बीएमसी द्वारा कंगना रनौत के ऑफिस में हुयी तोड़ फोड़ के लिए हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, कहा- तोड़फोड़ के लिए देना होगा हर्जाना  

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9 सितम्बर को कंगना रनौत के मुंबई स्थित ऑफिस को अवैध बताते हुए बीएमसी ने उसके कुछ हिस्सों को तोड़ दिया था. जिस समय कंगना के ऑफिस पर बीएमसी ने बुलडोजर चढ़ाया वह अपने घर हिमाचल प्रदेश में थी, कड़ी सुरक्षा के बीच वह मनाली से मुंबई पहुंची लेकिन इससे पहले बीएमसी ने अपना काम कर दिया था. 

बाद में इसके विरोध में कंगना ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कंगना के वकील ने दावा किया कि ऑफिस के 40% हिस्से में तोड़फोड़ की गयी थी. अब इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने कहा कि बीएमसी का एक्शन दुर्भावनापूर्ण रवैये से किया गया है. बीएमसी को कंगना रनौत के ऑफिस में तोड़फोड़ के लिए हर्जाना देना होगा. हाईकोर्ट ने कंगना के ऑफिस के नुकसान का आकलन करने के आदेश दिए हैं. इस संबंध में अधिकारी मार्च 2021 तक अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौपेंगे. नुकसान की भरपाई के लिए एजेंसी की रिपोर्ट पर फैसला हाईकोर्ट बाद में सुनाएगा.

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जस्टिस एसजे कैथावाला और आरआई छागला की बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा, 'जिस तरह से यह तोड़फोड़ की गई वह अनधिकृत था. ऐसा गलत इरादे से किया गया था. ये याचिकाकर्ता को कानूनी मदद लेने से रोकने का एक प्रयास था. अदालत ने अवैध निर्माण के बीएमसी के नोटिस को भी रद्द कर दिया है.  

 

 

 

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले को देख ऐसा लगता है कि विध्वंस की कार्रवाई एक्ट्रेस के ट्वीट्स और बयानों के लिए उसे निशाना बनाने के इरादे से की गई है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंगना रनौत द्वारा दायर याचिका में विध्वंस नोटिस को खारिज किया. कोर्ट ने कहा कि अगर आवश्यक हो तो नियमितीकरण के लिए स्पष्टीकरण दे.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता (कंगना रनौत) को सार्वजनिक मंच पर विचारों को रखने में संयम बरतने को कहा, लेकिन साथ मे ये भी कहा कि किसी राज्य द्वारा किसी नागरिक की गई गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों को नजरअंदाज किया जाता है. किसी नागरिक के ऐसे गैर जिम्मेदाराना टिप्पणियों के लिए राज्य की इस तरह की कोई कार्रवाई कानून के अनुसार नहीं हो सकती है.  
 

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