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PeepingMoon 2020: 'स्कैम 1992' से लेकर 'पाताल लोक' तक, इस साल इन वेब सीरीज का रहा बोलबाला

महामारी वाले इस साल ने पूरी दुनिया को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया. कोरोना का असर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री पर भी बड़े स्तर पर पड़ता दिखा. जो फिल्में पहले बड़े पर्दे पर रिलीज होती थीं, अब उन्हें भी ओटीटी पर रिलीज किया जाने लगा. पर सही मायनो में ये साल रहा वेब सीरीज का. इस साल कई नायाब और आला दर्जे की वेब सीरीज रिलीज हुई. वेब शोज के हाई क्वालिटी कंटेंट ने एक सेट बेंचमार्क कर दिया. आइए, बिना देरी किए नजर डालते हैं इस साल की सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाली वेब सीरीज.  

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जामताड़ा- जनवरी 
नेटफ्लिक्स की सीरीज जामताड़ा  को सौमेंद्र पाधी ने डायरेक्ट किया था. सीरीज में स्पर्श श्रीवास्तव, अंशुमान पुष्कर, अक्षा परदसानी, दिव्येंदु भट्टाचार्य, अमित सियाल, मोनिका पंवार और पूजा झा ने अहम किरदार निभाया था. जामताड़ा की कहानी युवा और बाल अपराधियों की कहानी थी. फोन पर लड़कियों की तरह बात करके लोगों के क्रेडिट या डेबिट कार्ड नंबर पूछना और फिर सीवीवी के अंक मांग लेना और फिर मोबाइल पर आने वाला ओटीपी. तो जामताड़ा जिले का सबसे बड़ा कमाई का साधन यही था. 2014 से 2018 तक. वेब सीरीज़ ‘जामताड़ा- सबका नंबर आएगा’, उन्हीं सच्ची घटनाओं को बेस बनाकर एक काल्पनिक कहानी कहती है. वेब सीरीज़ की सबसे ख़ास बात है इसके किरदारों की एक्टिंग और कहानी थी. ये ही दो बाते इस सीरीज को बेस्ट की लिस्ट में शामिल करती है.  

 

द फॉरगॉटन आर्मी: जनवरी  
अमेजन प्राइम की सीरीज को कबीर ख़ान ने डायरेक्ट किया था. सनी कौशल, सरवरी वाघ, रोहित चोधरी, एम के रैना, श्रुती सेठ स्टारर इस सीरीज की कहानी उन शहीदों और योद्दाओं की थी, जिन्होंने दित्तीय विश्वयुद्द में ब्रिटिश फौज को उखाड फैंकने का संकल्प लिया था. सीरीज़ में आजाद हिंद फौज़ की कहानी दिखाई गई थी. इसमें फौज के गठन और उसके बाद जंग की कहानी दिखाई गई. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सिंगापुर और म्यांमार में मौजूद इस सेना ने दिल्ली चलने का नारा दिया और उसके बाद ब्रिटिश राज से आजादी के लिए जंग लड़ी. इस वेब सीरीज़ में कैप्टन सोढ़ी का किरदार सनी कौशल ने निभाया था. वहीं, शरवारी वाघ माया श्रीवास्तव के किरदार में नजर आई थी. लोगों को ये अनसुनी कहानी काफी पसंद आई थी. 

 

