मैं एक भारतीय हूं और भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं- नवाजुद्दीन सिद्दीकी

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नवाजुद्दीन सिद्दीकी इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म 'ठाकरे' को लेकर सुर्खियों में बने हैं. संजय राउत की इस फिल्म में नवाज शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे का रोल निभा रहें है. ये फिल्म 24 जनवरी को रिलीज होगी और आजकल नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपनी अपकमिंग फिल्म को जमकर प्रमोट कर रहें है. हाल ही इसी सिलसिले में उन्होंने पीपिंगमून को इंटरव्यू दिया. जहां वो बेहद कॉन्फिडेंट नजर आएं. हालांकि एक्टर की लास्ट दो फिल्में, 'मंटो' और 'पेट्टा', जो इस महीने रिलीज हुई है, जिससे नवाज ने अपना तमिल डेब्यू किया है, उसके बारे में कहना जरा मुश्किल है. लेकिन उनसे मिलकर एक बात साफ है कि वो एक्टिंग लोगों को इम्प्रेस करने के लिए नहीं करते, वो तो अलग-अलग कैरेक्टर्स के जरिए खुद को खोजने की कोशिश करते है.

सवाल- आपने पहले दो बायोपिक्स की थीं, मांझी- द माउंटेन मैन जो 2015 में आई थी और पिछले साल 'मंटो'. इन फिल्मों ने स्क्रीन पर बिल्कुल आग नहीं लगाई. ठाकरे को लेकर कोई डर, जो एक बायोपिक भी है?
जवाब- डर! किस बात का, एक बायोपिक करने का? हर्गिज नहीं. घबराहट थी, निश्चित रूप से, क्योंकि ये एक डिफिकल्ट कैरेक्टर है. रेगुलर कैरेक्टर की तरह नही. ये बहुत खास है. उसी समय मुझे अपने काम पर भरोसा था और मुझे पता था कि जब तक फिल्म शूट करने के लिए तैयार नहीं होगी, तब तक मुझे इस विषय की कमान मिल जाएगी. मेरे निर्देशक संजय राउत साब ने मेरा समर्थन किया और पूरी टीम ने मेरा समर्थन किया और मुझे दृढ़ विश्वास की ओर अग्रसर किया, तो भूमिका विश्वसनीय हो गई. ठाकरे के ट्रेलर को देखने वाले लोगों ने कहा कि मैं उनके जैसा ही दिखता था. ये अच्छी बात है.

सवाल- फिल्म से पहले बालासाहेब के बारे में आपकी क्या राय थी? उनकी जगह आने के बाद और फिल्म ठाकरे शूट करने के बाद, क्या ये बदल गया?
जवाब- मैं बहुत ज्यादा इतिहास से परिचित नहीं हूं. लेकिन हिंदुस्तान का हर व्यक्ति बालासाहेब को जानता था. मैंने उनके अधिकांश शुरुआती इंटरव्यूज देखें. फिल्म मिलने के बाद मैंने उनकी पृष्ठभूमि में प्रवेश किया और मुझे पता चला कि बालासाहेब ने मराठी मानुस के लिए कई बड़े काम किए, उन्होंने महाराष्ट्र में कितना बड़ा योगदान दिया, जिसका मुझे पहले से कोई अंदाजा नहीं था.

सवाल- संजय राउत ने कथित तौर पर आपकी फिल्म 'फ्रीकी अली' देखी और दो मिनट में पता चल गया कि आप ठाकरे के लिए उनके अभिनेता थे. क्या ये आपके लिए एक परिभाषित फिल्म थी? वो एक कॉमेडी थी लेकिन 'ठाकरे' ऐसी नहीं है.
जवाब- फ्रीकी अली मेरे लिए एक कॉमेडी और अलग फिल्म थी. लेकिन मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि संजय राउत साब ने उस फिल्म में क्या देखा, मेरा क्या रवैया रहा, किस बॉडी लैंग्वेज की वजह से उन्होंने फैसला किया कि नवाजुद्दीन सिद्दीकी को उन्हें बालासाहेब के किरदार के लिए लाना होगा. निश्चित रूप से वो एक राजनीतिज्ञ हैं. लेकिन संजय राउत साब के पास भी एक अच्छी कलात्मक वृत्ति है, जिसने उन्हें मेरी क्षमता को पहचाना. अगर मैं भूमिका के साथ न्याय करने में कामयाब रहा और लोग मुझ पर विश्वास करते हैं, तो यह एक बड़ी बात है, क्योंकि सिर्फ शिवसेना ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र में हर कोई अभी भी भावनात्मक रूप से बालासाहेब से जुड़ा हुआ है.

