Peepingmoon Exclusive: हंसल मेहता की सीरीज 'स्कैम 1992' के एक्टर हेमंत खेर ने शेयर किए सेट से जुड़े किस्से, बताया एक्सीडेंट के बाद ऐसे किया कमबैक

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फिल्ममेकर हंसल मेहता की मोस्ट अवेटेड वेबसीरीज 'स्कैम 1992' सोनी लिव पर 9 अक्तूबर को रिलीज हो रही है. सीरीज में हर्षद शांतिलाल मेहता की कहानी को दिखाया गया है. 1992 में मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में किए गए घोटाले के चलते हर्षद जबरदस्त विवादों में आ गए थे. इस वेबसीरीज  में प्रतीक गांधी लीड रोल निभा रहे है. वहीं हेमंत खेर सीरीज में  प्रतीक गांधी यानी हर्षद मेहता के बड़े भाई यानी अश्विन मेहता का किरदार निभा रहे है. पीपिंगमूने से खास बातचीत के दौरान हेमंत खेर ने फिल्म में अपने किरदार से लेकर, प्रतीक गांधी और हंसल मेहता के काम करने के एक्सपीरियंस को शेयर किया. साथ ही अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ाव को लेकर कुछ किस्से शेयर किए. 

सवाल- सोनी लिव के प्रोजेक्ट 'स्कैम 1992'  से जुड़ने से पहले क्या आप हर्षद मेहता के कारनामों के बारे में जानते थे या इस कहानी से आपने ज़्यादा जाना?
जवाब- 1992 में जब यह स्कैम हुआ था, तब मैं लगभग 12 साल का था. उस वक्त रोज हर्षद मेहता का नाम न्यूज़पेपर में आता था. हां मुझे पता था कि इस शख्स ने बहुत बड़ा स्कैम किया है, लेकिन किस तरीके से किया और क्या-क्या वह इस शो के जरिए पता लगा. जब शो के लिए रिसर्च की जा रही थी तब मुझे इस स्कैम की डिटेल में नॉलेज मिली. और मेरे कैरेक्टर के बारे में तो मुझे शो से जुड़ने के बाद ही पता लगा. मैं सीरीज में हर्षद के बड़े भाई का किरदार निभा रहा हूं. मुझे एक सीन करने के दौरान पता लगा कि, इस पूरे खेल की शुरुआत हर्षद के भाई से हुई थी क्योंकि वह इसी में बोलता है कि हमें शेयर मार्केट ट्राई करना चाहिए.

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सवाल- प्रतीक गांधी इस फ़िल्म में हर्षद मेहता का रोल निभा रहे हैं आप उनके भाई के रोल में है. अपने किरदार के बारे में बताइये और प्रतीक गांधी के साथ काम करने की बॉन्डिंग कैसी रही ?
जवाब- साल 2003 में मैं NSD से पास आउट हुआ, उसके बाद मैंने टीवी के लिए काफी लिखा, उस दौरान मैंने थोड़ी बहुत एक्टिंग भी की थी लेकिन फिर मुझे एक टीवी शो 'शाबाश इंडिया' ऑफर हुआ था.  इस शो के लिखने के बाद मैंने काफी शो और लिखे, जिसमें 'झलक दिखला जा', 'जस्ट डांस', 'इंडियाज बेस्ट डांसर', 'सारेगामापा', 'इंडियन आइडल' समेत कई टीवी शोज मैंने उस दौरान लिखे. उसके बाद 2016 में मुझे एक फिल्म ऑफर हुई जिसका नाम था 'मित्रों'. उस फिल्म में प्रतीक ने लीड रोल एक्टर जैकी भगनानी के दोस्त का किरदार निभाया था. तो तब से मैं प्रतिक को जानता था. प्रतीक के साथ तब से ही दोस्ती हो गई. उसके बाद में देख और फिल्म की जिसने प्रतीक लीड रोल में थे. वह फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है, अभी फिल्म का अंडर प्रोडक्शन वर्क चल रहा है. इस फिल्म में मैंने प्रतीक को ट्रेंड किया. वैसे इस सीरीज से पहले भी हमारी बॉन्डिंग काफी अच्छी थी. फिर हमें इस सीरीज में साथ काम करने का मौका मिला, तो उनके साथ फिर से काम करने में बहुत मजा आया. रियल लाइफ में भी हमारी बॉन्डिंग दोस्त और भाई जैसी ही हैं. मेरे 70% सीन्स प्रतीक के साथ हैं. वह एक शानदार एक्टर है. एक एक्टर के तौर पर मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है. उस आदमी ने बहुत काम किया बहुत मेहनत की है और बहुत स्ट्रगल के बाद वह यहां तक पहुंचे हैं. उनकी रियल लाइफ की मेहनत उनकी परफॉर्मेंस में भी दिखती है. वहीं मैं अपने किरदार की बात करूं तो मैं बहुत लकी हूं कि मुझे यह किरदार निभाने का मौका मिला. मैं इंडस्ट्री में लगभग 16 सालों से हूं. मुझे हमेशा छोटे-मोटे रोल मिलते रहे है. मैंने एक्टिंग में बहुत ज्यादा काम नहीं किया है. वही जब मुझे छोटे-मोटे रोल ज्यादा मिलते लगे तो मैंने कई रोल ठुकरा दिए. वैसे साइड बाइ साइड कोचिंग, राइटिंग यह काम मेरे चलते रहते थे. यह मेरी लाइफ का ऐसा रोल है जिसमें मुझे अपनी एक्टिंग को दिखाने का मौका मिला. 

