आर्थिक तंगी ने 'बालिका वधु' के असिस्टेंट डायरेक्टर रामवृक्ष गौर को सब्जी बेचने के लिए किया मजबूर, कई टीवी सीरियल्स को कर चुकें हैं डायरेक्ट 

By  
on  

कोरोना महामारी कई लोगों को रास्ते पर ले आया है. मजबूरी ऐसी कि लोग जीवन निर्वाह के लिए अब छोटा- मोटा काम करने के लिए भी तैयार है. ऐसा ही कुछ बालिका वधु के असिस्टेंट डायरेक्टर रामवृक्ष गौर के साथ भी हुआ, जो इन दिनों आजमगढ़ में ठेले पर सब्जी बेचते हैं. कोरोना की वजह से फिल्म और टीवी सेट्स पर रोजगार पूरी तरह ठप्प हो गया, जिस वजह से रामवरासख को अपने गांव जाकर सब्जी बेचनी पड़ रही है. 

आजमगढ़ शहर के हरबंशपुर में डीएम आवास के आसपास सड़क के किनारे सब्जी का ठेला लगाते हैं. वे दोपहर तीन बजे से देर शाम तक सब्जी बेचते हैं. दरअसल, फरवरी में अपने बच्चे को परीक्षा दिलाने आए रामवृक्ष वापस जाते इसके पहले लॉकडाउन लग गया. एक दो महीने इंतजार के बाद भी स्थिति सामन्य नहीं हुई तो मजबूरन रोजी-रोटी के लिए वह ग्यारहवीं में पढ़ने वाले अपने बेटे के साथ सब्जी की दुकान लगाकर परिवार का भरण पोषण करने लगे. 

'बालिका वधु' फेम एक्ट्रेस के घर गूंजी किलकारी, बेटी की पहली तस्वीर शेयर कर दी जानकारी

रामवृक्ष के पिता भी सब्जी का ही व्यवसाय करते हैं. 2002 में अपने एक मित्र की वजह से वो मुंबई पहुंचे. पहले उन्होंने बिजली विभाग में काम किया. इसके बाद टीवी प्रोडक्शन में किस्मत आजमाई. निर्देशन छेत्र में उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई और उन्हें मजा आने लगा. 

'कसौटी जिंदगी के 2' के ऑफएयर होने पर बोलीं एरिका फर्नांडिस, कहा- 'हर अच्छी चीज का एक न एक दिन अंत होता है'

 कई सीरियल्स के प्रोडक्शन में बतौर सहायक निर्देशक का काम मिलने लगा.  इसके बाद कई धारावाहिकों में एपिसोड डायरेक्टर फिर यूनिट डायरेक्टर का काम करने लगे. 
रामवृक्ष ने 'इस प्यार को क्या नाम दूं', 'कुछ तो लोग कहेंगे', 'हमार सौतन हमार सहेली', 'झटपट चटपट', 'सलाम जिंदगी', 'हमारी देवरानी', 'थोडी खुशी थोडा गम', 'पूरब पश्चिम', 'जूनियर जी' जैसे धारावाहिकों के अलावा यशपाल शर्मा, मिलिंद गुणाजी, राजपाल यादव, रणदीप हुडा, सुनील शेट्टी की फिल्मों के निर्देशकों के साथ सहायक निर्देशन की भूमिका भी निभाई. एक भोजपुरी और एक हिन्दी फिल्म का काम रामवृक्ष के पास है. 

Recommended

Loading...
Share