जन्मदिन विशेष: फिल्मों के साथ-साथ क्रिकेट का भी शौकीन रखते हैं नाना पाटेकर

By  
on  

विश्वनाथ 'नाना” पाटेकर उर्फ 'नाना पाटेकर एक भारतीय अभिनेता, लेखक और फिल्म निर्माता है, जो हिंदी और मराठी फिल्मो में काम करते है. फिल्म और कला के क्षेत्र में अपने अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार ने भारत के चौथे सर्वोच्च अवॉर्ड पद्म श्री से भी सम्मानित किया हैं. बेस्ट एक्टर, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और बेस्ट विलन की श्रेणी में फिल्मफेयर अवार्ड जीतने वाले वे एकमात्र अभिनेता है.

जन्म और शिक्षा :
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को विश्वनाथ पाटेकर के रूप में महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुद -जंजिरा गांव में छोटा टेक्सटाइल प्रिंटिंग का व्यवसाय करने वाले दिनकर पाटेकर और संजना बाई पाटेकर के घर हुआ था. नाना पाटेकर मुंबई के सर जे.जे. इंस्टिट्यूट ऑफ़ एप्लाइड आर्ट के वे भूतपूर्व छात्र भी थे.

करियर :
स्कूल के जमाने में नाना पाटेकर क्रिकेट के बहुत बड़े प्रेमी थे और मुंबई के शिवजी पार्क में बच्चों के साथ क्रिकेट भी खेला करते थे .उनकी पहली डेब्यू फिल्म गमन (1978) थी, इस फिल्म के बाद उन्होंने मराठी सिनेमा में बहुत से छोटे-मोटे काम किए. पाटेकर ने अपने फिल्मी जीवन में अनेक तरह के किरदार निभाए हैं. कई बार उन्होंने फिल्मो में विलन का रोल भी निभाया है लेकिन ज्यादातर फिल्मों में लीड रोल के र्रोप में काम किया हैं. साथ ही ब्रिटिश टेलीविजन सीरीज लार्ड माउंटबेटन : द लास्ट विक्ट्री में उन्होंने नाथूराम गोडसे की भूमिका भी निभाई थी.

इसके साथ-साथ उन्होंने आज की आवाज (1984), अंकुश (1986), प्रतिघात (1987), मोहरे (1987), त्रिशाग्नी (1988) फिल्मो में भी महत्वपूर्ण रोल निभाए है. मीरा नायर की फिल्म बॉम्बे (1988) उनके प्रदर्शन और कार्य की काफी तारीफ की गई थी. इसके बाद हिंदी सिनेमा जगत का ध्यान उन्होंने अपने प्रदर्शन से आकर्षित और फिल्म परिंदा (1989) में विलन का किरदार निभाया और इसी फिल्म के बाद उन्होंने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर की श्रेणी में अपना पहला नेशनल फिल्म अवार्ड और फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवार्ड जीता था.

इसके बाद अपनी फिल्म प्रहार (1991) से वे डायरेक्टर भी बने, जिसमे उनके साथ माधुरी दीक्षित ने काम किया था और उस फिल्म में उन्होंने भारतीय आर्मी ऑफिसर का रोल निभाया था. अंगार (1992) में अपने रोल के लिए उन्होंने फिल्मफेयर का बेस्ट विलन अवार्ड भी जीता. उस समय बॉलीवुड इंडस्ट्री के सुपरस्टार राज कुमार के साथ उन्होंने फिल्म तिरंगा (1993) में काम किया था. 1994 में आयी उनकी फिल्म क्रांतिवीर के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवार्ड और फिल्मफेयर अवार्ड और स्टार स्क्रीन अवॉर्ड भी मिला था.

इसके बाद बच्चों वाली फिल्म अभय में उन्होंने भूत का किरदार भी निभाया, जिसने 1994 के 42 वे नेशनल फिल्म फेस्टिवल में 2 अवार्ड भी जीते थे. इसके बाद उन्होंने ऋषि कपूर के साथ सह-कलाकार के रूप में फिल्म हम दोनों (1995) की. इसके बाद 1996 में आई फिल्म अग्नि साक्षी में उन्होंने पत्नी को पीटने वाले पति का किरदार और उसी साल फिल्म यशवंत में मनीषा कोइराला के बहरे पिता का किरदार और 1998 में आई फिल्म वजूद में सिजोफ्रेनिक का किरदार भी निभाया था.

फिल्म कोहराम (1999) में उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ सह-कलाकार के रूप में काम किया, इस फिल्म में उन्होंने खुफिया भारतीय आर्मी के इंटेलिजेंस ऑफिसर का किरदार निभाया था, जो फिल्म में गुप्त रूप से बच्चन की तलाश करते है. इस दशक की उनकी प्रसिद्ध फिल्मो में युगपुरुष (1998) और हु तु तु (1999) भी शामिल है. इसके बाद उन्होंने आदित्य पांचोली के साथ क्राइम ड्रामा तरकीब (2000) में सीबीआई डायरेक्टर के रूप में काम करना शुरू किया था, लेकिन इसके बाद तकरीबन 1 साल तक खली बैठे रहने के बाद उन्होंने फिल्म शक्ति (2002) से एक्टिंग करियर में वापसी की, इस फिल्म में उन्होंने अति-उत्तेजित पिता का किरदार निभाया था.

