Dhamaka Review: आत्मविश्वास के साथ कार्तिक आर्यन अपने कंधों पर एक ओवर्ली ड्रामेटिक फिल्म को कैरी करते हैं

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फिल्म: धमाका 

कास्ट: कार्तिक आर्यन, मृणाल ठाकुर और अमृता सुभाष 

डायरेक्टर: राम माधवानी 

ओटीटी: नेटफ्लिक्स 

रेटिंग: 3 मूंस 

राम माधवानी की थ्रिलर 'धमाका' में कार्तिक आर्यन के जीवन का मंत्र है 'जो कहूंगा सच कहूंगा'. कार्तिक, मृणाल ठाकुर और अमृता सुभाष स्टारर 'धमाका' किम ब्योंग-वू की 'द टेरर लाइव' का एक ओवर्ली ड्रैमेटिक अडॉप्शन है. नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई यह फिल्म टीआरपी का पीछा करने वाले एक न्यूज एंकर के इर्द-गिर्द घूमती है जबकि मुंबई शहर पर एक आतंकवादी हमला कर रहा है और जबकि यह अवसर उनके करियर में वापसी का मौका ला सकता है, यह उनके विवेक की कीमत भी लगा सकता है.

1 घंटे 40 मिनट की यह फिल्म इतनी आसान नहीं है. इसकी शुरुआत अर्जुन पाठक (कार्तिक आर्यन) से होती है, जो तलाक के कागजात पर साइन करने से ठीक पहले अपनी पत्नी सौम्या मेहरा पाठक (मृणाल ठाकुर) के साथ बिताए अच्छे पुराने दिनों को याद करता हैं. इसके तुरंत बाद अर्जुन जो 5 सालों से प्राइम-टाइम न्यूज एंकर रहा है, उसे  अपने सहयोगी से अपना रेडियो शो शुरू करने का इशारा मिलता है. लेकिन आज की सुबह कुछ अलग है. अर्जुन के शो पर पहला कॉलर उसे मुंबई में बांद्रा-वर्ली सी लिंक पर बम विस्फोट के बारे में चेतावनी देता है. पहले अर्जुन इसे गंभीरता से नहीं लेता है लेकिन कॉल के कुछ सेकंड के भीतर एक 'धमाका' उसे चौंका देता है और पुलिस को बुलाने के बजाय अर्जुन अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाने के लिए चालाकी से खेलता है.

एंकर, चैनल हेड अंकिता (अमृता सुभाष) के साथ बातचीत शुरू करता है, जब उसे बम धमाकों की सूचना मिलती है, तो वह न्यूज एंकर के रूप में वापस आ जाता है. ऊंची टीआरपी का आश्वासन देते हुए कार्तिक देश को संबोधित करते हैं और यहां तक ​​कि अपने शो में आतंकवादी से भी जुड़ते हैं. हालांकि, उसके जिंदगी में एक मोड़ आता है, जब सौम्या जो  कि एक रिपोर्टर है, उन्हें 'धमाका' को लाइव कवर करने के लिए भेजा जाता है. आतंकवादी अर्जुन से कहता है कि वह एक मंत्री को बुलाए और उससे माफी मांगने के लिए कहे नहीं तो वह बचा हुआ सी लिंक भी उड़ा देगा और उसकी पत्नी सौम्या के साथ- साथ सभी को खत्म कर देगा. बढ़ती टीआरपी और अपने पत्नी सौम्या के प्यार के बीच फंसे अर्जुन एक गलत फैसला लेते हैं जो उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देता है.

 

धमाका निश्चित रूप से एक अनकन्वेंशनल फिल्म है जिसकी उम्मीद नहीं की जाती है. यह टीवी चैनलों की कठोर वास्तविकता, टीआरपी के भूखे मालिकों और किस तरह अब लोग 'खबरों को रिपोर्ट करने' के बजाय 'समाचार बेचते हैं' उसे दिखाता हैं. फिल्म, टीवी एंकरों की तुलना अभिनेताओं से भी करती है .हालांकि, इसमें जो कमी है वह है यथार्थवाद. धमाका की कहानी कमजोर और अडिग है. फिल्म कई बिंदुओं पर कमजोर हो जाती है लेकिन जहां से आगे बढ़ना कठिन हो जाता है.

फिल्म में कार्तिक का अभिनय धमाकेदार है लेकिन दुर्भाग्य से यह कहीं न कहीं एक कमजोर कहानी है. एक न्यूज एंकर से आरजे बने अभिनेता के रूप में कार्तिक भरोसेमंद है और अपनी भूमिका को बहुत दृढ़ विश्वास के साथ करना सुनिश्चित करते है.

अगर किसी का किरदार निराशाजनक है तो वह मृणाल ठाकुर है. एक्ट्रेस का भले ही स्पेशल अपीयरेंस हो लेकिन उनके रोल में कुछ खास नहीं है. एक या दो डायलॉग और पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में दिखाई देने के अलावा सौम्या के रूप में मृणाल के पास करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है. हमेशा की तरह अमृता सुभाष शो स्टिलर  हैं. अंकिता के रूप में, अमृता सहजता से एक सख्त बॉस की भूमिका निभाती है. वह हमेशा की तरह बोल्ड, मजबूत और कायल है.

राम माधवानी का निर्देशन उम्मीद के मुताबिक नहीं है और पुनीत शर्मा के साथ उनका लेखन थ्रिलर को नीचे खींचता है. फिल्म निर्माता राम का एक रियलिस्टिक थ्रिलर बनाने की कोशिश है जिसमें बिल्कुल कोई गाना या मसाला नहीं है क्योंकि कहानी कमजोर और ड्रामा ज्यादा है. मनु आनंद ने सिनेमेटोग्राफी किया है, उन्होंने फिल्म को दोहराव या उबाऊ महसूस किए बिना केवल 2 जगहों पर शानदार ढंग से शूट किया है. मोनिशा बलदावा और अमित करिया का टू-द-पॉइंट एडिटिंग उद्देश्य को पूरा करता है. विशाल खुराना द्वारा दिया गया रोमांचकारी म्यूजिक कथानक की गंभीरता को बनाए रखता है. एक अच्छी थ्रिलर और कार्तिक आर्यन के ईमानदार प्रदर्शन के लिए धमाका देखे.   

 

 

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