ताजमहल 1989 - फरवरी 
ज़िंदगी क्या है? इश्क़ क्या है? दोस्ती क्या है? ऐसे कई सवाल हैं जिनका हमारी जिंदगी में कभी ना कभी हम से ताल्लुक पड़ता ही है. हम इन सवालों के जवाब ढूंढने में सारी जिंदगी बिता देते हैं. नेटफ्लिक्स की ये सीरीज इन्ही सवालों के इर्द-गिर्द बनी थी.  नीरज काबी, गीतांजलि कुलकर्णी, शीबा चड्ढा, दानिश हुसैन, अनुद सिंह ढाका, अंशुल चौहान, पारस प्रियदर्शन स्टारर इस सीरीज में कहानी थी, किस्से थे, दोस्ती थी, प्यार था और लखनऊ की गलियां थी. 7 एपिसोड की इस सीरीज में किरदार अलग-अलग थे और उनकी कहानियां भी अलग-अलग थी. पहली कहानी में अख्तर बेग लखनऊ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं जो फिलॉसफी पढ़ाते हैं, उनकी पत्नी है सरिता जो उसी यूनिवर्सिटी में फिजिक्स पढ़ाती हैं. दो दशक से दोनों की शादी हो चुकी है, लेकिन वही घर की छोटी-छोटी खींचतान और बढ़ती उम्र के साथ प्यार में कमी, दोनों के बीच लगातार खटपट चलती ही रहती है. दूसरी ओर एक कॉलेज लाइफ है, जहां तीन-चार युवा दोस्त हैं और उनकी जिंदगी में क्या बीत रहा है वह सब देखने को मिलता है. अंगद, रश्मि और धर्म तीन किरदार हैं जो दोस्त हैं और यूनिवर्सिटी में एक साथ पढ़ते हैं. रश्मि और धर्म बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड हैं लेकिन धर्म बीच में रास्ते से भटक जाता है तो उनका साथ छोड़ जाता है. दूसरी तरफ अंगद है जो गरीब है, अनाथ है लेकिन स्मार्ट बहुत है. साम्यवाद को लेकर उसके पास इतनी शानदार नॉलेज है कि कॉलेज की लड़कियां उसकी फैन हो जाती हैं. धर्म दूसरी तरफ शराब और राजनीति के पचड़े में फंस जाता है, जिसकी वजह से यह दोस्ती में दरार आ जाती है.  स सीरीज में फिलॉसफी की बात होती हैं जो आपको जिंदगी का ज्ञान बताती हैं. कई किस्से ऐसे साझा किए जाते हैं जो सुनने में बड़ा मजा आता है. कुछ डायलॉग ऐसे हैं जो दिल में उतरते हैं. इसके अलावा दोस्ती, प्यार और उसे निभाने के तरीके, कुछ ऐसी चीज है जो आपके दिल में उतर जाती हैं. 

 

पुष्पावली 2: मार्च 
2017 में 'पुष्पावली' के पहले सीजन के बाद इस साल ऑडियंस के लिए दूसरा सीजन रिलीज किया गया, जो कि काफी मजेदार था. 'पुष्पावली' सीरीज कॉमेडियन सुमुखि सुरेश ने बनाया था. ये शो एक लड़की के बारे मैं है, जो एक लड़के के प्यार में दीवानी है और उसके पीछे-पीछे एक शहर से दूसरे शहर भागती रहती है, और लड़के को इस प्यार का जरा भी अंदाजा नहीं है. लीड रोल खुद सुमुखि ने प्ले किया है. बाकी स्टार कास्ट की कॉमिक टाइमिंग भी काफी अच्छी है. 

 

असुर: मार्च 
अरशद वारसी और बरुन सोबती स्टारर वूट सेलेक्ट की वेब सीरीज 'असुर' को दर्शकों ने काफी पसंद किया था. इस वेब सीरीज में साइंस और माइथोलॉजी को मिलाकर एक ऐसी कहानी दिखाने की कोशिश की गई थी, जिसे पर देखना दर्शकों के लिए यकीनन काफी मजेदार साबित हुआ. हिंदू धर्म में असुरों को एक खास जगह प्राप्त है. इस सीरीज में भी असुरों की उत्पत्ति से लेकर उनके अस्तित्व की कहानी बयां करने की कोशिश की गई थी. ये कहानी साइंस और धर्म के बीच के संबंध को बयां करती थी.  इसमें जहां एक ओर विज्ञान सही लगने लगता है तो दूसरी ओर धर्म. लेकिन अंत तक आते-आते आपको ये समझ आने लगेगा कि असल में सही और गलत तो कुछ होता ही नहीं है. सही मायनो में ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. जिसे हर कोई अपनी जरूरत के हिसाब से सही मानने लगता है. ये कहानी फॉरेंसिक एक्सपर्ट निखिल (बरुन सोबती), सीबीआई ऑफिसर धनंजय राजपूत (अरशद वारसी) की इर्ध गिर्ध बुनी गई थी. निखिल और अरशद के बीच अपने काम के चलते कुछ दूरियां हैं. सीरियल किलिंग के एक खौफनाक सिलसिले के साथ सीरीज काफी इंट्रेस्टिंग थी. इस सीरीज में  अरशद वारसी, वरुण सोबती के अलावा अनुप्रिया गोयनका, रिद्धि डोगरा, शारिब हाशमी अमी वाघ, पवन चोपड़ा और गौरव अरोड़ा जैसे कलाकार अहम रोल में थे. 

