Chandigarh Kare Aashiqui Review: आयुष्मान खुराना और वाणी कपूर ने खूबसूरती से सभी सामाजिक रूढ़ियों को दिया है करारा जवाब

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फिल्म: चंडीगढ़ करे आशिकी

कास्ट: आयुष्मान खुराना और वाणी कपूर

निर्देशक: अभिषेक कपूर

निर्माता: प्रज्ञा कपूर, भूषण कुमार और कृष्ण कुमार

संगीत: सचिन-जिगर 

कहानी: अभिषेक कपूर

रेटिंग: 4 मून्स

डायरेक्टर अभिषेक 'गट्टू' कपूर ने सुशांत सिंह राजपूत के प्रति अपने डेडिकेशन के साथ चंडीगढ़ करे आशिकी की शुरुआत की है, जिन्हें उन्होंने एक दशक पहले काई पो छे के जरिए लॉन्च किया था. इस फिल्म की कहानी चंडीगढ़ में सेट है. जिसमें गबरू मनविंदर मुंजाल उर्फ मनु (आयुष्मान खुराना) एक फिटनेस एन्थुसिएस्ट और बॉडी बिल्डर है. वह जाट लाइक टू फ्लेक्स नाम के एक जिम का मालिक होता है. वह हर साल G.O.A.T (गबरू ऑफ ऑल टाइम) कम्पटीशन में भाग लेता है, लेकिन उसे जीत नहीं पता है.

मनु के दो जुड़वां दोस्त (गौतम शर्मा, गौरव शर्मा) है, जो बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए, जुम्बा टीचर मानवी बराड़ (वाणी कपूर) को काम पर रखते हैं, ताकि मेम्बरशिप के लिए लोगों को आकर्षित किया जा सके. जिसके बाद एक लड़का और लड़की की मुलाकात होती है और इस तरह से लव स्टोरी की शुरुआत होती है. लेकिन, इसमें मामला थोड़ा हटकर है, क्योंकि लड़के की मुलाकात एक ट्रांस-लड़की से होती है. अब, उनके प्यार की यह यात्रा और प्यार को अपनाने के बीच सामाजिक दबावों और रोक की मुश्किलें सामने आती हैं, जो इस 117 मिनट की फिल्म को बेहद एंटरटेनिंग बनाता है.

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ज्यादा खुलासा किए बिना (अभिषेक कपूर, सुप्रतीक सेन और तुषार परांजपे के साथ सिमरन साहनी को श्रेय दिया जाता है), सीएके का दिल सही जगह पर है. मानवी की लड़ाई सभी मुश्किलों के खिलाफ है और वह अपने 'ट्रांसफॉर्मेशन' के बाद अपने लिए नार्मल लाइफ की तलाश कर रही होती है और खास कर के मनु के साथ. मनु जो भरोसा नहीं कर पा रहा है और अभी तक अपनी पार्टनर की सेक्सुअल आइडेंटिटी के बारे में नहीं जानता है जिसे वह पागलों की तरह प्यार कर रहा होता है.

सीएके का सबसे बड़ा हाईलाइट यह है कि परफॉरमेंस और उसमे बोले गए डायलॉग्स बहुत ज्यादा ड्रामेटिक नहीं हैं. यह कहना सही होगा कि इस ट्रांस लव स्टोरी में अभिषेक ने सेक्स चेंज के विषय को संवेदनशील तरीके से हैंडल किया है. आम तौर पर बोले जाने वाले शब्द जैसे छक्का, किन्नर और अन्य का बेहद सावधानी से इस्तेमाल किया है. वह इस फिल्म के जरिए एक नजरअंदाज किए गए विषय की वास्तविकता, लोगों के ज्ञान की कमी और इसके प्रति असंवेदनशीलता, समाज में समावेश की मांग करने वालों के प्रति उनकी कठोर और खारिज करने वाली रिएक्शंस को बताता है.

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फिल्म देख कोई भी कह सकता है कि यह अच्छे इरादे से किया गया काम है. सुप्रतीक सेन और तुषार परांजपे की स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स फिल्म की कहानी से साथ जाते हैं. मनु का देसी परिवार - अंजन श्रीवास्तव (मनु के दादा), तान्या अबरोल (उनकी बहन), उनके विधुर पिता (गिरीश धमीजा) जो अपनी मुस्लिम गर्लफ्रेंड से शादी करने के लिए तरस रहे हैं - फिल्म की कहानी के साथ जुड़ाव महसूस करने से लेकर हंसाते भी हैं. मानवी के पिता (कंवलजीत सिंह) का अपनी बेटी के नए चुने हुए जीवन के प्रति अथक समर्थन और उसकी मां का सदमा और अस्वीकृति फिल्म में इमोशनल बैलेंस बनाता है.

आयुष्मान की बॉडी बेहद आकर्षक है. लुक्स के डिपार्टमेंट में उन्होंने खुद को किरदार के हिसाब से ढालने के लिए पूरी मेहनत की है. साथ ही किरदार के मुताबिक, लगने के लिए रियल लाइफ चंडीगढ़ का लड़का होने के नाते, उन्हें बॉडी लैंग्वेज, देसी स्वैग और सबसे जरुरी पंजाबी लहजे में परफेक्ट एक्सेंट पकड़ा है. मनु कमजोर है और उसे कोई भी बहका सकता है, लेकिन साथ में वह प्यार में पागल है और चीजों को समंझने और उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार है. मनु द्वारा उठाये गए साहसिक कदम में, वह मानवी की स्थिति को समझने के लिए एक मनोचिकित्सक की तलाश करता है क्योंकि वह अपने दोस्तों और परिवार द्वारा उसे छक्की कहते हुए नहीं देख सकता है. आयुष्मान असामान्य भूमिकाएं निभाने के लिए जाने जाते हैं और मनु भी उसी तरह का किरदार है. इस तरह से वह इस बार भी अपने किरदार की त्वचा में खूबसूरत से ढल गए हैं.

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वहीं, वाणी द्वारा निभाया गया मानवी का किरदार उनके द्वारा किया गया, अब तक का सबसे अच्छी भूमिका है. उन्होंने किरदार के साथ न्याय करते हुए तारीफ के काबिल काम किया है. जबकि, बिंदिया छाबड़िया के प्रोडक्शन डिज़ाइन और सिनेमैटोग्राफर मनोज लोबो ने रंगीन चंडीगढ़ को जीवंत कर दिया है. चंदन अरोड़ा का संपादन तना हुआ है और कथा को एक साथ रखता है. सचिन-जिगर का साउंडट्रैक, आयुष्मान-वाणी की सिज़लिंग केमिस्ट्री के साथ सबसे ऊपर और एक संवेदनशील विषय को छोटा न करने के निर्देशक के ईमानदार प्रयास, चंडीगढ़ करे आशिकी को हर तरह से विजेता बनाते हैं. यह समाज के 'सामान्य', कठोर मानसिकता और मानदंडों पर सवाल उठाता है जिसे हम जाने देने के लिए तैयार नहीं हैं, और हमें इस विषय के बारे में स्वच्छ मनोरंजन के साथ शिक्षित करते हैं.

PeepingMoon चंडीगढ़ करे आशिकी को 4 मून्स देता है.

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