Birthday Special: कभी भी एक इमेज में बंधकर नहीं रहे आयुष्मान खुराना, 8 सालों में अपने इन फिल्मों से बनाई अलग पहचान

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अपनी दमदार एक्टिंग और लीक से हटकर फिल्में करने में माहिर हैंडसम हंक आयुष्मान खुराना 14 सितंबर को अपना 36वां बर्थ डे मना रहे हैं. आयुष्मान का जन्म 14 सितंबर 1984 को चंडीगढ़ में हुआ था. पहले उनके माता- पिता ने उनका नाम निशांत खुराना रखा था. लेकिन तीन साल की उम्र में उनका नाम बदलकर आयुष्मान खुराना रख दिया गया. आयुष्मान ने मास कॉम्यूनिकेशन में मास्टर की डिग्री हासिल की साथ ही साथ उन्होंने पांच साल तक थियेटर भी किया है. वहीं फिल्मों में आने से पहले आयुष्मान खुराना बतौर रेडियो जॉकी काम करते थे.  बिग एफएम पर उनका शो 'मान न मान, मैं तेरा आयुष्मान' सुपरहिट रहा था. टीवी पर धूम मचाने के बाद अब आयुष्मान बॉलीवुड में अपना जादू बिखेर रहे हैं. वो एक मल्टी टैलेंटेड इंसान हैं. सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्होंने चैनल वी पॉपस्टार्स में शिरकत की थी. वो उस शो के सबसे कम उम्र के प्रतियोगी थे. सिर्फ इतना ही नहीं महज 20 साल की उम्र में आयुष्मान ने रियलटी शो रोडीज 2 भी जीत लिया था. एमटीवी का पॉपुलर शो रोडीज जीतने के बाद आयुष्मान खुराना चर्चा में आए. इसके बाद आयुष्मान ने बतौर वीजे एमटीवी के लिए कई शोज किए. साल आयुष्मान ने साल 2012 में बॉलीवुड में डेब्यू किया और 8 सालों में अपने दम पर अलग पहचान बनाई. उन्होंने अब तक के अपने एक्टिंग करियर में अलग तरह की फिल्में कीं और अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया है.

आयुष्मान लगातार बुलंदियों की ओर बढ़ रहे है इसका सबसे बड़ा कारण है खुराना की जबरदस्‍त एक्टिंग और उनके फिल्मों के डिफरेंट सब्जेक्ट. आयुष्मान की फिल्मों में सबसे खास बात ये होती है कि भले ही फिल्म का मुद्दा कितना ही गम्भीर क्यों ना हो पर इस सीरियस मुद्दें के साथ जब  आयुष्मान की एक्टिंग औक कॉमेडी का तड़का लगता है तो जो बात फिल्म समझाना चाहती है वो आसानी से ऑडियंस को समझ आ जाती है. आयुष्मान हमेशा अपनी स्क्रिप्ट का चुनाव बहुत ही सोच समझकर करते हैं 'विक्की डोनर' से आज तक उन्होंने जिस भी फिल्म का चुनाव किया है उसकी कहानी फिल्म का सबसे मजबूत स्टार होती है. आज हम मल्टी टैलेंटेड आयुष्मान की उन फिल्मो की बात करेंगे जिसने एक्टर को तो ऊचांइयों तक पहुंचाया साथ ही समाज पर एक गहरा असर छोड़ा.  

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 विक्की डोनर (2012)
खुराना ने 2012 में शूजीत सरकार की रोमांटिक कॉमेडी विक्की डोनर, से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी इस फिल्‍म में खुराना ने एक स्‍पर्म डोनर (शुक्राणु दाता) की भूमिका निभाई थी. यह एक सुपर हिट फिल्‍म थी. जिसने आयुष्‍मान को एक बेहतर अभिनेता के रूप में पेश किया था. इस फिल्‍म में किये जबरदस्‍त अभिनय के लिये आयुष्‍मान को फिल्‍मफेयर के बेस्‍ट मेल डेब्‍यू, और बेस्‍ट मेल प्‍लेबैक सिंगर के खिताब से नवाजा गया था.

शुभ मंगल सावधान (2017)
आरएस प्रसन्ना द्वारा निर्देशित इस फिल्म में आयुष्मान और भूमि पेडनेकर लीड रोल में थे. फिल्म के डायरेक्‍टर प्रसन्ना ने 'जेन्ट्स प्रॉब्लम' को बड़े ही मसखरे और मजाकिया लहजे में दिखाने की कोशिश की थी. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था. 63 वें फिल्मफेयर अवार्ड्स में फिल्म को पांच नामांकन मिले थे. 

