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Super 30 रिव्यू: अगर इरादे हैं मजबूत तो मुमकिन है हर ख्वाब, सच्चे शिक्षक की कहानी है रितिक रोशन की ये फिल्म

फिल्म की शुरुआत विजय वर्मा से होती है. उनकी पहली झलक देख आपको 'गली बॉय' की याद आ जाएगी क्योंकि 'गली बॉय' में भी फिल्म के फर्स्ट शॉट में वही दिखाई देते है. आनंद को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला चाहिए होता है जो कि उसे मिल भी जाता है, लेकिन आर्थिक हालात सही न होने की वजह से उसका यह सपना टूट जाता है. इस गम को आनंद के पिता बर्दाश्त नही कर पाते और दुनिया को अलविदा कह देते है. 

आनंद कुमार के किरदार में रितिक रोशन को अपनाने में आपको थोड़ा समय लगेगा लेकिन जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ेगी, आपको रितिक ही आनंद लगेंगे. फर्स्ट हाफ में मृणाल ठाकुर के साथ उनकी प्रेम कहानी, बड़ा गाड़ितज्ञ बनने का सपना जैसी सारी चीजें देखने को मिलेंगी लेकिन सफलता इतनी आसानी से मिल जाती तो उसे जीने का मजा नही आता. 

(यह भी पढ़ें: 'सुपर 30' के संस्थापक आनंद कुमार ने खोला राज, कहा 'ब्रेन ट्यूमर से हूं पीड़ित')

आनंद के टैलेंट और दिमाग को देखते हुए एक्सलेंस कोचिंग के मालिक लल्लन जी उन्हें अपने कोचिंग सेंटर में अमीर बच्चों को पढ़ाने का मौका देते है और इसके लिए वह आनंद को मोटी रकम भी आफर करते है. आनंद भी उसे स्वीकार कर लेता है क्योंकि पिता के निधन के बाद परिवार का पेट पालने के लिए उसके दूसरा कोई रास्ता नही होता. 

एक दिन एक रिक्शा चालक की आनंद के जीवन और मानसिकता को बदल देती है जिसके बाद वह मुफ्त में गरीब बच्चों को आईआईटी के एंट्रेंस एग्जाम के लिए तैयार करने का मन बना लेता है. उसका यह सफर आसान नही होता रुकावटें बहुत आती है और आनंद अपने इरादों  में कामयाब होता है या नही, इसके लिए आपको फ़िल्म देखनी होगी. 

फ़िल्म में गरीब बच्चों की कास्टिंग कमाल की है. मृणाल ठाकुर का बहुत कम स्क्रीन स्पेस है लेकिन स्क्रीन पर एंट्री दिल में घर कर जाती है. अमित साध पत्रकार के किरदार में है जिसे वह बखूबी निभाते है. बता दें कि खुलकर मिलकर फिल्म की कहानी से लेकर उसके बैकग्राउंड म्यूजिक तक सभी चीजों को अच्छी तरह से दर्शकों के सामने पेश किया गया है.

पीपिंगमून इस फिल्म को देता है 3.5 स्टार्स

(Source: Peepingmoon)

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