Tindey Review: डेटिंग ऐप्स के आकर्षण में उलझी मजेदार कहानी है राजेश शर्मा, अश्विनी कालसेकर और अदा शर्मा की यह शार्ट फिल्म

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शार्ट फिल्म: टिंडे 
कास्ट: अदाह शर्मा, राजेश शर्मा और अश्विनी कालसेकर
डायरेक्टर: सीमा देसाई 
प्रोड्यूसर: पराग देसाई और सेजल कौशिक
मून्स: 4 मून्स

लॉकडाउन के बीच एंटरटेनमेंट के लिए आप टीवी पर शोज और फिल्में देख रहे हैं, लेकिन हाल ही में बेहद मजेदार और खूबसूरत कहानी से भरपूर शार्ट फिल्म 'टिंडे' जारी हुई है. शार्ट फिल्म की शुरुआत एक आम से लगने वाली कपल से होती है, जो एक दूसरे से लड़ते झगड़ते हैं, लेकिन एक दूसरे से बेहद प्यार भी करते हैं. क्रांति (राजेश शर्मा) एक सीधा-साधा पति है, जो अपनी पत्नी (अश्विनी कालसेकर) से प्यार करता है. लेकिन एक दिन ऑफिस में पहुंचने के बाद उसके ही साथ काम करने वाला शख्स उसे शादी के बाद भी डेटिंग एप्लीकेशन के जरिये पत्नी को चीट करने की सलाह देता है. जिसके बाद क्रांति भी टिंडे (डेटिंग एप्लीकेशन) को इस्तेमाल करने लगता है.

वहीं दूसरी तरफ मौली (अदाह शर्मा) को अपनी एक दोस्त की शादी में बाली जाना होता है, लेकिन वो नहीं जा सकती क्यों कि उसके पास पासपोर्ट नहीं है और सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि पासपोर्ट बनाने के लिए उसे पास आधार कार्ड नहीं है. अब इस मुश्किल से निकलने का जरिये उसे टिंडे (डेटिंग एप्लीकेशन) पर उसे क्रांति के रूप में मिलता है. ऐसे में दूसरे दिन क्रांति को ऐप पर खुद के लिए मैच दिखाई देता है जो कि और कोई नहीं बल्कि मौली होती है. दोनों के बीच चैट होती है और दोनों 6 बजे मिलने की प्लानिंग करते हैं. पहले ही मुलाकात में क्रांति मौली को देख पूरी तरह से फ्लैट हो जाता है. अपने से बेहद ही कम उम्र की लड़की को इंप्रेस करने में वह किसी तरह की कसर नहीं छोड़ता, लेकिन मौली भी अपने आधार कार्ड के लिए उससे प्यारी प्यारी बातें करती रहती है. आगे चलकर दोनों एक बार फिर मिलते हैं जहां पर मौली बताती है कि उसे अपनी सहेली की शादी में जाना है, लेकिन बाली जाने के लिए उसके पास पासपोर्ट नहीं है और पासपोर्ट बनाने के लिए उसके पास आधार कार्ड नहीं है. जिस पर हंसते हुए क्रांति कहता है कि मैं खुद आधार कार्ड के ऑफिस में काम करता हूं मुझे अपनी डिटेल दो मैं बना दूंगा. साथ ही यह भी सवाल कर बैठता है कि क्या तुमने मेरी प्रोफाइल में यह पढ़कर तो मुझसे फ्रेंडशिप नहीं की है, लेकिन बात को टालते हुए मौली कहती है कि तुम्हारे चेहरे से नजर कहां हटी थी कि वो सब देखूं.

कहानी आगे बढ़ती है और क्रांति अपनी पत्नी को 2 दिन के लिए बाहर रिश्तेदार के यहां भेजना चाहता है, ऐसा इसलिए क्योंकि वह मौली को अपने घर पर बुलाना चाहता है. ऐसे में घर से निकलते समय क्रांति की पत्नी उसे खाना टाइम से खाने और दिए गए पैसे ठीक से खर्च करने की सलाह देती है. जैसे ही क्रांति की पत्नी शामो के घर के दरवाजे पर पहुंचते ही सरप्राइज देते हुए मौली बहुत सारी चीजे लेकर पहुंच जाती है. जहां वो बात बदलते हुए बताती है कि उन लोगों ने कंपनी की तरफ से यह गिफ्ट पाया है. शामो खुश दिखाई देती है और पति को बोलती है सभी चीजों को ठीक से रख लें और उसे इस्तेमाल करें. जैसे ही वह घर में अंदर जाती है वैसे ही क्रांति से मौली बताती है कि उसने ये सब सिर्फ आधार कार्ड के लिए किया है.अब आगे यह आपके लिए देखना दिलचस्प होगा कि क्या क्रांति ये सच जानने के बाद मौली को उसका आधार बनाकर देता है कि नहीं और आगे चल कर अपनी पत्नी को और चीट करने की प्लांनिग करता है कि फिर पहले जैसे बन जाता है? अब इन सभी सवालों के जवाब के लिए आपको यह मजेदार शार्ट फिल्म देखनी होगी.

बात करें तीनों एक्टर्स की एक्टिंग की तो तीनों ने अपने-अपने किरदार में जान भूकने में कोई कसर नहीं छोड़ा है, जबकि डायरेक्शन के मामले में सीमा देसाई की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है. यह शार्ट फिल्म बेहद मजेदार होने के साथ इमोशंस से भी भरपूर है. जिसे आप मिस नहीं कर सकते.

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