सवाल- हंसल मेहता बहुत दिग्गज फिल्मकार हैं, कैसा रहा एक नेशनल अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर के साथ काम करने का एक्सपीरियंस ? 
जवाब- उनके साथ काम करने का एक्सपीरियंस बहुत अच्छा रहा. सबसे पहली बात तो यह की मैंने बहुत सारे डायरेक्टर्स के साथ काम किया है लेकिन जब किसी डायरेक्टर की क्लेरिटी होती है ना कि मुझे क्या करना है मुझे क्या चाहिए, तो ऐसे लोगों के साथ यानी हंसल मेहता जी जैसे लोगों के साथ काम करने का एक्सपीरियंस अलग ही होता है. अगर आप एक वर्ड भी ऊपर नीचे करते हो तो वह तुरंत रोक देते हैं कि मुझे यही चाहिए. दूसरी बात जो हंसल सर जी बहुत अच्छी बात है, वह यह कि वह आपको पूरी आजादी देते हैं कि आपको कैसे परफॉर्म करना है, और उसमें अगर आप सही रास्ते पर जा रहे हैं तो वह कुछ नहीं बोलेंगे लेकिन आप थोड़ा इधर-उधर हुए तो वह आप को रोकते हैं कि इसको ऐसे नहीं ऐसे करो, उनका समझाने का तरीका बहुत अलग है. जैसे एक एक्टर के तौर पर मेरे हाथ बहुत चलते थे. यह समस्या बहुत सारे एक्टर्स के साथ होती है कि परफॉर्म करते हुए हाथ ज्यादा चलते हैं. तो उन्होंने मुझे स्क्रिप्ट रीडिंग के दौरान ही यह बात बता दी थी कि बस शूटिंग के दौरान आप अपने आप थोड़ा कम चलाना. और शूटिंग के दौरान भी एकदम रिलैक्स माहौल रहता था. एक परसेंट भी ऐसी टेंशन नहीं होती थी कि मुझे सेट पर जाकर कुछ अलग करना है या किसी को इंप्रेस करना है. ऐसा कोई प्रेशर नहीं था. बस आपको सेट पर जाना है और अपना काम करना है और अच्छे से करना है. मुझे हंसल सर पूरी इंडस्ट्री में सबसे फाइनेस्ट डायरेक्टर्स में से एक लगे. और मैं सच में बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला. 