 

स्पेशल ऑप्स: मार्च 
'स्पेशल 26', 'बेबी' और 'ए वेडनेसडे' जैसी फ़िल्में बना चुके निर्देशक नीरज पांडेय ने अपना डिजिटल डेब्यू करते हुए हॉटस्टार की वेब सीरीज़ 'स्पेशल ऑप्स' को डायरेक्ट किया था. नीरज पांडेय एक बार फिर अपना असर छोड़ने में कामयाब रहे. वेब सीरीज़ की कहानी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के ऑफ़िसर हिम्मत सिंह (केके मेनन) के इर्द-गिर्द बुनी गई थी.  हिम्मत सिंह के ऊपर  बिना किसी स्त्रोत के ज्यादा खर्च करने का आरोप है.  इसके लिए वह एक कमेटी की सामना कर रहा है. वह 2001 में हुए संसद पर हमले और मुंबई ब्लास्ट जैसे मामलों की जांच भी कर रहा है. उसे इकलाख ख़ान नाम के एक आंतकवादी की तलाश है, जो कि इन हमलों के पीछे का मास्टरमाइंड है. दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमला हुआ. उसके बाद देशभर में कई और बड़े हमले हुए. तकरीबन इन सभी हमलों के ऊपर कोई न कई फिल्म बन ही चुकी है. लेकिन सिनेमा इतिहास में पहली बार पार्लियामेंट अटैक को किसी फिल्म-सीरीज़ में जगह दी गई थी. सीरीज में करण टैकर, दिव्या दत्ता, विनय पाठक, सैयामी खेर, मिहिर विज, विपुल गुप्ता, सना खान, विनय पाठक अहम किरदार में थे. 

 

पंचायत: अप्रैल 
पंचायत कहानी थी अभिषेक त्रिपाठी की. जिसकी नौकरी लगती है एक ग्राम पंचायत में सचिव के तौर पर. तनख़्वाह 20 हजार रुपए. यहां रघुवीर यादव और नीना गुप्ता के किरदारों से उसका वास्ता पड़ता था  और इन्हीं तीनों के इर्द-गिर्द बुनी है पंचायत की कहानी. वेब सीरीज़ का प्लॉट तो अच्छा था. तीनों के अभिनय और सरल सी चीजों से रस पैदा करने की दीपक मिश्रा की कोशिशों के लिए पंचायत देख सकते हैं. TVF के निर्माताओं ने कहानी को दर्शकों तक बखूबी पहुंचाया. 'पंचायत' की स्क्रिप्ट और डायरेक्शन एकदम परफेक्ट था.  रघुबीर यादव, नीना गुप्ता, बिस्वापती सरकार और फैसल मलिक की जैसी शानदार कास्ट ने ऑडियंस को खूब एंटरटेन किया.  

 

फोर मोर शॉट्स प्लीज 2: अप्रैल 
नूपुर अस्थाना की सीरीज 'फोर मोर शॉट्स प्लीज 2!' की कहानी चार  जिंदादिल और बिंदास लड़कियो की जिंदगी यानी मानवी गागरू, सयानी गुप्ता, बानी जे और कीर्ति कुल्हारी उर्फ सिद्धि, दामिनी, उमंग और अंजना के इर्ध गिर्ध धुमती है. पहले सीजन में सबकी प्रोफेशनल, लव और सेक्स लाइफ पहले तीतर-बितर थी, पर इस सीजन में सब mature हो गई हैं ,अपनी ताकत और कमजोरी को जानती हैं और बहुत हद तक सब असली लगा. सारे किरदार पहले से बेहतर लगे, जिस कॉन्फिडेंस और सब्र के साथ सभी किरदारों को परस्थितियों को हैंडल करते दिखाया है, कई लोग इससे काफी कुछ सीख सकते हैं.  चारों की आपसी केमिस्ट्री भी बढ़िया रही है.

