ओम पुरी ने अपने आखिरी इंटरव्यू में जानिए लोगों से क्या की थी रिक्वेस्ट

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'लश्टम पश्टम' ओम पुरी जैसे लीजेंड द्वारा की गयी आखिरी फिल्म है. यह फिल्म 10 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. इस फिल्म का प्रोडक्शन और डायरेक्श दुबई बेस्ड डायरेक्टर मानव भल्ला ने किया है. बता दें कि यह मानव की पहली बॉलीवुड फिल्म है. फिल्म की कहानी एक भारतीय और एक पाकिस्तानी की है जो नेशन्स कप जितने का सपना देखते हैं. लेकिन यह फिल्म कोई सपोर्ट ड्रामा फिल्म ना हो कर उस से जुड़ी लोगों की कहानी है. तो चलिए आपको बतातें हैं ओम पुरी ने अपने निधन से पहले दिए इस इंटरव्यू में फिल्म के बारे में क्या कहा है.

लश्टम पश्टम पर काम करना आपके लिए कैसा अनुभव था?

मुझे मानव के साथ काम करना अच्छा लगा; वह बहुत ही आकर्षक और बहुत प्यारा है. फिल्म में मेरी भूमिका बहुत अच्छी है. काम बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से हुआ, मैंने अपना डबिंग किया है और अब मैं इसे देखने का इंतजार कर रहा हूं. मैं फिल्म में अपने प्रदर्शन से वाकई खुश हूं, मुझे पता है कि मैं खुद की प्रशंसा कर रहा हूं लेकिन अब सच है तो क्या करें. (मुस्कान)

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हमें अपने फिल्म के किरदार के बारे में बताएं.

मैं फिल्म में एक पाकिस्तानी टैक्सी ड्राईवर की भूमिका में हूं. एक भारतीय जो पाकिस्तान में खो गया है और इस्लामाबाद जाने की इच्छा रखता है, जहां बम ब्लास्ट के कारण पूरा शहर जल रहा है, मेरे किरदार को वह वहां ले जाने के लिए कहता है. टैक्सी ड्राईवर ने उसे मना कर देता है लेकिन युवा इतना हताश है कि किसी भी तरह उसे इस्लामाबाद जाना चाहता है. जब की यह युवक एक भारतीय है, टैक्सी ड्राइवर यह जानने के बावजूद उसकी मदद करने का फैसला करता है जिसमे बहुत सारा जोखिम हैं. वह खाना खाने के लिए बीच में एक जगह रुकते हैं और वहां से उस युवक के मन में टैक्सी ड्राईवर के लिए शक की भावना घर कर लेती हैं. लेकिन आखिर में युवक की आंखें खुलती है और वह टैक्सी ड्राईवर का एहसान मानता है.

एक डेब्यूटेंट डायरेक्टर और एक पूरी नई टीम के साथ काम करना आपके लिए कैसा अनुभव था?

खैर, मुझे नहीं पता था कि यह एक नई टीम है, अगर मुझे इसके बारे में पता होता, तो शायद मैंने प्रोजेक्ट नहीं लिया होता (हंसे). मैंने कभी महसूस नहीं किया कि यह एक नई टीम है. आप लोगों ने अच्छी तरह से अध्ययन किया, फिल्म शुरू करने से पहले सबकुछ सीखा; ऐसे ही थोड़ी आकर कैमरा पकड़े और चला दिया!

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नए फिल्म मेकर्स के कोई सलाह?

छोटी फिल्मों के लिए, और अधिक कठिनाइयां हैं क्योंकि आज के समय में प्रचार के नियम इस तरह से किए गए हैं कि एक छोटी सी फिल्म इसे बर्दाश्त नहीं कर सकती है. इसलिए मैं उन लोगों से रिक्वेस्ट करता हूं जो इस इंटरव्यू को देखेंगे कि जब भी आप छोटी फिल्मों के बारे में कुछ पढ़ते हैं या उनके बारे में सुनते हैं, तो कृपया जाएं और देखें क्योंकि वे रिलीज की तारीख से तीन महीने पहले शोर नहीं कर सकते हैं, न ही उनके पास बहुत सारे टीवी पर विज्ञापन हो सकते हैं. और ना भी बड़े पोस्टर लगवा सकते हैं. मौजूदा रुझानों के मुताबिक बड़े सितारों वाली एक बड़ी फिल्म के मामले में, उन्हें सामूहिक रूप से 5000 - 6000 स्क्रीनों में रिलीज मिलती है. क्योंकि चर्चा बहुत सारे प्रचार के माध्यम से बनाई जाती है, और फिल्म कम से कम 4 दिनों हाउसफुल रहती है. इन सब के बाद अगर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कम करती है तो वह केक पर एक चेरी की तरह है और नहीं कर पाती तो कम से कम फिल्म उन 4 दिनों में अपने खर्च निकालने का प्रबंधन करती है, जो एक छोटी फिल्म के लिए मुश्किल है. इसलिए लोगों को यह समझाने के लिए कि यह एक अच्छी फिल्म है, एक अच्छी कहानी है, एक छोटी सी फिल्म के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है.

आखिरकार, मैं कहूंगा, आप (मानव) को फिल्में बनाना बंद नहीं करना चाहिए. मेरा कहना यह नहीं है कि अन्य डायरेक्टर बड़े एक्टरों के साथ अच्छी फिल्में नहीं बनाते हैं, लेकिन मेरा मानना ​​है कि यथार्थवादी फिल्में भी दिखाना महत्वपूर्ण है.

मानव के शब्दों में, ओम पुरी ने अपनी मृत्यु से पहले फिल्म में अपने सभी सीन्स को पूरा करने में कामयाब रहे, इसलिए सिनेमैटिक लीजेंड के लिए कोई सीजीआई अपीयरेंस नहीं होगी.

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