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अभय देओल ने अपनी फिल्म 'रांझणा' को लेकर शेयर किया पोस्ट, कहा- 'इतिहास इस फिल्म को गलत संदेश के लिए माफ नहीं करेगा'

अभय देओल हमेशा से ही अपनी बात बेबाकी से रखते हैं. चाहे वो कोई भी मुद्दा हो. हाल ही में अभय ने साल 2013 में रिलीज हुई अपनी फिल्म और फिल्ममेकर आनंद एल राय द्वारा निर्देशित 'रांझणा' को लेकर कहा कि फिल्म में दिए गए मैसेज के लिए इतिहास इस फिल्म को कभी माफ नहीं करेगा और यह फिल्म यौन उत्पीड़न को बढ़ावा देती है. दरअसल अभय देओल ने इस पोस्ट में एक शख्स को भी टैग किया है. जिसने फिल्म के इस एंगल पर बातें कहीं थीं. अभय, उस शख्स के विचार से सहमत दिखे. जिसके बाद उन्होंने ये पोस्ट शेयर किया. 

इसपर नोट शेयर करते हुए अभय ने लिखा, 'फिल्म रांझणा के बारे में @ oldschoolrebel9 से ऐसी स्पष्ट और वैध जानकारी मिली है. इतिहास इस फिल्म में दिए गए रिग्रेसिव मैसेज को कभी माफ नहीं करेगा. ये दसियों साल से बॉलीवुड की थीम रही है जहां एक लड़का, लड़की का तब तक पीछा करता है जब तक वो हां न कर दे.सिर्फ फिल्मों में ही वो अपने मन से काम करती है. रियल लाइफ में हम देखते आए हैं कि ये सेक्सुअल हैरेसमेंट का रूप ले लेता है. इसे स्क्रीन पर दिखाना, विक्टिम को ब्लेम करने जैसा लगता है. @oldschoolrebel9 इसे बहुत शानदार ढंग से समझाया है.' इस पोस्ट के साथ ‘रांझणा’ के पोस्टर को भी शेयर किया है जिसमें सोनम कपूर और धनुष दिखाई दे रहे हैं. अभय ने अपनी पोस्ट में अपने फॉलोवर्स और रीडर्स से ये भी अपील की है कि वो इस बारे में क्या सोचते हैं ये भी जरूर बताएं. 

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Watching Ranjhaanaa(2013) felt like a constant conflict inside. I was continously battling emotions especially in the later half of the movie. I was struggling to pick a side till I realized, I don't really have to. It was a story of flawed characters who made mistakes and ended up paying for them. But the one character I had the most respect for was Jasjeet for the simple reason that unlike Zoya and Kundan his political ambitions went beyond the personal emotions of vengeance and redemption. But the one scene that personally made me plain angry was when Kundan pays a visit to a wounded Jasjeet. "Yaar in ladkiyon ke dimag ke hisaab se kuch karna nahi chahiye, jhatke mein sab bikhar gaya" says Jasjeet to which Kundan replies, "Hum bhi ussi chakkar mein maare gaye." Jasjeet sits beside a man who stalked his girlfriend for so long, threatened to slit her wrist if she doesn't reciprocate, sabotaged their wedding, got him almost killed and he very conveniently puts the blame for all it on the lady he claims to love. What was Zoya's fault? Yes, she made a very silly plan of faking her boyfriend's religion but didn't Jasjeet agree to go along with it? Yes, she could have been more upfront about her refusal to Kundan but when from the very beginning was he ever considerate or respectful to her consent? This scene does feel real though. Men who love the same woman, either fight over her or bond over their mutual betrayal. We have all heard and maybe even said things like - "Her love made him a devdas". There are so many people who face heartbreak and don't turn self destructive. If you reject someone, why or how do you become responsible for the way they deal with that rejection? How a person deals with a heartbreak speaks less of the person who couldn't love them back or even how deeply they felt for that person and more about what that heartbroken individual is made up of. I think its time we stop blaming others for our personal failures and stop carrying the guilt of things people do to themselves. Also next time we hear a friend talk about that certain someone who ruined them, we must subtly remind them that only they themselves could do that.

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बता दें कि, फिल्म सोनम कपूर के किरदार यानी जोया के आस पास घूमती है, जो अपने दिल्ली के कॉलेज के साथी जसजीत (अभय देओल) के प्यार में पड़ जाती है, लेकिन वाराणसी में एक अलग लड़का कुंदन (धनुष) उनके प्यार में पड़कर पीछे पड़ा होता है. जब ज़ोया कुंदन के शादी के प्रस्ताव को ठुकरा देती है और अपनी पसंद के लड़के के धर्म के बारे में झूठ बोलकर शादी करना चाहती है तो तब कुंदन शादी को बीच में रोककर जोया के माता-पिता को सच्चाई बताता है. इसके कारण जसजीत की हत्या हो जाती है. इस फिल्म में स्मॉल टाउन रोमांस को दिखाते हुए लड़की के यौन शोषण को आम बात की तरह दिखाया गया था.

(Source: Instagram)

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