Movie Review: अंदर के दानव से बचने की कहानी है तापसी पन्नू की 'गेम ओवर'

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फिल्म: गेम ओवर 

 

कास्ट: तापसी पन्नू, विनोदिनी वडियानाथन

 

डायरेक्टर: अश्विन सरावनन

 

'स्टार वॉर्स' और 'द मैट्रिक्स' जैसे गेम्स को फिल्मों में उतारने का कॉन्सेप्ट हॉलीवुड ने बहुत ही बखूबी से निभाया है. कॉलीवुड डायरेक्टर अश्विन सरावनन ने इसी कांसेप्ट को इंडियन सिनेमा में लाया फिल्म 'गेम ओवर' से. 80 के दसक का पॉपुलर गेम पैक मैं को इस्तेमाल करके फिल्म की कहानी को दर्शाया गया है. फिल्म की शुरुआत होती है गुडगांव में एक महिला के कत्ल से. यह एक रोंगटे खड़े कर देने वाला कत्ल है जिसमें कातिल ने विक्टिम को बांध कर जला दिया. शुरुआत में ही पता चल जाता है कि ये एक सीरियल किलर है जो एक अजीब से पैटर्न को फॉलो करते हुए अपने विक्टिम को ढूंढता है. अब ये पैटर्न क्या है यह आपको फिल्म देखने के बाद ही समझ में आएगा.

मिलिए एक गेम डेवलपर, स्वप्ना (तापसी पन्नू) से, जो गुरुग्राम के एक बंगले में अपने घर में कमला अम्मा (विनोदिनी वडियानाथन) के साथ रहती है. स्वप्ना 'एनिवर्सरी इफेक्ट'और 'नेक्टोफोबिया’ से पीड़ित है. अंधेरे से उनका डर एक घटना से उत्पन्न होता है जो पिछले साल नई ईयर से पहले की शाम हुई थी. वह अपने माता-पिता, बाहरी दुनिया के साथ संपर्क में कटौती करती है, और घर से एकांत में वीडियो गेम विकसित करने में खुशी पाती है. उनका स्ट्रेस बस्टर गेम पैक मैन में अपना खुद का स्कोर हरा देना है.

 

जब स्वप्ना को पता चलता है कि उसकी कलाई पर जॉयस्टिक टैटू में मृत लड़की की राख है, तो कहानी एक अनोखा मोड़ लेती है! एक नियमित टैटू के बजाय, स्वप्ना अब एक 'मेमोरियल’ टैटू के साथ अपनी ज़िन्दगी बिताती है जिसमें किसी प्रियजन की राख को स्याही के साथ मिलाया गया है और उनके शरीर पर अंकित किया गया है. यह बात स्वप्ना को बहुत पहले से ही परेशान कर देती है. जब टैटू कलाकार मृतक लड़की की मां से मिलने में स्वप्ना की मदद करता है तो उन्हें एक नोट मिलता है, जिसमें लिखा है, '' हम सभीं के पास दो जीवन होते हैं, दूसरा तब शुरू होता है जब हमें यह एहसास होता है कि हमारे पास एक ही जीवन है."

 

चीजें और बिगड़ जाती हैं जब न्यू ईयर की शाम को स्वप्ना खुद सीरियल किलर का शिकार बन जाती है. बिना स्पॉइलर देते हुए बताते हैं कि अब स्वप्ना व्हीलचेयर पर हैं और इस सिचुएशन से लड़ती हैं. क्लाइमेक्स यही है कि कैसे स्वप्ना इस मुश्किल से पाने आपको निकालती है या निकाल भी पाती है या नहीं! क्या वो इस बात को समझती है कि उनके पास सिर्फ एक ही जीवन है?

 

1 घंटे और 42 मिनट के रनटाइम के साथ, 'गेम ओवर' डरावने पलों के साथ भरी हुई है. निर्देशक अश्विन और काव्य रामकुमार दोनों ने इस फिल्म को साथ में लिखा है. इस तमिल-तेलुगु द्विभाषी को हिंदी में डब किया गया है. तापसी ने बहुत ही बेहतरीन परफॉरमेंस दी है जो अपने ही अंदर के दानव से लड़ती रहती है और ऐसे में उनके दर्द भरे भाव उनके अभिनय को विश्वसनीय बनाते हैं. कमला अम्मा के रूप में विनोदिनी के आंतरिक तूफान को शांत करती हैं, अपने रोल में उन्होंने भी काफी अच्छा काम किया है. क्रेडिट्स तो ए वसंत की सिनेमैटोग्राफी को भी जाना चाहिए, जिन्होंने एक घर में इस फिल्म को बहुत ही अच्छी तरह शूट किया है. रॉन एथन योहान द्वारा बैकग्राउंड स्कोर भी बहुत इम्प्रेसिव था, इस सायकॉलॉजी थ्रिलर को उन्होंने बहुत ही बेहतरीन ढंग से पेश किया है. 'गेम ओवर' का फर्स्ट हाफ थोड़ा लम्बा है लेकिन एडिटर रिचर्ड केविन दूसरे हाफ में पकड़ मजबूत करते हैं. और क्लाइमेक्स की ओर देखा जाए तो इस फिल्म में आप अंत तक उत्साहित रहेंगे. वीडियो गेम्स के कांसेप्ट को फिल्म 'गेम ओवर' में बहुत ही महत्वपूर्ण तरीके से पेश किया गया है. यह फिल्म सिर्फ गेमर पर ध्यान केंद्रित नहीं करती है, बल्कि वीडियो गेम की तरह, खेल तब तक खत्म नहीं होता है जब तक कि आपके सभी लाइफ खो नहीं जाते, इस पर भी फोकस करती है. अंत तक आप इस फिल्म से जुड़े रहेंगे.

पीपिंग मून 'गेम ओवर' को 3.5 मून्स देता है.

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