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फ‍िल्‍म '102 नॉट आउट' में अमिताभ बच्‍चन गाएंगे ये क्‍लास‍िकल सॉन्‍ग

1979 की पॉपुलर फिल्म 'मिस्टर नटवरलाल' में पहली बार सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज में 'मेरे पास आओ मेरे दोस्तों' गाना गाय था. उनकी भारी-भरकम आवाज़ के बावजूद यह गाना काफी लोकप्रिय हुआ और ऑडियंस ने इसे बहुत पसंद भी किया. उसके बाद बच्चन साहब ने बड़े ही ठहराव के साथ कई बॉलीवुड फिल्मों के गानों में अपनी आवाज़ दी.

'नीला आसमां सो गया' और 'रंग बरसे' (1981 - सिलसिला), 'मेरे अंगने में' (1981 - लावारिस), 'मैं यहां तू वहां' (2003 - बाग़बान), 'रोज़ाना' (2007 - निशब्द), 'एकला चोलो रे' (2012 - कहानी), 'पिडली सी बातें' (2015 - शमिताभ) और 'यारी, तेरी यारी' (2016 - वज़ीर) आदि पिछले कुछ समय में अमिताभ बच्चन द्वारा गाये हुए कुछ बेहतरीन और यादगार नग़्मे हैं.

अब ऐसा धमाल बच्चन साहब एक बार फिर करने जा रहे हैं. जल्दी ही ऋषि कपूर के साथ उनकी फिल्म '102 नॉट आउट' रिलीज होने वाली है जिसे डायरेक्ट किया है उमेश शुक्ला ने. संगीत के प्रति बच्चन साहब का रुझान और झुकाव यहां साफ़ दिखता है कि उन्होंने इस फिल्म का एक ट्रैक 'बडुम्बा' न सिर्फ क्रिएट किया है, बल्कि अपने को-स्टार ऋषि कपूर के साथ इसे गाया भी है. और यही नहीं, हाल ही में उन्होंने खुलासा किया है कि इस फिल्म के लिए उन्होंने बीते ज़माने का पॉपुलर हिट सॉन्ग 'वक़्त ने किया क्या हसीं सितम' भी रीक्रिएट किया है. यह सॉन्ग बच्चन साहब के दिल के बहुत करीब है. 1959 की फिल्म 'कागज़ के फूल' के इस सुपरहिट सॉन्ग का ओरिजिनल म्यूज़िक दिया था एस डी बर्मन ने और इसे गाया था गीता दत्त ने.

बिग बी, जो '102 नॉट आउट' फिल्म में 102-साल के बूढ़े लेकिन दिल से जवान शख्स का किरदार निभा रहे हैं, ने यह सॉन्ग अपनी विशेष गहरी और उभरी आवाज़ में ही रिकॉर्ड किया है. इस सॉन्ग को अरेंज किया है रोहन उत्पत और विनायक के साल्वी ने. इसके बारे में बात करके करते बच्चन साहब थोड़ा भावुक हो गए. उन्होंने बताया, "यह मेरा पसंदीदा सॉन्ग है. 'कागज़ के फूल' फिल्म भी मेरी सबसे मनपसंद क्लासिक फिल्मों में से एक है. गुरुदत्त साहब और वहीदा रहमान जी ने इसमें कमाल का काम किया था. गुरुदत्त साहब इसके डायरेक्टर भी थे. इस बेहतरीन फिल्म को उस समय इतना नहीं सराहा गया था जब यह रिलीज़ हुयी थी, लेकिन आज यह एक आइकॉनिक फिल्म मानी जाती है. मैं कभी नहीं भूल सकता कि यह सॉन्ग कैसे शूट किया गया था, जब गुरुदत्त साहब एक स्टेज पर खड़े थे और रोशनी की एक किरण उनके ऊपर तैर रही थी. इस गीत का एक सन्दर्भ '102 नॉट आउट' फिल्म में भी मिलता है, इसीलिए फिल्ममेकर्स चाहते थे कि मैं उस पर्टिकुलर सीन के लिए यह सॉन्ग गाऊं.'

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