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Laxmii Review: अक्षय कुमार ने ट्रांसजेंडर समुदाय को फिल्म के जरिए दी श्रद्धांजलि, जबरदस्त परफॉरमेंस से जीता दिल

फिल्म: लक्ष्मी

ओटीटी: डिज़नी + हॉटस्टार

कास्ट: अक्षय कुमार, कियारा आडवाणी और शरद केलकर

निर्देशक: राघव लॉरेंस

रेटिंग: 3.5 मून्स

अक्षय कुमार स्टारर 'लक्ष्मी' और राघव लॉरेंस द्वारा पहली हिंदी फिल्म का आधार यही है कि हम सब एक हैं! बता दें कि उनकी तमिल ब्लॉकबस्टर कंचना की आधिकारिक हिंदी रीमेक, लक्ष्मी एक ट्रांसजेंडर के भूत के बारे में है जो उन लोगों के खिलाफ बदला लेना चाहते हैं जिन्होंने उसके साथ गलत किया होता है. अक्षय कुमार, कियारा आडवाणी और शरद केलकर स्टारर लक्ष्मी में कॉमेडी के साथ-साथ डर की भी झलक है. फिल्म में एक पल आपको हसायेगा तो दूसरा पल डर का एहसास कराएगा. कॉमेडी और हॉरर का परफेक्ट कॉम्बिनेशन 'लक्ष्मी' अपने साथ एक बहुत जरूरी सामाजिक संदेश भी देता है. यह संदेश ट्रांसजेंडरों के आसपास के सामाजिक मानदंडों को तोड़ने की शक्ति रखता है.

2 घंटे 21 मिनट की लंबी फिल्म आसिफ (अक्षय कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति है जो भूतों / आत्माओं में विश्वास नहीं करता. वह आत्मविश्वास से कहता है, "जीस दिन मेरे सामने भूत आया न, मैं चूड़ियां पहन लूंगा." जल्द ही हमें आसिफ की पत्नी रश्मि (कियारा आडवाणी) से मिलवाया जाता है, जो तीन साल पहले उससे शादी करने के लिए तैयार हो गई थी और अब वह दमन में अपने परिवार के साथ फिर से मिलना चाहती है. आसिफ और रश्मि, रश्मि के पिता के पुस्तैनी घर जाते हैं ताकि उनके माता-पिता उन्हें जोड़े के रूप में स्वीकार कर सकें. हालांकि, जब रश्मि के पिता सचिन (राजेश शर्मा) आसिफ को माफ करने की कगार पर होते हैं, तब उसी समय वह एक ट्रांसजेंडर के भूत के वश में हो जाता है, जो उन लोगों से बदला लेना चाहता है जिन्होंने उसकी और उसके परिवार की हत्या कर दी थी.

(यह भी पढ़ें: फिल्म 'लक्ष्मी' देखने के बाद बोलीं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, कहा- 'इतनी मजबूत फिल्म करने के लिए हमें अक्षय जी की सराहना करनी चाहिए')

जब अक्षय का व्यवहार धीरे-धीरे बदलने लगता है और वे एक महिला की तरह व्यवहार करना शुरू कर देते हैं, तब चीजे एक दम से बदल जाती हैं. एक ट्रेडमार्क लाल बिंदी, चूड़ियों के साथ, अक्षय एक साड़ी पहने भूत में बदल जाते हैं, जिसे देख सभी शॉक्ड रह जाते हैं.आगे जो हम देखते हैं वह परिवार और भूतों का एक सर्कस है और कैसे लक्ष्मी के रूप में अक्षय एक मजेदार तरीके से बदला लेते हैं. हालांकि, फिल्म का क्लाइमेक्स बेहद इमोशनल करने वाला है, साथ ही एक शक्तिशाली सीख देता है.

लक्ष्मी ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए समाज की कठोर मानसिकता को नष्ट करने का एक बड़ा प्रयास है, क्योंकि यह टिपिकल बॉलीवुड मसाला फिल्म नहीं है. फिल्म थोड़ी और छोटी और मजेदार हो सकती थी, फिल्म किसी किसी पॉइंट पर खींची हुई लगती है, लेकिन अक्षय की कॉमिक टाइमिंग बेहतरीन है.

अक्षय पूरी तरह से लक्ष्मी और आसिफ के रूप में अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते नजर आ रहे हैं. एक पल वह अपने चुटकुलों को आसिफ के रूप में क्रैक करते हैं, तो दूसरे पल लक्ष्मी के रूप में डराते हैं. एक्टर ने शानदार तरीके से ट्रांसजेंडर के किरदार को निभाया है, उन्हें देख ऐसा नहीं लगता की यह पहला मौका है. लक्ष्मी के रूप में, उनकी बॉडी लैंग्वेज और बोल बेहद कमाल के हैं.  साड़ी, लाल बिंदी और चूड़ियों को पहन वह अपने किरदार में डूबे हुए हैं. ये कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने अपने किरदार को क्वीन साइज जीया है.

रश्मि की भूमिका में कियारा भी फिट बैठती नजर आ रही है. फिल्म के स्पेशल पैकेज बनकर सामने आते हैं शरद केलकर जिन्होंने ओरिजिनल लक्ष्मी का किरदार निभाया है. फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट में अश्विनी कालसेकर, राजेश शर्मा, मनु ऋषि चड्ढा और आयशा राशा मिश्रा शामिल हैं. इन सभी एक्टर्स ने फिल्म में अपने किरदारों के साथ न्याय किया है.

फिल्म के विषय के साथ न्याय करने के लिए डायरेक्टर राघव लॉरेंस को इसका पूरा श्रेय जाता है. जबकि लेखक राघव, फरहाद सामजी, आदर्श खेतरपाल और ताशा भाम्बरा ने कुछ पॉइंट पर निरंतरता खोई है, हालांकि डायरेक्टर ने फिल्म को मजबूती दी है. वेटरी पलानिसमय -कुश छाबरिया ने सिनेमैटोग्राफी की है और राजेश जी पांडे ने एडिटिंग की है. अमर मोहाली का संगीत फिल्म के स्वर से मेल खाता है. 

PeepingMoon लक्ष्मी को 3.5 मूंस देता है.

 

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