The White Tiger Review: प्रियंका चोपड़ा जोनस, राजकुमार राव और आदर्श गौरव की ये फिल्म करती है भारत की क्लास बेस्ड सोसाइटी पर करारा प्रहार

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फिल्म: द व्हाइट टाइगर
कास्ट:  प्रियंका चोपड़ा जोनस, राजकुमार राव, आदर्श गौरव, महेश मांजरेकर, विजय मौर्य 
डायरेक्टर: रमिन बहरानी
ओटीटी: नेटफ्लिक्स और कुछ चुनिंदा सिनेमाघर
रेटिंग्स: 4 मून्स

रमिन बहरानी की इस अरविंद अडिगा के बुकर पुरस्कार विजेता नॉवेल 'द व्हाइट टाइगर' के एडेप्टेशन में गुलामी, अपमान, गुस्सा, प्रेम, महत्वाकांक्षा और साहस की कहानी है. नेटफ्लिक्स की ये फिल्म व्यंग्य निराशावाद द्वारा प्रेरित है जो पुस्तक में कहानी को रेखांकित करती है और भारतीय समाज में एक नौकर और उसके मालिक के बीच के प्यार-नफरत के रिश्ते को सामने लाती है. वहीं भारत की क्लास बेस्ड सोसाइटी पर करारा प्रहार करते हुए जाति और अमीर गरीब के बीच के बड़े अंतर को दिखाती है. 

प्रियंका चोपड़ा जोनास, राजकुमार राव, आदर्श गौराव, महेश मांजरेकर, विजय मौर्य स्टारर 'द व्हाइट टाइगर' डैनी बॉयल के स्लमडॉग मिलियनेयर से बिल्कुल अलग है. स्लमडॉग मिलियनेयर में पश्चिमी देशों में भारत के गरीबों को  गुलाब के रंग के चश्मे से पिक्चराइज्ड किया था पर वो विदेशी और सतह के नीचे खरोंच करने में नाकामयाब रहे थे. द व्हाइट टाइगर नौकर और मालिक की एक एंटरटेंनिग कहानी है. फिल्म में एक सामाजिक भेदभाव को दिखाया गया है. मुख्य रूप से ग़रीबी, जाति, धर्म, राजनीति, भ्रष्टाचार पर कमेंट किया गया है.
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द व्हाइट टाइगर भारत में एक भ्रष्ट जमींदार के प्रति वफादार चाफ़र-कम-पर्सनल अटेंडेंट के बारे में है, जिसके साथ अच्छा हो या बुरा पर वो मुस्कुराहट के साथ रहता है. हालाँकि, उसकी हंसी अस्पष्ट है क्योंकि उसे नहीं पता कि वह अपने मालिक से नफरत के पीछे प्यार वाली हंसी है या प्यार के मुखौटे के पीछे नफरत है. उसकी मुस्कान भारत और अन्य विकासशील देशों में प्रचलित अस्तित्व के संघर्ष की भी गवाही है.
 

फिल्म में आदर्श गौरव ने ड्राइवर-कम-सर्वेंट बलराम हलवाई का किरदार निभाया है. वह दूरदर्शिता के साथ एक बार वो आने वाली पीढ़ी है जो इस नरक से बाहर निकलने की हिम्मत करता है, जिसमें वह पैदा हुआ था. वह बेहद टैलेंटेड है पर उसको अपने परिवार का कर्ज चुकाने के लिए एक विह्वल जमींदार (महेश मांजरेकर) के लिए काम शुरू करने के लिए अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती है. महत्वाकांक्षी, इंटेलिजेंट और अवसरवादी बलराम के किरदार में आदर्श ने जबरदस्त काम किया है.  वो समाज के वंचिक वर्ग से आता है. कुछ हैरतअंगेज़ ट्विस्ट्स के बाद बलराम अपनी ज़िंदगी बदलने में कामयाब हो जाता है. इन नए कलाकार को स्क्रीन पर देखना बहुत अच्छा लगा है. आदर्श दर्शकों का ध्यान अपनी और पूरी तरह खिंचने में कामयाब रहे. आदर्श ने अरविंद अडिगा के नोवेल के किरदार को बिल्कुल सटीक तरीके से निभाया है और वो अपने इस किरदार के लिए सर्वश्रेष्ठ एक्टर के लिए ऑस्कर के लिए नामांकन अर्जित करने के  एक मजबूत दावेदार है.

जमींदार के छोटे बेटे अशोक के किरदार में राजकुमार राव अमेजिंग लगे है. फिल्म में राजकुमार राव एक रईस परिवार के बेटे की भूमिका निभाते नजर आएंगे. राजकुमार राव के यहां बतौर नौकर काम करने वाले बलराम उनसे बहुत प्रभावित हैं और उन्हीं की तरह एक कामयाब बिजनेसमैन बनना चाहते हैं. वहीं राजकुमार बलराम के लिए एक निश्चित बिंदु तक सही होने की कोशिश करते हैं. लेकिन परिवार उनके साथ बुरा बर्ताव करता है और आखिर में उन्हें एक केस में झूठा आरोपी बनाकर उन्हें फंसा देता है. इस भयानक दुर्घटना के बाद इन दोनों का रिश्ता टूटने के कगार पर आ जाता है. जिसके बाद बलराम को खुद से नफरत होने लगती है. राजकुमार बहुत परिष्कृत और धूर्त हैं. ये  कैरेक्टर ग्रे है क्योंकि वे घर में अपने पिता के शासन का सामना करने के दौरान घर में एक छोटा लड़का बना रहता हैं. 

फिल्म में प्रियंका चोपड़ा जोनस ने राजकुमार की भारतीय-अमेरिकी पत्नी पिंकी का किरदार निभाया है. वो अपने पति के साथ भारत आती है, जो बिज़नेस के सिलसिले में ट्रैवलिंग कर रहा है, और फिर... ज़िंदगी बदल जाती है. पिंकी एक खुलेदिमाग की महिला है. उसने इस कहावत को कभी नहीं माना है कि निचली जाति के लोग निंदनीय और पूरी तरह से बेकार हैं और वो बलराम का साथ देना चाहती हैं. प्रियंका द व्हाइट टाइगर में अपने अभिनय के साथ एक शानदार गुणवत्ता और सांस की ताज़ा हवा लाती है. वह हमेशा की तरह शानदार लगी है और प्रियंका जब तक स्क्रीन पर रहती है अपने व्यक्तित्व से आपको उस पल में कैद कर लेती है. पीसी फिल्म की को-प्रोड्यूसर भी है. वहीं अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में शानदार रिव्यू के के आधार पर , फिल्म को अकादमी पुरस्कारों में 14 कैटेगेरी के लिए योग्य बताया गया है. 

रमिन बहरानी का डायरेक्शन अरविंद अडिगा के उपन्यास के साथ न्याय करता है. साथ ही फिल्म एक सुंदर टेपेस्ट्री में भारत के स्थलों और म्यूजिक को साथ लाने का काम करती है. दर्शकों को फिल्म से अपने सबक लेने के लिए ऑपन एंड रखती है. उनकी फिल्म बलराम और अशोक के बीच के दुखद संबंधों को चिढ़ाती है और शब्दों की एक ही पसंद के साथ एक नज़दीकी लाती है. द व्हाइट टाइगर सख्ती से हॉलीवुड और बॉलीवुड स्टीरियोटाइप फिल्मों से दूर और वास्तविकता के बहुत करीब है.
PeepingMoon.com 'The White Tiger' को 4 मून्स देता है. 

 

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