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Bhakshak Teaser: जर्नलिस्ट बनकर बेटियों का सौदा करने वालों को एक्सपोज़ करेंगी भूमि पेडनेकर, रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

'बधाई दो' एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर इस बार बिलकुल नए किरदार में सामने आने वाली हैं। भूमि अपनी आने वाली फिल्म भक्षक में पत्रकार बनी हैं और उन लोगों को तलाशती हैं जो मासूम लड़कियों का सौदा करते हैं।  भक्षक की कहानी बिहार के मुजफ्फरपुर रिमांड होम कि कहानी से प्रेरित है। जहाँ रात के अँधेरे में लड़कियों से ज़्यादतियां होती थी। इस फिल्म के एलान के साथ इसकी रिलीज डेट का भी एलान किया गया है। यह फिल्म सिनेमाघरों में जाकर सीधे ओटीटी पर स्ट्रीम होगी। फिल्म भक्षक का एक टीजर भी जारी हुआ है, जिसमें भूमि का शानदार रोल देखने को मिल रहा है। 

नेटफ्लिक्स इंडिया ने अपने आधिकारिक एक्स पर फिल्म का टीजर साझा किया है। उन्होंने लिखा, 'एक ऐसे पत्रकार की कहानी जो सच्चाई को उजागर करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।''भक्षक' में संजय मिश्रा और साई ताम्हणकर भी हैं। फिल्म का निर्माण शाहरुख खान ने अपने प्रोडक्शन हाउस रेड चिलीज के तहत किया है।

फिल्म कि कहानी बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर काण्ड से प्रभावित है। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में लड़कयों के साथ ना केवल बालिका गृह  में कर्मचारी गलत काम कर रहे थे, बल्कि बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी भी उसमें शामिल रहे। इस शेल्टर होम बच्चियों का यौन शोषण होता था। 

विश्व भर में चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड यतीम और मासूम, बेघर बच्चियों पर दरिंदगी और जुल्म की कहानी है जिसका मास्टरमांड है ब्रजेश ठाकुर। ब्रजेश फिलहाल अपने 19 साथियों के साथ तिहाड़ उम्रकैद की सजा काट रहा है। दिल्ली की साकेत कोर्ट ने ब्रजेश को अंतिम सांस तक सलाखों के पीछे रखने की सजा सुनाई है। कांड के एक दोषी रामानुज की जेल में ही मौत हो चुकी है। इस मामले में विपक्षी दलों ने सरकार पर इतना हमला किया कि तत्कालीन समाज कल्याण मंत्री मंजु वर्मा को पद से हटा दिया गया था। बाद मंजु वर्मा को अपने पति के साथ जेल जाना पड़ा था।

ये है बालिका गृह कांड की कहानी

दरअसल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस मुंबई की एक टीम द्वारा 2018 में एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति का सर्वेक्षण किया गया था। इसी संस्था द्वारा मुजफ्फरपुर में बालिका गृह का संचालन किया जा रहा था। एनजीओ और बालिका गृह का सर्वेसर्वा ब्रजेश ठाकुर था। सर्वेक्षण के बाद टिस की टीम ने मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपा था। रिपोर्ट में कहा गया कि बालिका गृह में बहुत सारी गड़बड़ियां हैं। वहां रहने वाली लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़ण किया जाता है। जिला प्रशासन के आदेश पर समाजिक सुरक्षा विभाग के तत्कालीन सहायक दिवेश कुमार शर्मा के बयान पर 31 मई को महिला थाना में FIR दर्ज की गयी। आश्चर्यजनक रूप से उस FIR में मास्टमारमांड ब्रजेश ठाकुर का नाम नही था। यौन उत्पीड़ण और पॉक्सो की धाराओं में सेवा संकल्प एवं विकास समिति की महिला कर्मियों के साथ संचालकों को अभियुक्त बनाया था। पुलिस की जांच में ब्रजेश ठाकुर को अभियुक्त बनाया गया।

इस कांड की गम्भीरता  को देखते हुए ब्रजेश ठाकुर को पहले हिरासत में लिया गया। बाद में तत्कालीन SSP हरप्रीत कौर के आदेश पर   ब्रजेश ठाकुर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस प्रकरण में ब्रजेश ठाकुर की महिला साथी मधु उर्फ शाइस्ता परवीन भी शामिल थी। लेकिन ब्रजेश की गिरप्तारी के साथ ही वह फरार हो गयी थी। मुजफ्फरपुर पुलिस ने कांड दर्ज होने के साथ ही  बालिका गृह में रहने वाली सभी ल़ड़कियों को दूसरे जिले के होम में भेज दिया था।

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