कार एक्सीडेंट ने बदली थी अनु अग्रवाल की जिंदगी, संन्यास लेने के साथ मुंडवा लिया था सिर 

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'आशिकी' फेम अनु अग्रवाल को कौन नहीं जानता, जिन्होंने राहुल रॉय के अपोजिट डेब्यू करके रातों रात पैसा और शोहरत दोनों कमाया. इसके बाद लोग उन्हें आशिकी गर्ल के कहकर बुलाने लगे. पहली फिल्म 'आशिकी' के बाद अनु ने कई और फिल्मों में काम किया लेकिन एक हादसे ने उनके पूरे करियर को बर्बाद कर दिया.  

टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए इंटरव्यू में अनु ने अपने करियर, एक्सीडेंट और पर्सनल लाइफ को लेकर बात की. अनु ने बताया, 'साल 1999 में मेरा ऐक्सिडेंट हुआ और मैं कोमा में चला गया. ऐक्सिडेंट से पहले मैं एक आश्रम में रहती थी, जहां मैं आध्यात्म ले रही थी और नाम भी अलग था. ऐक्सिडेंट के बाद मुझे अपने आध्यात्मिक नाम के सिवाय कुछ याद नहीं था। 2001 में मैंने संन्यास ले लिया और अपना सिर मुंडवा लिया.'

अनु अग्रवाल ने बताया कि उस ऐक्सिडेंट के बाद वह लिपस्टिक लगाने का तरीका तक भूल गई थीं. वह बोलीं, 'मैं बस एक बैग लेकर घूमती रहती. ह्यूमन साइकॉलजी को समझती रही. 2006 में मैं वापस आई और लोगों से मिलने लगी. मेरे घर के पास प्रेसवालों को हुजूम रहता। मैं प्यार से उनका अभिवादन करती थी. ऐक्सिडेंट के बाद मैं यह तक भूल गई थी कि लिपस्टिक कैसे लगाते हैं. फिर लोगों ने मेरी 'BEFORE' और 'AFTER' तस्वीरें पोस्ट करनी शुरू कर दीं. मेरी बिना मेकअप वाली तस्वीरें वायरल हो गईं. अपने आसपास यह सब देख मैं शॉक में थी. मैं ठीक होने की कोशिश कर रही थी. प्रेस और मीडिया वाले मेरे बारे में कुछ भी लिखने और उन तस्वीरों को पोस्ट करने के बजाय चुप रह सकते थे। अगर वो ठीक होने में मेरी मदद नहीं कर सकते थे तो कम से कम मेरे बारे में वो डरावनी चीजें और बातें न बोलते?'

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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 कोमा से बाहर आने के बाद उन्होंने एक्टिंग में वापसी क्यों नहीं की यह पूछे जाने पर एक्ट्रेस ने जवाब दिया, '2007-08 के आसपास मुझे एक हॉलिवुड फिल्म मिली थी, पर मैं यह सब नहीं करना चाहती थी. मैं योग पर काम करना चाहती थी. लोगों और उनके माइंडसेट के बारे में और जानना चाहती थी. लोगों ने मेरे बारे में बातें बनानी शुरू कर दीं पर उन्होंने यह नहीं सोचा कि मेरे अंदर फीमेल पावर और फीमेल एनर्जी जागृत हो रही थी. उसमें कोई नुकसान नहीं हुआ था.'

उन्होंने आगे कहा, 'अगर मुझे सिर्फ फिल्में ही करनी होतीं तो मैंने 10 साल पहले ही कर ली होतीं. 20 साल पहले ही मैं हॉलिवुड प्रॉजेक्ट साइन कर लेती, पर मेरी खोज किसी और चीज के लिए थी. मेरी इच्छाएं, मेरी जरूरत और मेरी भूख थी कि लोगों के लिए कुछ कर सकूं. अब मैं इंसान के दिमाग के बारे में अधिक से अधिक जानने की कोशिश कर रही हूं. जैसे कि लोग किस तरह डिप्रेशन से दूर रह सकते हैं. लोगों को एंग्जाइटी या असफलता क्यों महसूस होती है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनके मैं जवाब जानना चाहती थी. ऐसा करने के लिए मुझे बॉलिवुड से दूर होने की जरूरत थी.

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