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सवाल- इसी मुद्दे पर बॉलीवुड स्टार अभिषेक बच्चन की भी फिल्म 'द बिग बुल' आने वाली है. जब एक ही सब्जेक्ट पर दो चीजें एक साथ आती है तो कॉम्पिटिशन अपने आप थोड़ा और टफ हो जाता. इस बारे में आपकी राय क्या है ? 
जवाब- कॉम्पिटिशन का तो सवाल ही नहीं है क्योंकि हमारी फील्ड अलग-अलग है. अगर हमारी फिल्म होती तो कॉम्पिटिशन होता. उनकी फिल्म है जो एक सीमित समय की है और हमारी सीरीज है लगभग 10 घंटे की है जिसमें बहुत डिटेल के साथ हर पहलुओं को दिखाया गया है. तो एक सीरीज और एक फिल्म में कॉम्पिटिशन हो ही नहीं सकता है. हां लेकिन इस बात की क्रियोसिटी जरूर रहती है कि जो किरदार मैं निभा रहा हूं, वो किरदार फिल्म में कौन निभा रहा है. और अभिषेक बच्चन बहुत बड़े कलाकार हैं उनका बड़ा नाम है फिल्म बड़े पैमाने पर बनी है. उसमें सारे फेमस एक्टर हैं. और हमारी सीरीज में कई एक्टर्स है जिनका नाम कोई नहीं जानता, तो ऐसी कॉम्पिटिशन की भावना तो कभी नहीं आई. इस फिल्म में जो किरदार में निभा रहा हूं अश्विन मेहता का, अभिषेक की फिल्म में वह किरदार सोहम शाह निभा रहे हैं. जब मुझे पता लगा कि फिल्म में सोहम अश्विन मेहता का किरदार निभा रहे हैं तो मेरे मन में पहला ख्याल यही आया कि उनकी कद काठी बोलने का तरीका एक राजस्थानी है, तो इसमें हमारा कंपैरिजन है ही नहीं. बस इस बात की उत्सुकता रहती थी कि वह लोग कैसे कर रहे होंगे. खैर वह एक बड़ी फिल्म है तो बड़े पैमाने पर शूट हुई है. लार्जर थन लाइफ होगी. और हमारी चीज है जिसमें डिटेलिंग पर बहुत ध्यान दिया गया है. खैर ये वेब सीरीज है तो हम जा डिटेल में जा पाए होंगे. अभी हम सब अननोन लोग हैं उससे यह फायदा होता है कि आपकी कोई इमेज नहीं है और आप जो किरदार निभा रहे हैं लोग आपको उसी के दार से जानने लगते हैं. इससे कैरेक्टर की विश्वसनीयता बढ़ जाती है. अगर आपको लोगों ने पहले ज्यादा देखा नहीं होता है तो और फिर लोग आपको तुरंक एक कैरेक्टर में देखते हैं तो वह यकीन करने लगते हैं कि यह किरदार इसी का है, ऐसे में किरदार पर एक भरोसा बन जाता है. और वैसे भी इस समय कॉन्टेंट किंग बन चुका है. लोगों को कहानी चाहिए. एक्टर नए हो या पुराने मायने सिर्फ एक्टिंग रखती है. सच कहूं तो यह नया एक्टर्स के लिए एक गोल्डन पीरियड की तरह है. अगर आप की एक्टिंग और कॉन्टेंट अच्छा है तो लोग आपको सर आंखों पर जरूर दिखाएंगे. 

सवाल-  NSD के दिनों के बारे में कुछ बताइए, कौन कौन से कलाकारों से आपने सीखा ?
जवाब-   उस समय हमारी क्लासेस लेने बहुत सारे कलाकार आते थे. हमें नसरुद्दीन शाह साहब, अनुपम खेर जी, ओम पुरी जी ने हमें पढ़ाया है. इन दिग्गज कलाकारों से बहुत कुछ सीखने को मिला है. NSD की खास बात यह है कि जब आप 24 घंटे मेरे से 12 घंटे आप इनके बारे में ही सोचते हैं पढ़ते हैं तो एक्टिंग आपके अंदर तक पहुंच जाती है हम वहां पर सिर्फ आर्ट, थिएटर, सब्जेक्ट पर ही बात करते रहते थे. NSD मैं बिताए 3 साल मेरे जीवन के सबसे ज्यादा खूबसूरत दिनों में से एक हैं. मैं एक बहुत छोटी जगह से आया हूं. मेरे माता पिता फार्मर्स फैमिली से है. मेरे पिता प्राइमरी स्कूल के टीचर थे. और हमारी फैमिली में दूर तक किसी का भी फिल्मों से लेना देना नहीं था. लेकिन मुझे लिखने और एक्टिंग का शौक था तो मैं इस तरफ खींचा चला आया. सूरत में मेरा घर है मैं ट्रेन से आता जाता था. मैं रोज कई कई घंटे ट्रैवल करता था. NSD में मेरे एक खास टीचर है अविनाश पिल्लई उनके बारे में जरूर बताना चाहूंगा, उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला. वह एक्सप्लोर करने का बहुत मौका देते थे. तो मैं कई कई दिनों तक स्टूडियो में पड़ा रहता था. मैं अपनी एक चद्दर और ब्रश लेकर पहुंच जाता था. कोई भी नाटक बनाया स्टोरी पर काम किया कुछ भी किया और फिर दो तीन लोगों को बुलाकर हम अपनी चीजें दिखाते थे इस तरह अपने आपको एक्सप्लोर करने का बहुत मौका मिला. बहुत कुछ सीखने को मिला. हम वहां पर एक कैरेक्टर की तरह जीते थे. मैं बहुत खुश नसीब था कि वहां पर मुझे बहुत बड़े-बड़े प्ले में इंपॉर्टेंट किरदार निभाने का मौका मिला. एनएसजी सीखने का एक सबसे बेहतरीन प्लेटफार्म है .