 

हसमुख: अप्रैल
वेब सीरीज़ की कहानी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के हसमुख (वीर दास) के आस पास बुनी गई है, जो अपने गुरु गुलाटी के गुलाम जैसा होता है. उसकी ना तो घर में इज्ज़त है और ना ही स्टेज़ पर. इसके बाद एक दिन उत्तेजना में आकर वह अपने गुरु गुलाटी की हत्या कर देता है. फिर वह पहली बार स्टेज़ पर आता है और लोगों को हंसाना शुरू करता है. इस कड़ी में उसकी मुलाकात गुलाटी के मैनेजर जिम्मी द मेकर से होती है. वह उसके लिए शोज़ की व्यवस्था करता है. लेकिन हसमुख की एक समस्या है कि बिना हत्या किए वह कॉमेडी नहीं कर सकता है. इसका जुगाड़ जिम्मी करता है. एक दिन उसका वीडियो वायरल होता है और वह मुंबई के एक टीवी शो में पहुंच जाता है. वहां, उसके पीछे पुलिस पड़ जाती है. एक तरफ शो हैं, दूसरी तरफ हत्याएं. ये ही सब सीरीज में दिखाया गया है. सीरीज की सबसे ख़ास बात ये थी कि इस सीरीज़ में एक अगल किस्म का प्रयोग किया गया है. स्टैंडअप और ड्रामा को एक साथ लाने का प्रयास किया गया. 

 

पाताल लोक: मई
अमेजॉन प्राइम पर आई सीरीज 'पाताल लोक' ने बता दिया की अच्छी स्क्रिप्ट और एक्टिंग के आगे सबकुछ फीका है. 9 ऐपिसोड लंबे 'पाताल लोक' को सुदीप शर्मा, अविनाश अरुण और रोहित रॉय ने मिलकर बनाया था. अपराध, नेतागिरी , खून-खराबा, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और मजेदार डाइलॉग से भरे स्क्रीनप्ले में जयदीप अहलावत, अभिषेक बैनर्जी, नीरज काबी, स्वस्तिका मुखर्जी, गुल पनाग, बोधिसत्व शर्मा, इश्वाक सिंह जैसे कलाकारों ने जान डाल दी थी. सभी सितारों की एक्टिंग बेजोड़ है. जिस तरह से हाथीराम और हथौड़ा त्यागी के कैरेक्टर ऑडियंस में फेमस हुए हैं, वो इसे बिंज वॉच करने के लायक बनाते हैं.

 

आर्या: जून 
डिज्नी हॉटस्टार पर रिलीज हुई 'आर्या' की सबसे बड़ी बात खुद सुष्मिता सेन थी. लंबे समय बाद पर्दे पर लौटीं सुष्मिता सेन, अपने स्टाइल और शानदार डायलॉग डिलिवरी से दर्शकों पर जादू चलाने में कामयाब रही थी. 'नीरजा' जैसी अवॉर्ड विनिंग फिल्म बनाने वाले निर्देशक राम माधवानी ने संदीप मोदी और विनोद रावत के साथ मिलकर 'आर्या' को डायरेक्ट किया था.  राजस्थान के परिवार की कहानी दिखाती ये 9 ऐपिसोड वाली सीरीज आपको रोमांच और थ्रिल से भरी हुई थी. सुष्मिता सेन के अलावा विकास कुमार, सिकंदर खेर, अंकुर भाटिया, नमित दास, मनीष चौधरी, जयंत कृपलानी और चंद्रचूड़ सिंह ने सीरीज में अहम किरदार निभाया था. कहानी भी एक लेडी डॉन के आसपास बुनी गई है. आर्या सरीन का परिवार गैर कानूनी अफीम और दवाईओं के बिजनेस में लिप्त होता है. आम तौर पर थ्रिलर कहानियों में एक विलेन होता है. एक हीरो होता है. ‘आर्या’ देखते हुए वो लाइन ब्लर हो जाती है. राम माधवानी का डायरेक्शन अच्छा है. और कहानी कन्विंसिंग थी. 

