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जानें, कौन सा दादासाहेब फाल्‍के अवॉर्ड है असली?

दादासाहेब फाल्के को आज वाकई अचरज हो रहा होगा. इंडियन सिनेमा के पिता कहे जाने वाले इस शख्स के नाम पर दादासाहेब फाल्के फिल्म फाउंडेशन ऑफ़ मुंबई (जो अधिकांशतः लाइमलाइट में नहीं है) ने फिल्म इंडस्ट्री में एक्सिलेंस अवॉर्ड्स देने का चलन शुरू किया था. यह देश का सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड है जो मनोरंजन जगत में योगदान के लिए कलाकारों का सम्मान करता है. इसमें कुछ गलत नहीं है. अब समस्या यहां पैदा हो गयी है कि लोग “दादासाहेब एक्सिलेंस अवॉर्ड्स” और "नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स'' के दौरान दिए जाने वाले ''दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड" के बीच भ्रमित हो रहे हैं. असल में हर साल होने वाले नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का संचालन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय कि तरफ से फिल्म समारोह निदेशालय करता है.

यह कन्फ्यूज़न की स्थिति पैदा हुयी पिछले हफ्ते जब 65वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की घोषणा की गयी और बॉलीवुड सुपरस्टार विनोद खन्ना, जिनका निधन गत वर्ष 27 अप्रैल को हुआ था, को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. विनोद साहब इस अवॉर्ड के हकदार भी थे, इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन उसके बाद जब "दादासाहेब फाल्के एक्सिलेंस अवॉर्ड्स” की बारी आयी, तो पता चला कि फाल्के साहब के नाम पर तमाम अवॉर्ड्स दिए गए जिनमें कई तो न्यूकमर्स भी शामिल थे. और अवॉर्ड्स लेने वाले भी आश्चर्यचकित थे कि यह अवॉर्ड्स उन्हें कैसे मिल सकते हैं. अवॉर्ड्स पाने वालों में तमन्ना भाटिया (बाहुबली), कृति सेनन (बरेली की बर्फी), अदिति राव हैदरी (भूमि), रणवीर सिंह (पद्मावत), अनुष्का शर्मा (बतौर प्रोड्यूसर), रानी मुखर्जी (हिचकी), राजकुमार राव (न्यूटन) और शाहिद कपूर (प्रतिभाशाली अभिनय के लिए) आदि शामिल थे.

 

अब सिनेमा प्रशंसक यह जानना चाहते थे कि आखिर ये अवॉर्ड्स कहां से आये? तो जनाब कहानी शुरू होती है साल 2016 से. जब मनोज कुमार को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाज़ा गया था तब उस साल सोशल मीडिया पर काफी बवाल मचा कि हंसल मेहता की फिल्म "अलीगढ़" में डॉक्टर श्रीनिवास रामचंद्र सिरस का किरदार निभाने के लिए मनोज बाजपेयी को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड दिया जा रहा है. मनोज बाजपेयी ने एक न्यूज़ रिपोर्ट शेयर की और बताया कि यह सम्मान पाकर उन्हें कितना गर्व महसूस हो रहा था. उसके बाद हद तो तब हो गयी जब खबर आयी कि डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह ‘इंसान’ को उनकी फिल्म "एमएसजी: द मैसेंजर ऑफ़ गॉड" के लिए बतौर ‘मोस्ट पॉपुलर एक्टर, डायरेक्टर और राइटर’ दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड दिया जाएगा. किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि इस विवादित गुरु, जिसकी फिल्मों की तो आलोचक धज्जियां उड़ा देते हैं और ऑडियंस एक सिरे से नकार देती है, को कैसे इतना सम्मानित अवॉर्ड दिया जा सकता है?

बाद में असलियत पता चली कि नेशनल अवॉर्ड्स की लिस्ट में दिया जाने वाला दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड भारत के राष्ट्रपति द्वारा नयी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में दिया जाता है, और उसके साथ एक स्वर्ण कमल पदक, एक शॉल और 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाता है. वहीं दूसरी तरफ, "दादासाहेब फाल्के एक्सिलेंस अवॉर्ड्स” का समापन मुंबई के ट्यूलिप स्टार होटल में हुआ - जिसको आमतौर पर शादियों और पार्टियों के लिए बुक किया जाता है. यही नहीं, सोशल मीडिया फ़ॉलोअर्स ने तो यहां तक पता लगाया कि दादासाहेब फाल्के फिल्म फाउंडेशन की तो अपनी कोई वेबसाइट तक नहीं है. इनका बस एक फेसबुक पेज है - जिसको ठीक से मैनेज भी नहीं किया जाता है - और उस पेज पर एक वेबसाइट का डेड लिंक है और इस संगठन के प्रेजिडेंट अशफ़ाक़ खोपकर की फोटोग्राफी!

इस अवॉर्ड फंक्शन में दिए जाने वाले अन्य अवॉर्ड थे शाहरुख खान (बतौर किंग ऑफ़ बॉलीवुड), मधुर भंडारकर (भारत में महियइला केंद्रित सिनेमा में योगदान के लिए), और आर्य बब्बर (टीवी शो संकट मोचन महाबली हनुमान में रावण का किरदार निभाने के लिए बतौर बेस्ट डेब्यू आर्टिस्ट ऑफ़ द ईयर). जाहिर तौर पर सभी कलाकार अपमना अवॉर्ड लेने और कृतज्ञता व्यक्त करने यहां पहुंच भी गए. फिल्म जर्नलिस्ट्स का मानना है कि कई एक्टर्स अवॉर्ड्स के भूखे होते हैं इसलिए वो अवॉर्ड का नाम सुनकर ललचा जाते हैं. लेकिन असली दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड वही है जो सरकार द्वारा दिया जाता है. बाकी सब बकवास हैं.

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