हंसल मेहता की अगली वेब सीरीज़ आरके यादव के मिशन आर एंड एडब्ल्यू पर बनाने जा रहे हैं, बड़े ऑपरेशन में कैसे 'रॉ' ने दिलाई बड़ी सफलता

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करीब 5 दशकों से रॉ भारत की सुरक्षा में एक अहम किरदार निभा रही है। अब वो चाहे पाकिस्तान के भारत पर हमला करने की जानकारी को जुटाना हो, या फिर पड़ोस में चल रहे परमाणु प्रोग्राम का पता लगाना हो। 'रॉ' ने कई बार भारतीय सेना की मदद की है। ऐसी ही कई कहनियों को पूर्व रॉ एजेंट आर के यादव ने अपनी किताब में सहेजा है। अब उनकी इसी किताब पर एक वेब सीरीज़ बनने जा रही है जिसका निर्देशन हंसल मेहता करने जा रहे हैं। यह शो ऑलमाइटी मोशन पिक्च र्स द्वारा निर्मित है और करण व्यास इसका स्क्रीन प्ले लिख रहे हैं। 

यह शो गुप्त खुफिया अभियानों को भी प्रदर्शित करेगा और इनमें से कई रणनीतियों और कार्यो ने हमारे क्षेत्र की भूराजनीति को कैसे आकार दिया है। हंसल ने कहा, एक कहानीकार के रूप में, मेरा प्रयास हमेशा जीवित कहानियों को लाने और आम लोगों और उनके असाधारण कार्यो का पता लगाने का रहा है। ये वे लोग हैं, जिन्होंने हमारे राजनीतिक और सैन्य इतिहास को मजबूत किया है। रामेश्वर नाथ काओ एक प्रतिभाशाली व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे, जिन्हें बहुत कम जाना जाता है।

उन्होंने कहा, मैं प्रतिभाशाली करण व्यास और सोनीलिव के साथ उनकी कहानी का पता लगाने के लिए रोमांचित हूं, जो इतने शानदार साझेदार हैं। मैं जल्द ही इस परियोजना को शुरू करने की उम्मीद कर रहा हूं।

बताया जा रहा है की ये सीरीज़ भारत की खुफिया एजेंसी के जन्मदाता कहे जाने वाले रामेश्वरनाथ काव की भी कहानी है। जिन्हें दुनिया के बेस्ट जासूस में से एक माना जाता था। 60 का दशक। कहानी तब शुरू होती जब भारत 2 दशक पहले ही आजाद हुआ था। एक तरफ़ आतंरिक मोर्चे पर चुनौती तो दूसरी तरफ़ पाकिस्तान और चीन सीमा पर साजिशें। इन सबको देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1968 में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) और ब्रिटिश इंटेलिजेंस एंजीस MI6 की तर्ज पर देश के बाहर के खुफिया मामलों के लिए एक एजेंसी बनाने का फैसला लिया, इसका नाम रखा, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW)।

RAW के पहले निदेशक बनाए गए रामेश्वर नाथ काव। उन्हें यह जिम्मेदारी यूं ही नहीं दी गई थी। फ्रांस के बाहरी खुफिया एजेंसी SDECE के प्रमुख काउंट एलेक्जांड्रे द मरेंजे ने कहा था कि 70 के दशक के 5 सर्वश्रेष्ठ खुफिया प्रमुखों के नाम का जिक्र होगा तो उसमें एक रामेश्वर नाथ काव भी होंगे। 
रामेश्वर नाथ काव ने RAW का निदेशक बनने के 3 साल बाद ही साबित कर दिया कि वह एक बेहतरनी खुफिया प्रमुख हैं। दरअसल, 1971 में पाकिस्तान युद्ध के दौरान काव का खुफिया तंत्र इतना मजबूत था कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि पाकिस्तानी सेना किस दिन हमला करने वाली है। रॉ के पूर्व निदेश आनंद कुमार वर्मा कहते हैं उन्हें बिल्कुल सटीक तारीख की जानकारी थी।

यूपी के वाराणसी में 10 मई 1918 को जन्मे रामेश्वर नाथ काव ने 22 साल की उम्र में 1940 में भारतीय पुलिस सेवा की परीक्षा पास की। उस समय उसे आईपी कहा जाता था। राव को यूपी काडर ही मिला। देश की आजादी के बाद साल 1948 में जब इंटेलिजेंस ब्यूरो की स्थापना हुई तो काव को उसका सहायक निदेशक बनाया गया। उन्हें तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

 

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