सवाल- फिल्म आपको शिवसेना के लिए हीरो बनाएगी. यदि इस वर्ष के लोकसभा चुनाव में पार्टी आप से प्रचार करने के लिए कहे तो क्या होगा?
जवाब- बालासाहेब को चुनाव की जरूरत नहीं थी. अगर आप ठाकरे को साल के बीच में रिलीज करते हैं तो फिल्म को वैसा ही रिस्पॉन्स मिलेगा और वही बिजनेस करेगी.

सवाल- मेरा मतलब है, आप शिवसेना के स्टार प्रचारक बन रहे हैं. आप जानते है कि बॉलीवुड सितारें राजनीतिक दलों के लिए प्रचार करते हैं और चुनावों के लिए खड़े होते हैं.
जवाब- ओह, ये देखना होगा. अब क्या कहूं? लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता. मैंने पहले कभी प्रचार नहीं किया. कई प्रस्ताव मेरे सामने आए. मैं किसी भी पार्टी से संबंधित नहीं हूं. ये सब बाद में देखा जा सकता है. लेकिन मैंने पहले कभी ऐसा नहीं किया.

सवाल- क्या इस बात को तूल दिया गया कि एक मुस्लिम-बॉर्न एक्टर, एक ऐसे महाराष्ट्रीयन नेता की भूमिका निभा रहा है, जो भारत से घृणा करने वाले मुसलमानों से घृणा करता था?
जवाब- मेरा किसी समुदाय में जन्म लेना उस समुदाय के लिए कोई योगदान नहीं है. ये एक संयोग है. आज मैं जो कुछ भी हूं अपने अनुभव और विचारों के कारण हूं. एक बच्चा ये नहीं कहता है कि मैं स्विट्जरलैंड में पैदा होना चाहूंगा इसलिए मुझे वहां जन्म दें, ना? इसलिए, निश्चित रूप से, मैं एक मुस्लिम हूं, मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना में हुआ था. लेकिन उसमें मेरा कोई योगदान नहीं था. अगर उम्र और समझ के आने के बाद मैंने जो काम किया, उसके बाद मेरे विचार विकसित हुए और मुझे शिक्षा मिली और अनुभव प्राप्त हुआ, अगर उस काम की एक-एक बूंद भी देश को फायदा पहुंचाती है - तो मुझे गर्व महसूस होगा. मेरी फिल्म फोटोग्राफ (रितेश बत्रा द्वारा निर्देशित और सान्या मल्होत्रा ​​द्वारा सह-अभिनीत) 69वें बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इसका यूरोपीय प्रीमियर और सनडांस फिल्म समारोह में विश्व प्रीमियर होगा. इससे पहले भी मेरी फिल्में दुनिया भर में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में गई हैं और वहां, जब वो कहते हैं कि ये फिल्म भारत से आई है और फिल्म को पुरस्कार और सराहना मिली है, तो मैं खुश हूं. पता है क्यों? क्योंकि मैं एक भारतीय हूं और भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं.

सवाल- ठाकरे फिल्म रिलीज के बेहद करीब है. आप कैसा महसूस कर रहे हैं?
जवाब- मैं आत्मविश्वासी महसूस कर रहा हूं! जो चर्चा है, वह प्रतिक्रिया, जो हमें ट्रेलर से मिली है, जिसने हमें काफी उत्साहित किया है और हमें आश्वस्त किया है कि दर्शकों को फिल्म पसंद आएगी.

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