अंधाधुन (2018)
श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित 'अंधाधुन' आयुष्‍मान की सर्वश्रेष्‍ठ फिल्‍मों में से एक है. आयुष्‍मान ने फिल्म में अपनी एक्टिंग के लिए काफी वाहवाही बटोरी थी. फिल्म में आयुष्मान एक पियानो प्लेयर बने हैं जो अंधे होने का नाटक करता है. अंधाधुन को 66 वें राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कारों में बेस्‍ट हिंदी फिल्‍म कटेगरी के अंतर्गत राष्‍ट्रीय फिल्‍म पुरस्‍कार दिया गया था. इसके अलावा फिल्‍म को फिल्‍मफयर क्रिटिक्‍स अवार्ड फॉर बेस्‍ट ऐक्‍टर भी दिया गया था.

ड्रीम गर्ल (2019)
डायरेक्टर राज शांडिल्य की इस फिल्म ने 100 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया था. फिल्म में आयुष्मान और नुसरत भरूचा ने लीड रोल निभाया था. फिल्म में आयुष्मान ने पूजा नाम की लड़की का किरदार निभाया है जो मर्दों से महिलाओं की आवाज में बात करता है. दरअसल होता क्या है छोटे से शहर में रहने वाला कर्मवीर (आयुष्मान खुराना) बचपन से ही लड़की की आवाज निकालने में महारत रखता है. ऐसे में उसे नौकरी मिलती है कॉल सेंटर में जहां पर वह लड़की की आवाज में दुनिया भर से बातें करता है और धीरे-धीरे उसे पता पड़ता है कि दुनिया में कितना अकेलापन है. पूजा के प्यार में पूरा शहर पड़ा हुआ है लेकिन मामला वहां पर गड़बड़ा जाता है जहां पर उसके आसपास के लोग भी पूजा से प्यार करने लगते हैं.  इतने गम्भीर मुद्दे के बावजूद फिल्म ने दर्शकों को हंस हंस के लोटपोट कर दिया था. 

बाला (2019)
फिल्ममेकर अमर कौशिक की फिल्म 'बाला' में लड़कों के गंजेपन के मुद्दे को दिखाया गया था. फिल्म में निर्देशक ने एक तरफ गंजेपन की समस्या को डील करते हैं, तो दूसरी तरफ काली लड़की के प्रति समाज के संकीर्ण और हीन रवैये को सामने रखा था. फिल्म में समाज में सालों से चली आ रही इस प्रॉब्लम का सल्यूशन देते हुए ये मैसेज दिया था कि आप जैसे हो, वैसे खुद को स्वीकार करो. मुद्दे की तह में जाते हुए उन्होंने इसे कॉमेडी के फ्लेवर से सजाया गया था. कानपुर के बैकड्रॉप में बनी गई कहानी में कानपुरिया एक्सेंट किरदारों को मजेदार बना दिया था. फिल्म में आयुष्मान ने एक बार फिर शानदार और जानदार अभिनय से साबित कर दिया था कि वे हर तरह की भूमिकाएं करने में सक्षम हैं. अभिनेता के रूप में गंजे किरदार को चुनना उनकी इमेज के लिए रिस्की भी हो सकता था, मगर उन्होंने न केवल उसे चुनने का साहस किया बल्कि उस भूमिका में छा गए थे.  

शुभ मंगल ज्यादा सावधान (2020)
आज भले कानून ने समलैंगिता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया हो, मगर समलैंगिक समुदाय को होमोफोबिया के रूप में अपने ही परिवारों से घृणा, तिरस्कार और रिजेक्शन सहना पड़ता है. फिल्म में इसी मुद्दे पर को रखा गया था. फिल्म में सिर्फ कानून बनाने की बात नहीं कि गई थी ये भी बेहतर ढंग से समझाया गया थी कि इसको लेकर सामजिक तौर पर यह काउंसिलिंग होनी भी जरूरी है कि होमोसेक्शुऐलिटी कोई बीमारी नहीं बल्कि कुदरत है, प्रकृति है और उससे आप नफरत नहीं कर सक सकते. होमोसेक्शुऐलिटी पर इससे पहले भी कई फिल्में बनी थी पर निर्देशक हितेश ने इसे बहुत ही मजेदार और मनोरंजक ढंग से दिखाया था. फिल्म में कार्तिक के किरदार में आयुष्मान खुराना का फ्लैमबॉयंट और 'भाड़ में जाओ वाला' ऐटिट्यूड कहानी के लिए सोने पर सुहागा का काम किया था. वाक्य में ही इसमें कोई शक नहीं की आयुष्मान ने गे के कैरेक्टर को न केवल करने का रिस्क उठाया बल्कि उसे बेहद मजबूती से अंजाम भी दिया था. 

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