Birthday Special: नसीरुद्दीन शाह की वो 5 फिल्में जिनकी अहमियत काफी सालों बाद लोगों को आई समझ

By  
on  

बॉलीवुड के उन चंद दिग्गज सदाबहार कलाकार, जिनकी फिल्म में उपस्थिति ही फिल्म में जान डाल देती है, ऐसे दिग्गज कलाकाल  नसीरुद्दीन शाह 20 जुलाई को अपना 70वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं. 20 जुलाई 1950 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्मे एक्टर नसीरुद्दीन ने हमेशा ही अपनी एक्टिंग से सभी का दिल जीतते रहे हैं. हिन्दी सिनेमा में ऐसे कुछ ही एक्टर्स हैं, जो बॉलीवुड के साथ ही रीजनल सिनेमा में भी अपनी कामयाबी के झंडे गाढ़ सके थे. नसीर ने भाषा को कभी अपने टैलेंट के आड़े नहीं आने दिया. नसीरुद्दीन शाह ने हिन्दी फिल्मों के साथ ही तमिल, कन्नड़, बांग्ला, उर्दू और इंग्लिश फिल्म इंडस्ट्री में भी अपना वर्चस्व स्थापित करने की हमेशा पूरी कोशिश की है. 
नसीरुद्दीन  ने 19 साल की उम्र में 16 साल बड़ी मनारा सीकरी से शादी कर ली थी. उस समय मनारा शादीशुदा थी और एक बच्चे की मां भी थीं. मनारा ने नसीरुद्दीन से शादी की, उनकी एक बेटी है जिसका नाम हीबा शाह है. हालांकि, उनका रिश्ता लंबे समय तक नहीं चला और दोनों अलग हो गए. उसके बाद नसीरुद्दीन रत्ना पाठक से मिले. दोनों ने साल 1982 में शादी कर ली. रत्ना ने नसीरुद्दीन से शादी करने के लिए मुस्लिम धर्म अपना लिया था. नसीरुद्दीन और रत्ना के दो बेटे, इमाद और विवान हैं. 

नसीरुद्दीन शाह के अंदर टैलेंट की कोई कमी नहीं है. 100 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके नसीरुद्दीन ने डायरेक्शन में भी हाथ आजमाया है. नसीरुद्दीन शाह को कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है. कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें 3 बार नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है. नसीरुद्दीन शाह को 'सरफरोश', 'जाने भी दो यारों', 'ए वेडनसडे', 'मासूम', 'आक्रोश, 'मिर्च मसाला', 'भवानी भवई'. 'अर्ध सत्य', 'मंडी' और' चक्र' जैसी फिल्मों से विशेष शोहरत हासिल हुई थीं. आज हम नसीर जी की उन 5 फिल्मों के बारे में बता रहे है जो खास होते हुए भी आम बन गई. 

1- फिल्म- स्पर्श 
1980 में आई सई परांजपे की फिल्म में नसरुद्दीन शाह ने एक अंधे प्रिंसिपल का किरदार निभाया था. ये किरदार नसरुद्दीन जी के बेस्ट किरदार में से एक हैं. इस फिल्म के बाद लोगों ने नसरुद्दीन के एक्टिंग का लोहा माना था. फिल्म ‘स्पर्श’ को आखिर जो चीज अलग बनाती है, वह है इस विशिष्ट क्षमताओं वाले चरित्र अनिरुद्ध का एक पीड़ित के खांचे में खड़े होने से इनकार का हठ. अनिरुद्ध अपने आसपास मौजूद लोगों की सहानुभूति और रहमदर्दी को भी अपने से दूर छटकाता रहता है. फिल्म में अनिरुद्ध की स्थिति कहीं भी भावुक नहीं बनाई गई थी.  ‘स्पर्श’ फिल्म के लिए नसीरुद्दीन शाह को जो राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था, वह एक तरह से बहुत ही छोटा रिवॉर्ड था क्योंकि विश्व सिनेमा के इतिहास में यह एक ब्लाइंड व्यक्ति और उसके अंदर के संसार का सबसे बढ़िया चित्रण था. 

2- फिल्म- कथा
साल 1982 में आई इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह के अलावा दीप्ति नवल और फारुख शेख मुख्य भूमिका में थे. यह फिल्म मुंबई में चॉल में रहने वाले लोगों पर आधारित थी. फिल्म में नसीर जी ने राजाराम पुरषोत्तम जोशी का किरदार निभाया था. जो एक क्लर्क है, अच्छे दिल का होने के साथ ही बहुत मेहनती भी है. फिल्म में नसीर जी अपने पड़ोसी संध्या यानी दीप्ति नवल से बेहद प्यार करते थे लेकिन संध्या की शादी वासुदेव यानी फारुख शेख से फिक्स हो जाती है. लेकिन किसी कारणवश यह शादी टूट जाती है. फिर राजा संध्या को शादी के लिए प्रपोज करते हैं लेकिन संध्या तब तक वासुदेव के बच्चे की मां बनने वाली होती हैं...इसके बावजूद राजाराम संध्या को अपनाते हैं. इस फिल्म में नसीर जी का अभिनय बेजोड़ था. 

3- फिल्म- अलबर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है 
यह 1980 में आई एक बॉलीवुड फ़िल्म है जिसे पर्दे पर नसीरुद्दीन शाह , स्मिता पाटिल और शबाना आज़मी थे.  सईद मिर्ज़ा डायरेक्टेड इस फिल्म को कल्ट क्लासिक का दर्जा प्राप्त है. जिसमें नसीर जी ने अल्पसंख्यक समुदाय के एक गुस्सैल सदस्य का किरदार निभाया था. अल्बर्ट पिंटो जहां एक शोषित वर्ग का शख्स है जो अपने हालातों से इतना परेशान है कि उन्हें बदलना चाहता है और उसके ज़रिए कहानी सामाजिक राजनैतिक परिदृश्य को पूरा सामने लाकर खड़ा कर देती है. 

4- फिल्म- फ़िराक़ 
साल 2008 में आई नंदिता दास की फिल्‍म फिराक़ गुजरात राज्य में हुए कुख्यात गोधरा कांड के 24 घंटे और एक महीने बाद हुए भीषण सांप्रदायिक नरसंहार में आम आदमी के दर्द को दिखाने का सशक्‍त प्रयास करती है. फिल्‍म की पात्र आरती (दीप्ति नवल), एक मुस्लिम महिला छवि को भुला नही पाती है जो दंगो के समय उससे संरक्षण की भीख मांगती है लेकिन वह उसके मुंह पर दरवाजा बंद कर देती है. खान साहब (नसीर) एक मशहूर संगीतकार है जो कि हिदू बहुल इलाके मे रहते है. वह अपने चारो आरे हो रही तबाही को समझ नही पा रहे है. उन्‍हें लगता है कि दो समुदाय एक साथ शांतिपुर्वक रह सकते है. फिराक़ का सबसे मजबूत पक्ष दंगो से प्रभावित साधारण हिंदू व मुस्लिम पात्र है जो कि आम आदमी है.

 

5- फिल्म- द हंगरी

2017 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चयनित नसीरुद्दीन शाह की फिल्म द हंगरी शेक्सपियर के प्ले टाइटस एंड्रोनिकस पर आधारित थी. फ़िल्म में नसीर साहब ने एक ग्रे शेड वाला किरदार निभाया. फ़िल्म में उनके कैरेक्टर का नाम तथागत है जो पावर और पैसे का भूखा है. नसीर ने इस फ़िल्म में स्टेज प्ले जैसी एक्टिंग की है जो अलग फील देती है.

Recommended

Loading...
Share