सवाल- साल 2008 में आपका एक बड़ा बड़ा ट्रेन एक्सीडेंट हुआ था. उससे रिकवर होने में आपको लगभग एक साल लग गया था. उस समय आप जी टीवी के शो 'सा रे गा मा पा' के लिए लिख रहे थे.  उस दौरान हिमेश रेशमिया ने आपकी काफी मदद की. उस एक्सीडेंट के बाद फिर आपने कमबैक किया. कैसे लगता है आज अगर पीछे मुड़कर देखते हैं. 
जवाब- मैं जॉब NSD से पास आउट हुआ. फिर मैंने एक-दो फिल्मों धमकी पर अनफॉर्चूनेटली वह फिल्में या तो रिलीज नहीं हुई अभी इतने ही बंद हो गई. फिर मैं कई सीरियल में लिखने का काम करने लगा. उस दौरान स्ट्रगल के दिनों में मुझे एक शो ऑफर हुआ लिखने के लिए, मैं आपको बता दूं कि जब आप थिएटर कर लेते हो ना तो आप सारे काम कर सकते हो, और मुझे लिखना आता ही था मैंने उनको कुछ लिख कर दिया उनको स्क्रिप्ट पसंद आ गई. मुझे वह काम मिल गया. फिर एक शो के बाद दूसरा शो तीसरा शो ऐसे करते-करते मैंने कई शोज मैं लिखना शुरू कर दिया.  फिर ठीक से पैसे आने लगे तो अच्छा लगने लगा. फिर मैंने सोचा कि पहले थोड़ा पैसा जोड़ लूं फिर एक्टिंग पर फोकस करूंगा. फिर एक दौरान ऐसा समय आया कि मेरे पास अच्छा खासा बैकअप हो गया तो मैंने सोचा कि अब मेरे पास पैसा है तो मैं अपना एक्टिंग पर फोकस करता हूं. पर जब भी एक्टिंग के बारे में कुछ ना कुछ सोचता था कुछ ना कुछ गड़बड़ हो जाती थी. एक्टिंग का एक अलग स्ट्रगल होता है आप ऑडिशन देते रहते हैं पता नहीं कब आपको फाइनल किया जाए तो इसके लिए मैं पहले बैकअप चाहता था फिर एक्टिंग पर फोकस करना चाहता था. उस दौरान जब मेरा एक्सीडेंट हुआ था तब मैंने अच्छे खासे पैसे जमा कर लिए थे और तब मुझे लगा मेरे पास एक 2 साल का बैकअप है अब एक्टिंग पर काम किया जाए लेकिन उसी दौरान मेरा एक बड़ा एक्सीडेंट हो गया. इससे रिकवर होने में मुझे 1 साल से ज्यादा समय लगा. दरअसल मैं उस समय ज़ी टीवी के शो सारेगामापा के लिए लिख रहा था. मैं लोकल ट्रेन से सेट पर जा रहा था. मुझे मलाड से महालक्ष्मी तक जाना था. ट्रैफिक से बचने के लिए मैं आमतौर पर ट्रेन का ही इस्तेमाल करता था. 13 अक्टूबर का दिन था और मैं लोकल ट्रेन में जैसे ही चढ़ा मेरा पैर फिसल गया. उसी दौरान ट्रेन स्टार्ट हो गई. मैं प्लेटफार्म और ट्रेन दोनों के बीच में फस गया. और थोड़ी दूर तक ट्रेन मुझे खींच कर ले गई तब तक मेरी कई हड्डियां टूट चुकी थी. इसके बाद तो मुझे कुछ याद नहीं है. उसी दौरान ज़ी टीवी की टीम आई थी और उन्होंने मुझे हॉस्पिटल में एडमिट कराया. मैं हॉस्पिटल में लगभग डेढ़ महीना रहा. उस दौरान हिमेश जी ने मेरी बड़ी मदद. उन्होंने मेरे इलाज के लिए 3 लाख रुपए दिए. बाद में मैंने उनको यह रकम लौटा नहीं चाहिए पर उन्होंने नहीं ली. इसके लिए मैं उनका हमेशा आभारी रहूंगा. और अब जब भी मैं इस एक्सीडेंट के बारे में सोचता हूं तो मुझे ऐसा लगता है कि इसने मुझे और मजबूत बनाया है. इस एक्सीडेंट के बाद मुझे 6 महीने  लगे खड़ा होने में. फिर उसके बाद मैंने कम बैक किया कई शोज में लिखा एक्टिंग पर फोकस किया. अपनी बॉडी बनाई क्योंकि एक्टर की बॉडी जब तक ठीक ना हो तब तक  एक्टिंग नहीं कर सकता. उस दौरान मैंने एक्टिंग पर बहुत काम किया. अपने आप को जितना निखार सकता था निखारा. शायद यह मेहनत का ही नतीजा था कि मुझे अब जाकर एक अच्छा किरदार निभाने का मौका मिला.

 

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