PeepingMoon Exclusive: शारिब हाशमी ने 'फैमिली मैन' में अपने किरदार को लेकर मजेदार किस्सा किया शेयर, बताया कैसे 'घोष बाबू' का कैरेक्टर बना 'जे के तलपड़े'

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कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो ढेर सारा टैलेंट लिए हुए भी अपने सफर में बिना किसी शोर शराबे के धीरे धीरे अपनी अलग पहचान बनाते जाते हैं. शारिब हाशमी ऐसा ही एक बेहद खास नाम है जिन्होने सिनेमा में अपना पहला सिग्नेचर दिया नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म 'फिल्मिस्तान' से और उसके बाद एक से बढ़कर एक फिल्मों का हिस्सा बनते चले गए. फिल्मों के पॉपुलर ढांचे में भले ही उनकी पहचान शाहरुख खान की फिल्म जब तक है जान और फैमिली मैन सीरीज से ज्यादा हो मगर आज हम आपको बताएंगे कि शारिब हाशमी का सिनेमा में कितना शानदार योगदान है जो लगातार बेहतर रूप में नजर आ रहा है. पीपिंगमून से खास बातचीत में शारिब ने की बात संघर्ष से लेकर शोहरत तक की..पेश है इस बातचीत के  खास अंश

सवाल- फैमिली मैन की कास्टिंग का किस्सा बताएं. कैसे मिला आपको ये रोल ?
जवाब- मैंने इस रोल के लिए ऑडिशन दिया था. कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा की कंपनी इस शो के लिए कास्टिंग कर रही थी. तब जब मैंने ऑडिशन दिया था, तब मेरे किरदार का नाम घोष था. यह बंगाली कैरेक्टर था तब मैंने बोला कि बंगाली लैंग्वेज के टच के लिए मुझे थोड़ा टाइम चाहिए, पर फिर उन्होंने मुझसे कहा कि अभी आप ऑडिशन दे दीजिए फिर देखते क्या होता है. फिर मेरा ऑडिशन राज एंड डीके सर को बहुत पसंद आया. और फिर मैंने उनको बताया कि मैं महाराष्ट्र से हूं, यहीं पर पला बढ़ा हूं, मराठी अच्छे से बोलता हूं,  तो फिर ये जो 'घोष' कैरेक्टर था 'जे के तलपड़े' बन गया. 

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सवाल- मनोज बाजपेई के साथ काम करने का एक्सपीरियंस कैसा रहा?
जवाब- उनके साथ काम करना मतलब रोज एक एक्टिंग स्कूल में जाने के बराबर है.  उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है. एक एक्टर के तौर पर नहीं बल्कि एक ह्यूमन बीइंग के तौर पर भी वह बहुत खूबसूरत इंसान हैं. इतनी सफलता के बाद भी, इतने सारे अवार्ड जीतने के बाद भी उनका काम के प्रति डेडीकेशन कम नहीं हुआ है. वह हर रोज सेट पर पूरे जोश और उत्साह के साथ आते हैं और उतनी ही लगन के साथ अपने काम में इंवॉल्व रहते हैं. 

सवाल- 'तांडव' सीरीज कंट्रोवर्सी के बाद फैमिली मैंन के ट्रेलर को आगे बढ़ाया गया था पर फिर भी ट्रेलर आने के बाद विवाद हो गया, तो अभी मौजूदा विवाद को देखकर शो के कुछ सीन एडिट या रिमूव किए जाएंगे. 
जवाब- मैं इसपर अभी ज्यादा नहीं बोल सकता हूं. पर मेरे ख्याल से शो में कुछ एडिट और कुछ रिमूव होने के लिए नहीं है. मुझे ऐसा लगता है कि शो जैसा शूट हुआ था, बना था ऐसा ही रिलीज होगा. 

 

सवाल- जब 'फैमिली मैन 2' का ट्रेलर तय रिलीज डेट पर रिलीज नहीं हुआ था तो उस समय शो को लेकर बहुत मीम बने थे. कैसे रिएक्शन्स था मीम देखकर ?
जवाब- मैंने बहुत एंजॉय करें उस समय में सारे मीम्स. लोग मीम्स बनाकर हमे टैग भी करते थे. सारे मीम्स बहुत एंटरटेनिंग थे.

सवाल- आपकी फिल्म फिल्मिस्तान...वो फिल्म एक तरह से सिनेमा देखने वालों के लिए एक गिफ्ट थी.  इस  फिल्म को नेशनल अवॉर्ड भी मिला था. फिल्म से जुड़ी कोई खास याद ? 
जवाब- अभी 'फैमिली मैन' का सीजन 2 रिलीज हो रहा है और 6 जून 2014 को 'फिल्मीस्तान' रिलीज हुई थी. तो मुझे ऐसा लगता है जून मेरे लिए बहुत लकी है. और 'फिल्मीस्तान' के डायरेक्टर नितिन कक्कर और मैं जब यह फिल्म लिख रहे थे, तब नितिन ने फिल्म की कहानी लिखते वक्त मुझसे कहा था यह रोल तेरा है उस समय में इस चैनल में जॉब कर रहा था, नितिन की बात सुनकर मुझे लगा कि मुझे कौन लीड रोल देगा तो मैंने उनकी बात को टाल दिया था. फिर जब फिल्म के लिए प्रोड्यूसर मिला तब नितिन ने मुझे ऑडिशन के लिए कहा. तब मैं वाकई में बहुत सरप्राइज हुआ था. और फिर मैंने ऑडिशन दिया तो पूरी टीम के साथ प्रोड्यूसर्स को मेरा ऑडिशन बहुत पसंद आया था. और इस तरीके से 'फिल्मीस्तान' मुझे मिल गई. 

