संजय लीला भंसाली के जन्मदिन पर जारी हुआ 'गंगूबाई काठियावाड़ी' का टीजर, 'माफिया क्वीन ऑफ़ मुंबई' के रूप में आलिया भट्ट ने चलाया अपना जादू 

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आलिया भट्ट स्टारर संजय लीला भंसाली की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'गंगूबाई काठियावाड़ी' का टीजर आज निर्देशक के जन्मदिन पर जारी हो गया है. टीजर में आलिया भट की अदा और एक्सप्रेशन का जवाब नहीं. हर फ्रेम में उनकी अदायिकी दिखाई है. 1. 31 सेकंड के टीजर में आलिया गंगूबाई के किरदार में जांच रही है.

कुछ देर पहले मेकर्स ने फिल्म का नया पोस्टर शेयर करने के साथ रिलीज तारीख से भी पर्दा हटा दिया. फिल्म के नए दमदार पोस्टर को शेयर करते हुए लिखा है कि, 'उग्र और शांत , जो अपने शासन काल के लिए तैयार है और डायरेक्टर के दिन, विजन और 10वीं फिल्म का जश्न. टीजर आज आउट होगा. और ये फिल्म 30 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार है.

पीपिंगमून के सोर्सेज के अनुसार फिल्म में आलिया के अलावा अजय देवगन भी है, जो कैमियो करते नजर आएंगे. अजय करीम लाला की भूमिका निभाएंगे जो बॉम्बे के पठानों का गॉड फादर होता है और हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार सहित तीन दिग्गज माफिया डोनर्स में से एक, जिन्होंने 1960 और 1970 के दशक के बीच मुंबई पर शासन किया था. उन्होंने गंगूबाई को व्यापार करना सिखाया. अजय का किरदार टिपिकल कैमियो नहीं है. बल्कि एक एक्सटेंडेड कैमियो है जो फिल्म की कहानी में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है. उन्होंने कहा कि उनके हिस्से को फिल्माने के लिए 10-12 दिन तय किए गए हैं, जिसमें ज्यादातर आलिया के साथ इंटेंस सीन शामिल है.' अजय इस महीने के अंत में फिल्म सिटी स्टूडियो में अपने हिस्से की शूटिंग करेंगे, जहां 1970 के दशक में उनके दृश्यों को फिल्माने के लिए एक भव्य सेट बनाया गया है.

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बता दें कि, 'गंगूबाई काठियावाड़ी' की कहानी एस हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वीन ऑफ मुंबई’ पर बेस्ड है. इस किताब में हुसैन जैदी ने गंगूबाई काठियावाड़ी के बारे में बताया है. गंगूबाई एक सेक्स वर्कर थीं जिन्होंने सेक्स वर्कर्स के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई थी. प्रधानमंत्री तक के पास पहुंच गईं. उनकी तस्वीर कमाठीपुरा की हर सेक्स वर्कर अपने पास रखा करती थी. ‘माफ़िया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ किताब के मुताबिक, 16 बरस की उम्र में गंगूबाई गुजरात के काठियावाड़ से मुंबई आई थीं. उन्हें शादी के बहाने धोखा देकर मुंबई लाया गया और कमाठीपुरा में बेच दिया गया था. गंगूबाई ने विरोध किया, लेकिन किसी ने कुछ सुना नहीं, आखिर में उन्हें ज़िंदगी से समझौता करना पड़ गया. उन्होंने कमाठीपुरा के वेश्यालय में रहना स्वीकार कर लिया. वेश्यालय में रहते हुए भी गंगूबाई ने सही-गलत की हमेशा पहचान रखी.
 

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