 

अनदेखी: जून
आशीष शुक्ला की सीरीज अनदेखी में 10 एपिसोड थे. जिसका हर एपिसोड आधे घंटे से थोड़ा लंबा था.  लेकिन ये समय खर्च करना आपको खलेगा नहीं. क्योंकि ‘अनदेखी’ काफी समय के बाद आई बड़ी नीट एंड क्लीन टाइप क्राइम थ्रिलर सीरीज़ थी. इस सीरीज़ को देखते हुए बीच-बीच में आपको करिश्मा कपूर वाली ‘शक्ति’ और प्रकाश झा की ‘राजनीति’ जैसी फिल्में याद आती थी. जो कि बेशक इस सीरीज़ के लिए कॉम्प्लिमेंट है. हर एपिसोड के बाद मजबूत क्लिफहैंगर्स इसे शुरू करने के बाद रुकने नहीं देते. इसमें इसका प्रेडिक्टेबल न होना भी एक बड़ा रोल प्ले करता है. ये सीरीज़ खत्म होने के साथ दूसरे सीज़न की गुंजाइश छोड़कर जाती है. सीरीज में हर्ष छाया, सूर्य कुमार, दिब्येंदु भट्टाचार्य, अपेक्षा पोरवाल, अभिषेक चौहान अहम किरदार में थे. सीरीज की कहानी, कास्टिंग, एक्टिंग सभी कमाल की थी. 

 

ब्रीदः इंटू द शैडोज: जुलाई 
अभिषेक बच्चन, निथ्या मेनन स्टारर, अमित साद और सैयामी खैर स्टारर वेब सीरीज ब्रीदः इंटू द शैडोज इस साल जुलाई में रिलीज हुई है. ये एक क्राइम थ्रिलर सीरीज है जिसमें अभिषेक बच्चन अपनी बेटी सिया को बचाने के लिए कई संगीन जुर्म को अंजाम देते हैं. सीरीज रहस्य के साथ साथ रोमांच पैदा करती है. ये सीरीज लोगों का काफी पसंद आई थी. 

 

मसाबा मसाबा; अगस्त

टीनेजर मसाबा गुप्ता को उनकी माँ नीना गुप्ता ने एक्टिंग को बतौर करियर चुनने से मना कर दिया था. पर अब 31 साल की, मसाबा, जो एक फेमस डिजाइनर नेटफ्लिक्स के मसाबा मसाबा में अपनी मां नीना गुप्ता के साथ स्क्रीन स्पेस करती नजर आई. सोनम नायर के डायरेक्शन में बनी और अश्विनी यार्डी के क्रिएशन वाली इस पेशकश में मसाबा और नीना दोनों ही अपनी जिंदगी का फिक्शनल वर्जन निभाती दिखती हैं. वैसे तो कहानी का बैकड्रॉप फिक्शनल है लेकिन इसके बावजूद मसाबा और नीना अपनी निजी जिंदगी के कई पहलु को भी बिना भाषण पेश किया. हॉट और बेपरवाह मसाबा की जिंदगी की सिर्फ अच्छी बातों पर फोकस न करते हुए इस सीरीज में मसाबा की लाइफ के हर पहलुओं पर रोशनी डाली गई. डॉक्यूमेंट्री और रियल लाइफ स्टोरीज एलिमेंट के साथ 'मसाबा मसाबा' में मेलोड्रामा भी है, मजेदार मोड़ भी हैं. 