सवाल- अपनी एक्टिंग की जर्नी के बारे में बताइये ?
जवाब- फिल्मों में मेरा सफ़र बहुत मुश्किल रहा है. मैं हीरो बनना चाहता था पर अपने कद की वजह से हीरो बनने की इच्छा को साइड रखा और आगे बढ़ा. कॉलेज खत्म होते ही एक सेल्समेन की नौकरी कर रहा था. एक दिन ऑफिस पार्टी में मैंने परफॉर्म किया तो मेरे बॉस ने कहा,'ये जगह तुम्हारे लिए नहीं, तुम्हें कुछ और करना चाहिए',और उस नौकरी को एक हफ़्ते में अलविदा कह दिया. असिसटेंट निर्देशक के रूप में मैंने फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत की. मेरे कॉलेज के मित्र राजुल मिश्रा ने मुझे लिखने का काम दिया और सच बताऊं तब मुझे पता चला की मैं लिख भी सकता हूँ.  और फिर मैंने चार साल एम.टी.वी के लिए बतौर इनहॉउस लेखक काम किया. इस बीच एम.टी.वी में निर्देशक मुझसे एक्टिंग भी कराने लगे. नौकरी में रहते रहते मैंने दो फ़िल्मों में छोटे किरदार भी निभा लिए-'हाले दिल' और 'स्लमडॉग मिलियनेयर'. पर उसके बाद चीजे ऐसी नहीं हुई जैसा सोची थी. साल 2011 में मैं वापस नौकरी करने लगा था फिर मुझे एक कॉल आया- 'जबतक है जान' के लिए. उसमें मुझे एक अहम रोल मिल गया और दूसरी ओर नितिन कक्कर जो ‘फ़िल्मिस्तान’ की स्क्रिप्ट पर काम कर रहे थे, उन्हें एक निर्माता मिल गया. और एक बार फिर मैंने नौकरी छोड़ी और दोनों फ़िल्मों में काम किया. ‘फ़िल्मिस्तान’ के बाद मुझे लगा के अब मुश्किलें खत्म हो जाएँगी पर वैसा हुआ नहीं. जो अच्छे प्रोजेक्ट मैंने साइन किए वो बीच में ही बंद पड़ गए. एक-डेढ़ साल तक कुछ काम नहीं था. फिर 'फैमिली मैन' के बाद से लोगों ने मुझे गम्भीरता से लिया. 

सवाल- आपकी राइटिंग कौशल की बात करें तो, आपने 'फिल्मिस्तान' ही नहीं, सलमान खान प्रोडक्शन की द नोटबुक, जैकी भगनानी के साथ मित्रों और सबकी फेवरेट रामसिंह चार्ली भी लिखी है. कैसे इतना समय निकालते हैं.
जवाब- मैंने 'नोटबुक' और 'मित्रों' में डायलॉग्स लिखे है और 'राम सिंहचार्ली' मैंने और नितिन कक्कड़ ने मिलकर लिखी थी. और जब मैंने यह सब लिखी थी तो उस समय मेरी एक्टिंग की दुकान चल नहीं रही थी( हंसते हुए). उस समय में एक्टिंग और राइटिंग दोनों में बहुत जद्दोजहद कर रहा था. एक्टिंग में ज्यादा रोल थे नहीं मेरे पास. तो उस टाइम मुझे अपनी राइटिंग को निखारने का मौका मिला था. मैंने जो भी लिखा है हमेशा नितिन के साथ ही लिखा है पर मुझे ऐसा लगता है कि मैं उनके अलावा किसी के साथ लिख पाऊंगा या नहीं. मुझे नितिन किताब लिखना बहुत अच्छा लगता है

 

सवाल- आने वाले वक्त में बतौर राइटर और एक्टर क्या क्या सरप्राइज देखने को मिलने वाले हैं आपके जरिए.
जवाब- एक्टिंग के कई प्रोजेक्ट है और राइटिंग में मेरे पास कई कांसेप्ट है, देखते हैं उसमें से क्या डेवेलप हो जाए. इंशा अल्लाह मैं लिखने के साथ साथ जल्द डायरेक्ट भी करूंगा. 

सवाल- सोशल मीडिया पर किशोर कुमार के गानों पर आपके काफी वीडियोज हैं. किशोर दा से अपने इस जुड़ाव के बारे में बताइए ?
जवाब- किशोर कुमार को मैं अपना द्रोणाचार्य मांगता हूं मैं उनका एकलव्य हूं. बचपन से मैं उनको गुरु की तरह मानता हूं. मैं किशोर भक्त हूं. मैंने उन के बहुत सारे गाने रट्टे मारे हुए हैं. जब भी कभी कोई महफिल सजती है तो मुझसे लोग बोलते हैं कि कोई किशोर दा का गाना सुनाओ. 

 

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