Natkhat Review: पुरुषवादी सोच पर प्रहार करती है विद्या बालन की ये शॉर्ट फिल्म, समाज को दिखाती है आईना

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फिल्म : नटखट

ओटीटी: वी आर वन: ए ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल

कास्ट: विद्या बालन और सानिका पटेल

डायरेक्टर : शान व्यास

रेटिंग: 4 मून्स

रेप कल्चर और लिंग भेदभाव भारतीय समाज का एक ऐसा सच है जिसे चाह कर भी कोई झुठला नहीं सकता. लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि इसकी शुरुआत कहां से होती है? हालांकि, हमारा समाज अब सेक्स और दुर्व्यवहार जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख रहा है? हमें यकीन है कि इससे मूल कारणों से हम दूर नहीं आए हैं. ऐसे में डेब्युटेंट डायरेक्टर शान व्यास ने लिंग समानता और मर्दों की झूठी शान जैसी थीम पर अपना हाथ आजमाया है. इस शॉर्ट फिल्म में एक्ट्रेस विद्या बालन जो कि इसकी को-प्रोड्यूसर भी है इन ने मुख्य भूमिका निभाई है, नटखट ने 33 मिनट के रनटाइम में उम्मीद से अधिक कहानी दिया है. बता दें कि शॉर्ट पुरुष वाद के जीवन के लंबे सामाजिक मापदंडों को समाप्त करने की दिशा में पहला कदम है.

(यह भी पढ़ें : विद्या बालन की पहली शार्ट फिल्म 'नटखट' का इस दिन ट्रिबेका एंटरप्राइजेज की वी आर वन: ए ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल में होगा वर्ल्ड प्रीमियर)

पुरुषवादी सोच पर प्रहार करती नटखट, ये कहना गलत नहीं होगा कि समाज को उसका असली आइना दिखा रही है. आप इस शॉर्ट फिल्म को देखकर समझ में आ जाएगा कि बच्चों को रामायण या फिर महाभारत दिखाने से उनमें संस्कार नहीं आते बल्कि उन्हें घर में उसका ज्ञान देना पड़ता है. फिल्म की कहानी एक आम परिवार की है, जिसकी विद्या बालन बहू बनी हुई हैं. अपने मासूम बेटे के मुंह से पनपती हुई पुरुषवादी सोच की झलक देख विद्या अंदर तक हिल जाती है. जिसपर वह बेटे को एक कहानी सुनाती है, जिसमें वह उनका बेटा और वह सभी सदस्य मौजूद होते हैं जो लड़कियों और महिलाओं पर अपना बल प्रयोग, छेड़छाड़ और अपमान करने को अपनी श्रेठता और हक समझते हैं.

इस फिल्म का क्लाइमेक्स बेहद कमाल का है, शॉर्ट फिल्म के अंत में मासूम बच्चा समझ जाता है कि उसकी गलतियों और नादानियों के निशान अक्सर चोट के रूप में उसके मां के शरीर पर उसे दिखाई देते हैं. फिल्म में विद्या की एक्टिंग हर बार की तरह कमाल की है, उन्होंने अपने किरदार के साथ बेहद खूबसूरत तरीके से न्याय किया है. वहीं फिल्म में उनके बेटे का किरदार निभाने वाली चाइल्ड आर्टिस्टेंट सानिका पटेल को देख दर्शकों को एक पल के लिए भी नहीं लगा होगा कि वह लड़का नहीं बल्कि एक लड़की है. फिल्म का डायरेक्शन भी कमाल का है. 

इस फिल्म की कहानी से आपको जरूर एहसास हुआ होगा कि आपको भी अपने बेटों को बेहद कम उम्र से सभी जरुरी और अच्छी चीजों की शिक्षा देने की जरुरत है.

(Transcripted By : Nutan Singh)

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