BirthdaySpecial: जब एक्टिंग छोड़ने का इरादा कर चुके थे अजय देवगन, जानिए सुपरस्टार से जुड़े दिलचस्प किस्से

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बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद सुपरस्टार अजय देवगन आज अपना 51 वां जन्मदिन मना रहे हैं. साल 1991 में जबसे अजय देवगन ने फिल्म 'फूल और कांटे' से सेंसेशनल डेब्यू किया तब से लेकर आज तक उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा. नब्बे के दशक से लेकर आजतक अजय देवगन ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाकर रखी है.  अजय की गिनती बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार्स की उस लीग में होती है जिसमें शाहरुख, सलमान, आमिर और अक्षय हैं.  करियर के इन 30 सालों में बहुत से स्टार्स आए और गए लेकिन अजय देवगन ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ बनाकर रखी बल्कि क्रिटिक्स के भी पसंदीदा हैं. कौन भूल सकता है फिल्म 'फूल और कांटे' का बाइक पर उनके एंट्री सीन को, हिंदी सिनेमा के एक्शन सीन्स में ये स्टंट मील का पत्थर साबित हुआ और इसके साथ ही इंडस्ट्री को मिला एक ऐसा कंप्लीट एक्शन सुपरस्टार जिसे बंदूको और गोला बारूद से खेलने में डर नहीं लगता. हालांकि इस एक्शन स्टार की इमेज को तोड़ने में अजय को काफी मशक्कत करनी पड़ी लेकिन आज उनके 51वें जन्मदिन पर हम आपको बताएंगे उनकी जिंदगी और फिल्मों से जुड़े कुछ अनसुने किस्से. 
 

जब बगैर स्क्रिप्ट पढ़े अजय ने साइन की फिल्म

3 दिसंबर, 1999 को आर्ट फिल्मों के डायरेक्टर गोविंद निहलानी की एक फिल्म रिलीज़ हुई नाम था ‘तक्षक’. इस फिल्म के बारे में डायरेक्टर गोविंद निहलानी ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में खुलासा किया है कि ये फिल्म अजय देवगन की डिमांड की वजह से बन पाई. अजय देवगन अपने फिल्मी करियर में उस वक्त टॉप पर थे. ‘दिलजले’, ‘इश्क’, ‘होगी प्यार की जीत’ एक के बाद एक कामयाब फिल्में उनकी लिस्ट में थीं. लेकिन इन सब के बीच कॉन्टेंट वाली फिल्में अजय को करने का मन किया. इस कड़ी में उनकी पहली फिल्म थी महेश भट्ट की ‘जख्म’ (1998). इसके लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला. इसके बाद उन्होंने गोविंद निहलानी को से खुद संपर्क किया. उनके साथ काम करने की इच्छा जताई. निहलानी के पास एक फिल्म का आईडिया था लेकिन स्क्रिप्ट पूरी नहीं थी. इसलिए गोविंद ने अजय से कहा कि वो स्क्रिप्ट खत्म करके उन्हें सुनाएंगे. इस पर अजय ने कहा कि उन्हें स्क्रिप्ट पढ़ने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि उन्हें निहलानी पर पूरी भरोसा है। इस तरह तक्षक बन पाई. 

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एक्टिंग छोड़ने का इरादा कर चुके थे अजय

अजय देवगन शुरु से एक्टर ही बनना चाहते थे ऐसा बिलकुल नहीं है.अजय ने एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया कि वो एक्टर बने क्योंकि उनके पिता वीरू देवगन सपना था. इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होने मुझसे जी तोड़ मेहनत करवाई, खतरनाक स्टंट करना हमारा रोज का काम था. अजय ने बताया कि इसके उलट उनकी दिलचस्पी कैमरे के पीछे काम करने में ज्यादा थी.महज 13 साल की उम्र में उन्होने खुद के वीडियो फिल्म्स बनाने शुरु कर दिए थे. 17 साल तक आते आते उन्होने शॉर्ट फिल्में भी बनानी चालू कर दी थीं.इसी दौरान उन्होने कई नामी डायरेक्टर्स को असिस्ट करना शुरु कर दिया.जब कूक्कू कोहली ने उन्हें फूल और कांटे ऑफर की तो ये फिल्म सिर्फ और सिर्फ उन्होने पिता का मन रखने के लिए की थी.उन्होने ये तक तय कर लिया कि अगर फिल्म फ्लॉप होती है तो वो फिर से अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ शॉर्ट फिल्म बनाना शुरु कर देंगे और एक्टिंग छोड़ देंगे. उनका कॉलेज का फिल्मी ग्रुप था जिसमें डायरेक्टर विक्रम भट्ट, एक्टर बॉबी देओल, सलमान के बहनोई अतुल अग्निहोत्री और समीर आर्या थे और ये सभी मिलकर शॉर्ट फिल्म्स पर काम करते थे.

रील लाइफ सिंघम इन्हें मानते हैं रियल सिंघम

अजय देवगन ने अपने एक इंटरव्यू में पिता पर खुलकर बात की है. इस इंटरव्यू में वो बताते हैं कि उनकी जिंदगी के असली सिंघम उनके पिता हैं. वो बताते हैं कि जब वीरू देवगन मुंबई आए तो उनकी जेब में सिर्फ 4 रुपए थे मगर सपने बड़े थे.अजय ने पिता के स्ट्रगल को याद करते हुए कहा कि वो बहुत मेहनती थे, गाड़ियां धोते थे, टैक्सियों में ही सोए ताकि मुंबई में रहने की दिक्कत न हो पैसे बच सकें. कई बार हफ्तों खाना नहीं खाया। मौका मिला तो  स्ट्रीट फाइटर की तरह काम करने लगे। वहां से लेकर हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े स्टंट डायरेक्टर बनने का सफर आसान न था.अजय देवगन  बताते हैं कि एक फिल्म के स्टंट के दौरान उनके पिता बुरी तरह जख्मी हो गए.उनके सिर पर 50 टांके लगे थे। उनके शरीर की तकरीबन हर हड्डी टूट चुकी थी। इस बुरे दौर में काम नहीं था लेकिन खुद को मजबूत बनाकर उन्होने वापसी की और ये सब अजय की आंखों के सामने हुआ इसलिए उनकी नजर में पिता वीरु देवगन हैं रियल सिंघम.


इन 30 सालों में अजय देवगन 100 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं और आने वाले वक्त में मैदान, चाणक्य, भुज द प्राइड ऑफ इंडिया, सूर्यवंशी, कैथी रीमेक के साथ आरआऱआर उनके कुछ बहुत ही इंट्रेस्टिंग प्रोजेक्ट हैं. हमारी यही आशा और शुभकामनाएं हैं है कि आने वाले 30 वर्षों में भी अजय देवगन एक एक्टर,  डायरेक्टर और प्रोड्यूसर की हैसियत से हमारा मनोरंजन करते रहेंगे. 

 

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