 

आश्रम: अगस्त 
बॉबी देओल स्टारर शो आश्रम को दर्शकों से नहीं बल्कि आलोचकों से मिक्स रीव्यू मिली. आश्रम सीरीज सबसे अधिक देखे जाने वाली लिस्ट में शामिल है. MX प्लेयर की इस सीरीज को प्रकाश झा ने डायरेक्ट किया था. सीरीज में बॉबी देओल के अलावा  अदिती पोहनकर, चंदन रॉय सान्याल, दर्शन कुमार, अनुप्रिया गोइंका, अध्ययन सुमन अहम किरदार में थे. झा अपनी राजनीति, लोकतंत्र, पुलिसिंग, आरक्षण और जाति व्यवस्था को आगे ले जाते हुए, एमएक्स प्लेयर शो आश्रम में असल में भारत के गॉडमैन कल्चर के पीछे की डार्क साइड को दिखाया था, जो जबरन वसूली, शोषण, यौन शोषण और घृणित अपराधों से भरा है. इस वेब सीरीज़ में बॉबी देओल ने काशीपुर वाले बाबा निराला का रोल किया था. झा का डायरेक्शन और बॉबी की एक्टिंग दोनों ने काफी तारीफ बटोरी. सीरीज़ में आस्था के नाम पर चलने वाले ढोंग, पाखंड को अच्छे से दिखाया गया था.

 

फ्लैश: अगस्त 
मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति के धंधे की अंधेरी दुनिया दिखाने वाली वेबसीरीज फ्लैश समाज के आपराधिक तत्वों के खिलाफ एसीपी राधा नौटियाल की लड़ाई है. डायरेक्टर दानिश असलम की सीरीज में स्वरा भास्कर, विद्या मालवड़े, युधिष्ठिर उर्स, महिमा मकवाना लीड रोल में थे. सीरीज की कहानी का विस्तार मुंबई से कोलकाता तक है. इन दो महानगरों के बीच मानव तस्करों का धंधा चलता है और कई मासूम जिंदगियां फफक-फफक कर बर्बाद होती हैं. फ्लैश में जैसे-जैसे मानव तस्करों की दुनिया के दरवाजे खुलते हैं, हैरान करते हैं. दहलाते हैं. उनके प्रति नफरत जगाते हैं. लगता है कि नर्क कहीं है तो इन्हीं लोगों ने उसे बसाया है. इनसे क्रूर लोग शायद ही कहीं और मिलेंगे. एक बार ये सीरीज  देखना शुरू करने के बाद मजबूत क्लिफ हैंगर्स की वजह से इसे एक-दो एपिसोड के बाद बंद कर पाना भी मुश्किल हो जाता है. सीरीज़ की कहानी और दमदार अभिनय ही इस सीरीज की जान है.

 

द गॉन गेम: अगस्त

द गॉन गेम में कोरोना लॉकडाउन के दौरान गुजराल परिवार में हुई एक ऐसी मौत की कहानी है, जो धीरे-धीरे हत्या की तरह सामने आती है. कोरोना काल में मार्च 2020 में जब पूरे देश में लॉक डाउन लागू हुआ, तब गुजराल परिवार की कहानी शुरू हुई. जिसमें परिवार के सारे सदस्य अलग-अलग शहरों दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, देहरादून में हैं. अलग-अलग घरों में. दूरियों के बावजूद सभी किरदार वीडियो कॉल्स से एक-दूसरे से जुड़े हैं. यहां बातें हैं, वारदातें हैं. आज के दौर की स्मार्ट लाइफ और स्मार्ट गैजेट्स यहां अहम किरदारों की तरह हैं. तय है कि यह कम-ज्यादा स्मार्ट होना हमारी जिंदगी का अंग बन चुका है. ऐसे में अगर किसी मर्डर का खुलासा होता है तो उसकी तह तक जाने के लिए खासी मशक्कत की जाती है. वेबसीरीज बनने की तकनीक का भी टर्निंग पॉइंट है. सभी ऐक्टरों ने अपने-अपने हिस्से की कहानियां अपने-अपने घरों में शूट की और निर्देशक निखिल नागेश भट ने उन्हें एक सूत्र में पिरो कर मुकम्मल थ्रिल तैयार किया. ओटीटी प्लेटफॉर्म वूट पर आई द गॉन गेम का यह सीजन रोचक था. स्क्रिप्ट लिखने का अंदाज भी यहां बदल गया. इससे यही पता चलता है कि कितना भी, कैसा भी संकट हो इंसान को कहानियों की जरूरत हमेशा है. वह बंदिशों के बावजूद इन्हें कहने का रास्ता ढूंढ लेता है. सीरीज में संजय कपूर, अर्जुन माथुर, श्वेता त्रिपाठी, श्रिया पिलगांवकर, इंद्रनील सेनगुप्ता ने अहम किरदार निभाए थे. 

