शाहरुख खान की ‘फैन’ को लेकर हुए केस पर SC से YRF को मिली राहत, ’जबरा फैन’ गाने को हटाने के बाद की गई थी शिकायत

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किंग खान यानी शाहरुख खान की फिल्म फैन साल 2016 में रिलीज हुई थी. फिल्म का गाना जबरा फैन सुपरहिट हुआ था. इस गाने को फिल्म से बाहर करने के बाद एक फैन ने केस किया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यशराज फिल्म्स को राहत दे दी है. इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने यश राज फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को यह आदेश दिया कि कंपनी याचिकाकर्ता को केस की लागत सहित 10,000 रुपये का जुर्माना दे। बता दें, यह याचिका 2017 में आफरीन फातिमा जैदी ने की थी जो पेशे से टीचर हैं.
एडवोकेट ऑन-रिकॉर्ड लिज़ मैथ्यू के माध्यम से दायर याचिका में यह तर्क दिया गया है कि ये गाना केवल प्रचार उद्देश्यों के लिए था  और YRF इस फिल्म में गाने शामिल करने के लिए बाध्य नहीं है. इस तथ्य को सभी हितधारकों द्वारा व्यापक रूप से प्रचारित किया गया था. दरअसल आफरीन फातिमा जैदी ने शिकायत की थी कि बॉलीवुड फिल्म फैन का प्रोमो देखने के बाद अपने परिवार के सदस्यों के साथ मैंने फिल्म देखने का फैसला किया. फिल्म देखने के लिए जब सिनेमा हॉल गईं उसमें प्रोमों में दिखाया गाना जबरा फैन गायब था। इसके बाद मैंने शिकायत करने का फैसला लिया वह कहती हैं कि मैं अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रही थी. 

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हालांकि, आफरीन की शिकायत को जिला फोरम ने खारिज कर दिया. इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र के राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दी. राज्य आयोग ने उनकी शिकायत को बरकरार रखा, और यशराज फिल्म्स को मुआवजे के रूप में 10,000 रुपये और मुकदमे की लागत के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करने को कहा. यशराज फिल्म्स ने इस आदेश को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चुनौती दी. 18 फरवरी, 2020 को एनसीडीआरसी ने राज्य आयोग के आदेश को बरकरार रखा. राष्ट्रीय उपभोक्ता निकाय ने सहमति व्यक्त की कि आफरीन को ‘ठगा’ गया है. इसके अलावा, निकाय ने फिल्म से सॉन्ग को बाहर करने के यशराज फिल्म्स के कदम को अनुचित बताया.


यशराज फिल्म्स ने एनसीडीआरसी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की. प्रोडक्शन हाउस ने तर्क दिया कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में प्रमोशन के लिए इस तरह से सॉन्ग का इस्तेमाल करना आम बात है. ये सॉन्ग फिल्म में नहीं दिखा सकते हैं. अगर इस पर रोक लगाई जाती है, तो ये आने वाली फिल्मों के उचित नहीं हो पाएगा. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक आम बात हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे जारी रखा जाना चाहिए. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने एनडीसीआरसी के आदेश पर भी रोक लगा दी और आफरीन को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है.
एनसीडीआरसी में दायर अपील में, वाईआरएफ ने तर्क दिया था कि महिला को उपभोक्ता नहीं माना जा सकता क्योंकि उसने फिल्म टिकट के लिए जो कीमत चुकाई थी, वह उसके और सिनेमा हॉल के बीच एक डील थी. इस पर एनसीडीआरसी ने कहा कि फिल्म से होने वाली कमाई का प्रोड्यूसर, प्रदर्शक और वितरक के बीच शेयर होता है. इसलिए ये मामला सीधा मेकर्स से संबंधित होता है, इसलिए इसे एक सेवा प्रदाता माना जा सकता है.

(Source: Live Law)

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