Birthday Special: 'नाम गुम जाएगा' से लेकर 'ए वतन मेरे आबाद रहे तू' तक, अपने शब्दों की जादूगरी से गुलज़ार साहब ने इन गानों को बनाया यादगार

By  
on  

गीतकार, फिल्म निर्देशक और स्क्रिप्ट राइटर गुलज़ार 18 अगस्त को अपना 86वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं. शब्दों की जादूगरी से हर दिल की तह तक पहुंचने वाले लीजेंड लिरिसिस्ट संपूर्ण सिंह कालरा यानी गुलजार साहब का जन्म 18 अगस्त 1934 को एक सिख परिवार में हुआ था. गुलजार साहब का जन्म पाकिस्तान में हुआ था लेकिन विभाजन के समय उनका परिवार पंजाब के अमृतसर में आकर बस गया. ऐसे में उनका बचपन काफी दर्दनाक रहा क्योंकि काफी कम उम्र में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया और पिता का साया भी बचपन में ही सर से उठ गया. फिर दिन गुलजार मुंबई चले आए. शुरुआती दिनों में महानगरी में रहना गुलजार के लिए बेहद कठिन था. मुंबई जैसे शहर में अपना गुजारा करने के लिए गुलजार साहब ने वर्ली में एक गैराज में कार मेकैनिक का काम करना शुरु कर दिया और खाली समय का इस्तेमाल करते हुए कविताएं लिखनी शुरू कर दी. जिसके बाद आधिकारिक तौर पर बिमल राय की फिल्म 'बंदनी' के लिए गुलज़ार ने अपना पहला गीत लिखा.  फिर 'आंधी', 'मौसम', 'मिर्जा गालिब (टीवी सीरीज)', 'किरदार' जैसी फिल्‍मों का निर्देशन करने वाले गुलजार ने बॉलीवुड की कई फिल्‍मों के लिए गीत लिखे हैं.उनके इस योगदान के लइए उन्‍हें 2004 में पद्मभूषण से नवाजा गया था. इसके अलावा बीस बार फिल्मफेयर और पांच बार राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुके हैं. इसके साथ ही 2010 में उन्हें स्लमडॉग मिलेनियर के गाने 'जय हो' के लिए ग्रैमी अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है. वहीं गुलजार को प्रतिष्ठित दादा साहब फालके पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है.

गुलज़ार ने हिंदी सिनेमा में जितना योगदान दिया है, उसे बयां करना आसान नहीं है. बेहतरीन फिल्मों के साथ-साथ दिल को छूने वाली कविताएं लिखने वाले इस शख्स ने ऐसे गाने बनाए हैं, जिन्हें सुनकर आप कहीं खो से जाते हैं. गुलजार साहब पर शब्दों की कुछ इस कदर महरबानी रही है कि उन्होंने गीत, गजल, कविता जो कुछ भी लिखा वो लोगों के दिल तक पहुंचा और उनकी हर रचना को सराहा गया. उन्होंने अपनी कलम के दम पर अपने लिए एक बड़ा मुकाम बनाया है. आज न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी गुलजार के फैंस मौजूद हैं. वहीं गुलजार साहब के जन्मदिन के खास मौके पर पीपिंगमून आपको बताता है गुलजार साहब के कुछ बेहतरीन गाने.

Recommended Read: Birthday Special: बॉलीवुड की पहली फीमेल सुपरस्टार बनने से पहले साउथ में लोहा मनवा चुकीं थीं खूबसूरत और टेलेंटेड दिवंगत एक्ट्रेस श्रीदेवी

फिल्म- घरौंदा (1977)
गाना- दो दीवाने शहर में रात में या दोपहर में आबोदाना ढूँढते हैं

फिल्म- परिचय (1972)
गाना- मुसाफिर हु यारो न घर है न ठिकाना

फिल्म- मौसम (1975)
गाना- दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात-दिन 

फिल्म- आंधी (1975) 
गाना- तुम आ गए हो नूर आ गया है

फिल्म- किनारा (1977)  
गाना- नाम गुम जाएगा

फिल्म- गोलमाल (1979) 
गाना- आने वाला पल जाने वाला है 

फिल्म- मासूम (1983)
गाना- तुझसे नाराज नहीं जिंदगी, हैरान हूँ मैं

फिल्म- सदमा (1983) 
गाना- ऐ ज़िंदगी गले लगा ले 

फिल्म- जीवा (1986) 
गाना- रोज़ रोज़ आंखों तले  

फिल्म- इजाज़त (1987) 
गाना- मेरा कुछ सामान 

फिल्म- दिल से (1998) 
गाना- ऐ अजनबी तू भी कभी आवाज़ दे कहीं से

फिल्म- दिल से (1998)
गाना- चल छैंया छैंया छैंया छैंया  

फिल्म- ओमकारा (2006) 
गाना- नयना ठग लेंगे 

फिल्म- राजी (2018)
गाना- ए वतन मेरे आबाद रहे तू

फिल्म- द स्काई इज पिंक (2019)
गाना- दिल ही तो है

(Source: Youtube)

Recommended

Loading...
Share