Rashmi Rocket Review: तापसी पन्नू ने डाली देश की पुरानी लिंग परीक्षण प्रणाली पर रोशनी, सम्मान और पहचान को वापस पाने के लिए लड़ती दिखीं लड़ाई

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फिल्म: रश्मि रॉकेट

कास्ट: तापसी पन्नू, प्रियांशु पेन्युली, अभिषेक बनर्जी, सुप्रिया पाठक और सुप्रिया पिलगांवकर

निर्देशक: आकर्ष खुराना

ओटीटी: ZEE5

रेटिंग: 3.5 मून्स

तापसी पन्नू स्टारर रश्मि रॉकेट को फिल्ममेकर आकर्ष खुराना द्वारा बनाने से पहले शायद ही किसी को खेलों में होने वाले लिंग परीक्षण के अनुचित अभ्यास के बारे में ज्यादा जानकारी थी. फिल्म में एक्ट्रेस के अलावा अहम भूमिका में प्रियांशु पेन्युली, अभिषेक बनर्जी, सुप्रिया पाठक और सुप्रिया पिलगांवकर भी हैं. फिल्म की कहानी एक गुजराती गांव की लड़की के बारे में है जो विश्व एथलेटिक्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा रखती है. स्प्रिंटर, जो अपने घर के लिए एक प्रेरणा है, को जल्द ही हमारे देश में एक सदियों पुरानी प्रणाली के तहत लिंग परीक्षण के नाम पर महिला एथलीटों के शोषण का पता चलता है.

2 घंटे 9 मिनट की इस फिल्म की शुरुआत रमणीक भाई (मनोज जोशी) द्वारा अपनी बेटी रश्मि वीरा (तापसी पन्नू) को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए हर संभव दौड़ में भाग लेने के लिए प्रेरित करने से होती है. रश्मि को बचपन से ही एक प्रतिभाशाली धावक के रूप में पेश किया जाता है. एक दुर्घटना में उसके पिता की मृत्यु हो जाने के बाद, रश्मि की माँ भानुबेन (सुप्रिया पाठक) पदभार संभालती है और सुनिश्चित करती है कि उसकी बेटी एशियाई खेलों 2014 में अपने राज्य गुजरात का प्रतिनिधित्व करे. अपनी ट्रेनिंग से पहले, रश्मि मेजर गगन ठाकुर (प्रियांशु पेन्युली) से मिलती है और उसे प्यार हो जाता है, क्योंकि 'बचपन से ही उसे फौजी प्रेमी चाहिए था.' हालांकि, गगन रश्मि की तैयारी के हर चरण में उसका साथ देने के लिए खड़ा रहता है .

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रश्मि फिर कड़ी ट्रेनिंग शुरू करती है और देश के लिए वाहवाही बटोरती है. हालांकि, उसकी सफलता छोटे समय के लिए होती है, जब उसे लिंग सत्यापन परीक्षण के लिए बुलाया जाता है जो उसे अंदर से तोड़ देता है. धोखेबाज होने के आरोप और राष्ट्रीय टीम से प्रतिबंधित होने की वजह से उसका दिल टूट जाता है. जिसके बाद, उसके जीवन में असल हीरो की एंट्री होती है- वकील इशित मेहता (अभिषेक बनर्जी), जो रश्मि को मानवाधिकार उल्लंघन का मामला दर्ज करने और न्याय के लिए लड़ने के लिए राजी करता है. बहुत झिझक के बाद, रश्मि चुनौती लेती है और हर उस लड़की के लिए लड़ने का फैसला करती है जिसे अनुचित व्यवहार के कारण प्रतिबंधित किया गया है. इस तरह से  फिल्म फिर एक प्रेरक मोड़ लेती है और रश्मि की एथलेटिक्स एसोसिएशन के खिलाफ लड़ाई पर प्रकाश डालती है ताकि वह अपना सम्मान फिर से हासिल कर सके और अपनी पहचान बनाए रखने और जीवन की दौड़ में वापस आ सके.

फिल्म के पहले भाग को बिना मतलब ज्यादा ड्रामे से भरपूर बनाया गया है, जो कि हम तापसी पन्नू की फिल्म से उम्मीद नहीं करते हैं. जबकि फिल्म में लव एंगल को पूरी तरह से छोड़ दिया जा सकता था, यह इस तरह की नाजुक कहानी में स्वीट स्टोरीलाइन लाती है. हालांकि, सेकेंड हाफ ही असली विनर है. अभिषेक बनर्जी की एंट्री के साथ ही फिल्म की कहानी में रफ्तार पकड़ते हुए देखने मिलता है.

अपने किरदारों में पूरी तरह फिट होने वाले एक्टर्स को चुनने का श्रेय कास्टिंग डायरेक्टर वैभव विशांत को जाता है. तापसी ने समय के साथ अपने लिए एक जगह बनाई है और हाई कंटेंट, मुद्दों से प्रेरित सिनेमा के लिए जानी जाती है और रश्मि रॉकेट उनकी झोली में एक और फिल्म है. जिस तरह से एक्ट्रेस अपने किरदार में ढली हैं, वह एक बिल्कुल असल एथलेटिक की शरीर, व्यवहार और मैदान पर प्रदर्शन के साथ सभी का दिल जीतती है. अपने किरदार ले साथ न्याय करने के लिए एक्ट्रेस ने कमाल का फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन किया है, जिसे हम पूरी फिल्म में देख सकते हैं. हालांकि, उनके चेहरे पर अस्थायी टैनिंग कुछ सीन्स में बेहद अननेचुरल लगती हैं.

फिल्म में अपनी परफॉरमेंस से चमकने वाले एक और एक्टर अभिषेक बनर्जी हैं. अपने लिंगो और वकील के लुक के साथ, एक्टर अपनी भूमिका को बेहतरीन तरीके से फिट बैठते हैं. तापसी और अभिषेक दोनों को बराबर सपोर्ट देना है प्रियांशु -जो अपने कमाल की एक्टिंग और स्वीट लुक से फिल्म में बहुत प्रभाव छोड़ते हैं. सुप्रिया पाठक, मनोज जोशी, सुप्रिया पिलगांवकर और वरुण बडोला जैसे को-स्टार्स ने फिल्म को सही आकर देने में अहम भूमिका निभाई है.

स्पोर्ट्स में लिंग परीक्षण के विषय को उजागर करने के लिए निर्देशक आकर्ष खुराना को सलाम है. साथ ही कनिका ढिल्लों और अनिरुद्ध गुहा को उनके प्रेरक काम के लिए बधाई देनी चाहिए. नेहा पार्टि मटियानी की सिनेमैटोग्राफी प्रभावशाली है और ऑन और ऑफ-फील्ड दोनों में आवश्यक तनाव पैदा करती है. अजय शर्मा और श्वेता वेंकट मैथ्यू की एडिटिंग पहले हाफ में क्रिस्प हो सकती थी लेकिन इंटरवल के बाद वह भरपाई हो जाती है. अमित त्रिवेदी का संगीत फिल्म में जान डालता है. ऐसे में इस वीकेंड आप अगर कुछ अच्छा देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो रश्मि रॉकेट की प्रेरक कहानी और तापसी का दमदार प्रदर्शन आपके लिए एक सही चॉइस होगी.

PeepingMoon रश्मि रॉकेट को देता है 3.5 मून्स!

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