अब तक छप्पन (2004) में उन्होंने एक पुलिस ऑफिसर का किरदार निभाया था, जो एनकाउंटर स्पेशलिस्ट था. अपहरण (2005) में उनके अभिनय के लिये उन्होंने बेस्ट विलन की श्रेणी का दूसरा फिल्मफेयर बेस्ट विलन अवॉर्ड जीता और साथ ही स्टार स्क्रीन अवार्ड भी जीता था. टैक्सी नं. 9211 (2006) में उन्होंने टैक्सी ड्राईवर की भूमिका निभाई थी. इसके बाद पाटेकर ने वेलकम (2007) में कॉमेडी रोल किया, जिसमे उन्हें दुबई का अपराधो का बादशाह दिखाया गया था, जिसकी जिंदगी में एक बार तो भी हीरो बनने की इच्छा रहती है.

इसके बाद उन्होंने संगीत सिवान की फिल्म एक (2009) में काम किया. फिल्म पाठशाला (2010) में उन्होंने स्कूल के हेड मास्टर का रोल किया. साथ ही प्रकाश झा की मल्टी-स्टारर राजनीतिक ड्रामा फिल्म राजनीती (2010) में उन्होंने अपने अभिनय से लोगो को आकर्षित किया. 2011 में उन्होंने आलोचकों द्वारा सराही गयी फिल्म शागिर्द और मराठी फिल्म देउल में काम किया था. इसके बाद उनकी अगली फिल्म राम गोपाल वर्मा की दी अटैक्स ऑफ 26/11 (2013) थी, जो 2008 के मुंबई अटैक पर आधारित है, जिसमे पाटेकर ने उस समय के जॉइंट पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया का रोल निभाया था.

2014 में, उन्होंने एक और मराठी फिल्म डॉ. प्रकाश बाबा आमटे – दी रियल हीरो की थी. 2015 में उन्होंने 2 सीक्वल फिल्मे अब तक छप्पन 2 और वेलकम बेक की, जो अब तक छप्पन और वेलकम का सीक्वल थी. 2016 में उन्होंने गणपतराव ‘अप्पा’ बेल्वालकर की फिल्म और नाटक ‘नटसम्राट’ की, जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। इसके साथ ही दी जंगल बुक (2016) के हिंदी वर्जन में शेरे खान नाम के किरदार की आवाज उन्ही की है.

परिवार
नाना पाटकर ने नीलकंठी पाटकर से शादी की और उनका एक बेटा मल्हार पाटेकर भी है.

अवॉर्ड्स
1990 और 1997 में फिल्म परिंदा और अग्नि साक्षी के लिए क्रमशः उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था.

1995 में उन्हें क्रांतिवीर में उनके रोल के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था.

अपने पुरे करियर और फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने बहुत से फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते है.

1990 में नाना पाटेकर को फिल्म परिंदा के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

1992, 1995 और 2006 में उन्होंने फिल्म अंगार, क्रांतिवीर और अपहरण के लिए फिल्मफेयर बेस्ट विलन अवॉर्ड भी अर्जित किए है.

1995 में मेहुल कुमार की फिल्म क्रांतिवीर में अपने रोल के लिए उन्हें स्टार स्क्रीन का बेस्ट एक्टर अवॉर्ड भी मिला है. यही अवॉर्ड उन्हें बेस्ट विलन की श्रेणी में सन 2006 में प्रकाश झा की फिल्म अपहरण के लिए भी मिला है.

2004 में शिमित अमित की फिल्म अब तक छप्पन के लिए उन्हें हिंदी फिल्म बेस्ट एक्टर की श्रेणी का बंगाली फिल्म जौर्नालिस्ट एसोसिएशन अवार्ड भी मिला है.

अभिनेता नाना पाटेकर हमेशा से ही लोगों की मदद और अपने सटीक जवाबों के लिए जाने जाते हैं , और एक बार फिर से नाना ने काफी जरूरी और अहम प्लान किया है जो भारतीय आर्मी के जवानो के परिवार की मदद के लिए है. नाना ने कहा -'जैसा कि हमारे भारतीय आर्मी के जवान अच्छी कंडीशन में नहीं हैं, उनका परिवार और खास तौर पर शहीदों की फैमिली काफी सोचनीय कंडीशन में रह रही है. इसीलिए हमने नाम फाउंडेशन के तरफ से इन शहीदों की फैमिली के लिए लगभग 10 करोड़ इकठ्ठा करने का प्रण किया है. मैं जानता हूं इतनी बड़ी रकम कोई एक नहीं दे पाएगा, इसीलिए जिससे जो हो सके वो इन शहीदों के परिवार को भेज सकता है, मैंने अपनी तरफ से 50 लाख देने का फैसला किया है और बाकी 9.5 करोड़ भी हमें इकठ्ठा करने होंगे. मैं चाहता हूं कि हरेक भारतीय अपनी स्वेच्छा से इस मिशन का हिस्सा बने जिससे की हम अपने जवानो के लिए कुछ कर पाएं.' वैसे नाना पाटेकर इन दिनों भारतीय जवानो के साथ साथ महाराष्ट्र के सूखा पीड़ित इलाकों और किसानों के लिए भी बहुत कुछ कर रहे हैं साथ ही अजय देवगन के प्रोडक्शन में बन रही आपला मानुष फिल्म के मुख्य अभिनेता भी हैं.

Recommended

Loading...
Share