कानूनी नोटिस नहीं मिला है. उनका कहना है कि उन्हें अब तक इस मामले में कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है और अगर होता भी तो इसका कोई मतलब नहीं होगा. भावना ने कहा है कि उनकी फिल्म 'प्यासा' किसी भी व्यक्ति या घटना के बारे में कोई गलत कहानी पेश नहीं करेगी और न ही उनकी फिल्म से किसी के परिवार में कोई दुखी होगा क्योंकि उनकी यह मंशा है ही नहीं.


भावना ने बताया कि उन्होंने अपनी फिल्म 'प्यासा' की पटकथा में सिर्फ उन चीजों को ही शामिल किया है जो गुरु दत्त के बारे में पहले से ही सार्वजनिक हो चुकी हैं. इसलिए उन्हें कॉपीराइट उल्लंघन मामले का कोई डर नहीं है. भावना ने अपनी फिल्म की पटकथा को तैयार कर लिया है और उन्होंने निश्चय कर लिया है कि वह इस फिल्म को बनाकर रहेंगी. उन्होंने कहा है कि अगर किसी मामले में जरूरत पड़ी तो वह गुरु दत्त के परिजनों से भी मिलेंगी.

भावना तलवार ने वर्ष 2007 की फिल्म 'धर्म' से फिल्मों में अपनी शुरुआत की. इस फिल्म में पंकज कपूर और सुप्रिया पाठक ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं. जुलाई 2020 में भावना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर करते हुए जानकारी दी कि उन्होंने गुरु दत्त की बायोपिक बनाने की तैयारी पूरी कर ली है और साथ ही भावना ने ये भी बताया था कि उन्हे इस फिल्म की स्क्रिप्ट को लिखने में लगभग सात साल लगे है. साथ ही भावना ने ये भी बताया था कि उनका इरादा फिल्म में गुरु दत्त की पूरी जी जीवन यात्रा को दिखाने का है.


वही बता दे कि, किसी व्यक्ति विशेष या घटना पर जब कोई फिल्म बनाई जाती है तो अक्सर उस पर सवाल खड़े हो ही जाते हैं. लेकिन, कुछ घटनाओं में अदालतों ने इस बात को साफ कर दिया है कि जब किसी मृत व्यक्ति की बायोपिक बनाई जाती है तो उसके लिए फिल्मकार को किसी से इजाजत लेने की जरूरत नहीं. बशर्ते, वह अपनी फिल्म में सिर्फ उन्हीं तथ्यों का इस्तेमाल करे जो पहले से ही किसी भी तरह से सार्वजनिक हो चुके हैं.
(Source: MidDay)

 

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