By  
on  

मरने से पहले बालासाहेब ठाकरे के बेड के पास रखी थी अमिताभ बच्चन की तस्वीर

शिवसेना के प्रमुख बाल ठाकरे की जिंदगी पर बन रही फिल्म 'ठाकरे' का पहला लुक हाल ही में वायरल हुआ था. इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी बाळासाहेब ठाकरे की भूमिका में दिखाई देंगे. हाल ही में इस फिल्म की घोषणा के लिए एक कार्यक्रम रखा गया था, जहां अमिताभ बच्चन शरीक हुए थे.

इस मौके पर अमिताभ बच्चन ने बालासाहेब को लेकर अपना एक्सपीरियंस लोगों के साथ शेयर किया। उन्होंने अपनी स्पीच के दौरान कहा कि 'जब आखिरी समय में बालासाहेब अपने बेड पर सो रहे थे, तब उनके बेड के पास मेरी तस्वीर रखी हुई थी. मुझे नहीं पता था कि बालासाहेब मुझसे इतना स्नेहा रखते हैं. इसे देखकर मैं बेहद गदगद हो गया और उनकी यह बात हमेशा के लिए मेरे मन में घर कर गई.'

'मेरे लिए यह मौका बहुत खास है, बालासाहब ठाकरे जी के साथ मेरा बेहद निजी और पारिवारिक संबध रहा है। उनका कोई भी कार्यक्रम होता था तो वह मुझे बुलाते थे और मैं जाता था। आज तो मुझे यहां आना ही था क्योंकि यह कार्यक्रम बालासाहब जी का है। संजय राउत की कलम तलवार की तरह चलती है इसलिए मुझे उनसे डर लगता है। संजय जी से मेरा अनुरोध है कि इस फिल्म को सिर्फ तीन घंटे की न बनाएं, बालासाहब के पूरे व्यक्तित्व को मात्र तीन घंटे में नहीं दिखाया जा सकता है इसलिए आपसे मेरी प्रार्थना है किइस फिल्म को और समय दें।'

बालासाहब के साथ मेरा पारिवारिक संबंध रहा क्योंकि जिस दिन से मैं उनसे मिला न जाने क्यों उनको लगा कि मैं उनके परिवार का एक सदस्य हूं, यह प्यार उनकी उदारता और बड़प्पन था। लगभग चालीस साल पहले जब मैं उनसे पहली बार मिला तो उन्ही दिनों मेरा विवाह हुआ था तो उन्होंने मुझे फोन किया कि तुम्हारा विवाह हो गया है मैं तुम्हारी पत्नी से मिलना चाहता हूं, तुम घर आओ तो मैं उनके घर मातोश्री गया। घर में आई ने जिस तरह जया का स्वागत किया वह स्वागत ऐसा था जैसे वह अपनी बहु का सम्मान कर रही हों। उसी दिन मैंने तय कर लिया कि बालासाहब मेरे लिए पिता सामान हैं और मेरा संबंध इनके साथ हमेशा रहेगा। बातें तो बहुत सी हैं लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जो शायद किसी को पता भी न हों।  1982 में जब मैं फिल्म कुली की शूटिंग के दौरान घायल हुआ तो कुछ दिन तो मैं बेंगलुरु में बेहोश रहा लेकिन जब यह तय हुआ कि अब मुझे बेहोशी की ही हालत में मुंबई शिफ्ट किया जाएगा तो हवाई जहाज में मुझे मुंबई भेजने के लिए रखा गया, उस दिन बहुत बारिश भी हो रही थी। मुझे हवाई अड्डे से सीधा ब्रीज कैंडी अस्पताल ले जाना था लेकिन उस समय भारी बारिश की वजह से कोई भी एम्बुलेंस नहीं आ रही थी तब मुझे बालासाहब की शिवसेना की एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया था। अगर उस दिन सही समय पर एम्बुलेंस नहीं आती तो मेरी अवस्था और ज्यादा खराब हो जाती। ऐसी ही और भी घटनाएं है जब मेरे ऊपर कई बार कोई आरोप लगाया जाता तब बालासाहब मुझे फोन करते और पूछते यह सब क्या सुन रहा हूं, क्या यह सच है, घर आओ मैं बात करना चाहता हूं तुमसे। ऐसा ही एक आरोप जब लगा तो उन्होंने मुझे पूरे परिवार के साथ अपने घर बुलाया मुझे पूछा अब बताओ क्या यह सच है, मैंने कहा इस आरोप में कोई सच्चाई नहीं है तब बालासाहब ने मुझे कहा अब बिल्कुल भी घबराने की जरुरत नहीं है। अभी बाहर बहुत तूफान चल रहा है जब यह तूफान रुक जाएगा तब अपनी बात कहने के लिए बाहर जाना तब मैं तुम्हारे साथ खड़ा रहूंगा। उस समय जब कोई मेरे साथ नहीं था तब बालासाहब का यह साहस देना बहुत बड़ी बात थी।

बालासाहब जब अपनी आखरी सांसे ले रहे थे तब उनके कमरे में जाने का अवसर मुझे उद्धव जी ने दिया था। उस कमरे में बालासाहब के अलावा उस कमरे में उनके एक सहयोगी, आदित्य और मैं था। एक इंसान जिसे हमने इतना प्रबल देखा हो वह आज शय्या में लेता हो और कुछ बोल नहीं पा रहा हो, यह असहनीय दृश्य था। हम लोग लगातार प्रार्थना करते जा रहे थे कि कहीं कुछ हो जाए और वह जीवित हो जाएं लेकिन ईश्वर की जो कृपा थी वह हुआ। वह क्षण मैं कभी नहीं भूल पाता हूं। मैं कभी भी नहीं चाहता था कि बालासाहब को इस अवस्था में देखूं, इसमें प्रबल, इतने जोशीले व्यक्ति आज शय्या में पड़े थे और आखरी सांसे ले रहे थे।'

इस फिल्म के राइटर, प्रोड्यूसर और निर्देशक अभिजीत पांसे हैं. इससे पहले फिल्म के लुक को लेकर नवाजुद्दीन की बेहद तारीफ की जा रही थी, जिसमें बालसाहेब की तरह उनका इंटेंस लुक नजर आ रहा था.

शिवसेना के नेता संजय रावत ने कहा कि इस फिल्म में ड्रामा, शानदार डायलॉग सब कुछ होगा जो एक कमर्शियल फिल्म में रहता है.

Author

Recommended

PeepingMoon Exclusive