'पितृसत्ता का कोई जेंडर नहीं होता': 'बॉम्बे बेगम्स' की लीडिंग लेडीज पूजा भट्ट, शहाना गोस्वामी, अमृता सुभाष

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पूजा भट्ट की डेब्यू वेब सीरीज 'बॉम्बे बेगम्स' काफी टाइम से चर्चाओं में है. इस सीरीज को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के लिए अलंकृता श्रीवास्तव ने डायरेक्ट किया किया है. सीरीज में पूजा भट्ट के साथ अमृता सुभाष, प्लाबिता बोरठाकुर, शहाना गोस्वामी और आध्या आनंद लीड रोल में है. ये सीरीज 8 मार्च को इंटरनेशनल वुमेंस डे के मौके पर नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो रही है. सीरीज में अलग-अलग दुनिया में रहने वाली पांच महिलाओं के अलग-अलग दृष्टिकोणों को दिखाया है. इस सीरीज की कहानी पांच शहरी महिलाओं की जिंदगी के बारे में विस्तार से बताती है. बॉम्बे बेगम में 5 'क्वीन्स हैं. 

बॉम्बे बेगम्स उर्फ ​पूजा भट्ट, शहाना गोस्वामी, अमृता सुभाष, प्लाबिता बोरठाकुर और आध्या आनंद ने पीपिंगमून के साथ खास बातचीत में बताया कि क्यों नेटफ्लिक्स शो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर रिलीज़ हो रहा है. वहीं टीम का कहना है कि प्रत्येक महिलाओं में पितृसत्ता समान रूप से मौजूद होती है क्योंकि पितृसत्ता का कोई जेंडर नहीं होता. 

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वहीं इस दौरान शो के लीडिंग लेडिज ने ये भी बताया कि इस शो का नाम बॉम्बे बेगम्स क्यों है. इस दौरान पूजा भट्ट ने अपने स्टारडम से जान के बाद से लेकर कमबैक  पर बात की. इस दौरान पूजा ने कहा कि, पितृसत्ता कोई जेंडर विशेष नहीं होता है, पर हां साथ ही पूजा का ये भी मानना है कि पितृसत्ता से कई बार पुरूष वर्ग समान रूप से सफर करता है. साथ ही इस पर बात की कैसे अपने पार्टनर की खुशी के लिए कई बार कई चीजे त्यागनी पड़ती है.   

बता दें कि. शो में पूजा रानी की भूमिका निभाती है, अमृता लिली की है, आराध्या आनंद रानी की बेटी की भूमिका निभाती है. ऐसा प्रतीत होता है कि वे सब एक दूसरे के साथ कनेक्टेड है. शाहना फातिमा है, जो अपने पति के साथ एक बच्चे की उम्मीद कर रही है. प्लाबिता आयशा है, जो रानी की तरह सीईओ बनने की इच्छा रखती है. ये महिलाएं अलग अलग उम्र और पीढ़ी की हैं, जो अपनी इच्छाओं, नैतिकता, कमजोरियों और अपने खुद के डर से द्वंद करती हैं. 

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