Exclusive: 'आरक्षण' से इस तरह से अलग है प्रकाश झा की फिल्म 'परीक्षा'; नई शिक्षा नीति के आने पर रखी अपनी राय

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फिल्मकार प्रकाश झा की नई फिल्म ‘परीक्षा: द फाइनल टेस्ट’ अब सीधे ओटीटी पर रिलीज होने के लिए तैयार है. फिल्म की कहानी एक पिता और उसके सपनों की हैं, जो की उसके बेटे को अच्छी शिक्षा देना होता है. ऐसे में अपनी इस फिल्म, उसके किरदार और उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों से खुद प्रकाश झा ने PeepingMoon को दिए इंटरव्यू में पर्दा उठाया है. 

प्र.'परीक्षा' और 'आरक्षण' इन दोनों ही फिल्मों में क्या अंतर है?

- दोनों ही फिल्में एक दूसरे से बहुत ही अलग हैं, क्योंकि आरक्षण की कहानी एक मुद्दे पर थी, जहां रिजर्वेशन पर बात की गई है. वहीं इस फिल्म में एक बाप को उसके बेटे की अच्छी पढ़ाई की जो एक चाह है उसके मन में जो प्यास है कि किसी भी तरह से मौके हमारे बच्चे के लिए पैदा करें और वह भी तब जब वह रोज बड़े समृद्ध घरों में रहने वाले बच्चों को बड़े इंग्लिश स्कूल में ले जाकर छोड़ता है और उनसे वह अंग्रेजी में बात करता है. तो एक तरह से यह एक बाप की कहानी है जो किसी भी कीमत पर किसी भी हद तक जाकर, अपने बच्चे को शिक्षित करना चाहता है. एक तरह से यह एक व्यक्तिगत कहानी है, वहीं दूसरी तरफ आरक्षण की बात करें तो वह एक सामाजिक मुद्दा है.

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प्र. आपने अपनी फिल्म में बहुत ही मजबूत कास्ट ली है, लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि फिल्म को चलाना ज्यादा आसान होता है कुछ पॉपुलर चेहरों के साथ?

 - मैं तो एक्टर देता हूं दोस्त, बड़ा हो छोटा हो यह मैं नहीं देखता.

प्र. फिल्म के सभी एक्टर्स को आपने कैसे उनके किरदारों में ढलने के लिए तैयार किया?

- हमने वर्कशॉप किया था. सभी एक्टर्स ने अपने-अपने किरदारों के लिए मेहनत की है,जैसे कि आदिल रिक्शा चलाया करते थे. हालांकि वह बहुत मामूली चीज है लेकिन रिक्शा वाले के किरदार को करना उसमें जीना उसमें खुद को ढालना यह सब उनको आता है. मैंने उन्हें मदद की जहां जरुरत पड़ी बाकी एक्टर्स ने खुद से किया है.

प्र. आपकी फिल्म बहुत ही सही समय पर आ रही है, जब नई शिक्षा नीति को लाया जा रहा है, तो क्या आप की फिल्म उससे खुद को जोड़ती है?

- देखिए एजुकेशन की फील्ड में जो भी काम हो, जो भी अच्छा काम हो वह हमेशा स्वागत के योग्य होता है. नई पॉलिसी जो आई है मैं मानता हूं कि उसके इरादे बहुत अच्छे हैं. इसके लिए सरकार 6 परसेंट जीडीपी का इस्तेमाल करने की बात कर रही है. जो की बहुत ही अच्छी बात है. दूसरा कि वह शिक्षकों को अच्छी ट्रेनिंग देने की बात कह रही है, जिसकी वजह से अब B.ed 4 साल का किया गया है. क्योंकि शिक्षक मजबूत होंगे तो शिक्षा मजबूत होगी यह बात पक्की है. अब देखना है कि यह जमीनी स्तर पर कैसा होने वाला है.

प्र. आपकी फिल्म परीक्षा की कहानी एक असल कहानी से प्रेरित है तो क्या आप हमें इसका बैकग्राउंड बता सकते हैं?

 - मैं आपको बता दूं कि वह जो छोटी-छोटी कहानियां होती है, जैसे कि रिक्शा वाले की कहानी, वह क्लास फैक्टर की कहानी और नक्सलियों के बीच जाकर उनके बच्चों को पढ़ाने की कहानी, इन सभी चीजों की कहानियां मिलाकर परीक्षा की कहानी बनी है. तो इसकी शुरुआत कई कहानियों से हुई है.

प्र. बॉबी देओल स्टारर आपके अगले शो 'आश्रम' ने अपने फर्स्ट लुक के साथ लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. क्या यह सच है कि यह बदनाम गुरु MSG पर आधारित है या आपने रचनात्मक स्वतंत्रता ली है?

- चलो आश्रम के बारे में बात नहीं करते हैं लेकिन परक्ष पर ध्यान केंद्रित करते हैं. कोई कमेंट नहीं प्लीज.

प्र. आपको लगता है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म थीएट्रिकल रिलीज को ओवरटेक कर लेगा?

 - मैं कोई भविष्यवक्ता नहीं हूं कि मैं इस बारे में बता सकूं, लेकिन सभी माध्यम चलेंगे. लेकिन सिनेमा का अपना कल्चर है, उसका मजा अलग है, सिनेमा में जाकर जो एक इवेंट की तरह होता है. ओटीपी भी आ गया है वह भी हमारे जीवन का एक हिस्सा बन गया है, लेकिन लोग उसे अलग तरीके से देखते हैं. कुछ फर्क पड़ेगा लेकिन सिनेमा का कल्चर चलता रहेगा क्योंकि उसका एक अपना ही मान है.

प्र. परीक्षा में चाइल्ड एक्टर शुभम के किरदार के बारे में आप कुछ कहना चाहेंगे?

- इस बच्चे ने अपने एक्टिंग से हर समय मुझे सरप्राइज किया है, कास्टिंग के लोगों ने इसे ढूंढ कर निकाला और वह बहुत नेचुरल काम करता है, बहुत ही कमाल का ऑर्गेनिक एक्टर है यह लड़का. फिल्म के किरदार से मिलता-जुलता है इस बच्चे का भी असल जीवन, उसके पिता भी एक लेबर का काम करते हैं डायमंड पॉलिश करने का काम. लेकिन बच्चे में गजब की ललक है एक्टिंग करने की.

(Transcripted By: Nutan Singh)

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