 

बंदिश बैंडिट्स: अगस्त
रोमांटिक-ड्रामा सीरीज 'बंदिश बैंडिट्स' में रित्विक भौमिक, श्रेया चौधरी, नसीरुद्दीन शाह, अतुल कुलकर्णी, शीबा चड्डा, राजेश तैलंग कुणाल रॉय कपूर और त्रिधा चौधरी जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं. यह कहानी है संगीत सम्राट राठौर घराने के पं. राधे मोहन राठौर (नसीरुद्दीन शाह) और उनके परिवार की, जिसमें उनका बड़ा बेटा राजेंद्र (राजेश तैलंग), बहू मोहिनी (शीबा चड्ढा), छोटा बेटा देवेंद्र (अमित मिस्त्री) और पोता राधे (ऋत्विक भौमिक) हैं। यह कहानी पॉप संगीत की उभरती कलाकार तमन्ना (श्रेया चौधरी) की भी है, जो पॉप संगीत में मुकाम बनाना चाहती है। पंडित जी बहुत सख्त हैं और संगीत को लेकर कोई समझौता नहीं करते। राधे पंडित जी का उत्तराधिकारी बनना चाहता है. ‘जागो मोहन प्यारे’ बंदिश से शुरू हुई यह सिरीज पहले दृश्य में ही मन मोह लेती है. इसमें संगीत जितना बढ़िया है, गायकी भी उतनी ही कर्णप्रिय है. ‘बंदिश बैंडिट्स’ का अंतिम एपिसोड तो शास्त्रीय संगीत का विभोर कर देने वाले कार्यक्रम लगता है. इसका हर कंपोजिशन अभिभूत कर देता है. गायकों की गायकी अभिभूत कर देने वाली है. सिर्फ संगीत ही नहीं, इसकी कहानी, पटकथा और प्रस्तुती भी भाने वाली है. आनंद कुमार का निर्देशन अच्छा है. उन्होंने सिरीज को बहुत रोचक तरीके से पेश किया है, जिससे दर्शक शुरू से आखिर तक बंधे रहते हैं.

 
स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी: अक्टूबर 
हर्षद मेहता की 'रिस्क से इश्क' करने वाले कहानी को ऑडियंस ने बहुत प्यार दिया था. 'स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी' सोनी लिव पर रिलीज हुई थी. इसकी कहानी से लेकर थीम सॉन्ग को खूब पसंद किया गया. ये वेब सीरीज देबाशीष बसु और सुचेता दलाल की किताब 'द स्कैम' पर आधारित थी. जो हर्षद मेहता के शेयर बाजार घोटाले पर लिखी गई थी.  सीरीज एक ऐसे स्टॉक ब्रोकर की कहानी है जिसने अकेले ही स्टॉक मार्केट का नक्शा बदल दिया. प्रतीक गांधी, श्रेया धनवंतरी ठाकुर और हेमंत खेर की एक्टिंग काबिलेतारीफ थी. 

 

मिर्जापुर 2: अक्टूबर 
'मिर्जापुर 2' उन सीरीज में से थी, जिसका इंतजार ऑडियंस को दो सालों से था. दूसरे सीजन में एक्शन वहीं से शुरू होता है, जहां से पिछले सीजन खत्म हुआ था. कालीन भैया का टशन, मुन्ना भैया की मिर्जापुर की गद्दी पर बैठने की चाहत, बदले की आग में झुलसते गुड्डू और गोलू का एक्शन लोगों को काफी पसंद आया. इस सीजन में नए किरदारों ने कहानी को और थ्रिलिंग बना दिया है . एक्टिंग इस बार भी सबकी ज़ोरदार रही.  ये इस साल की मच अवेटेड सीरीज़ रही. 


 

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