Bombay Begums Review: 'क्वींस' पूजा भट्ट, शाहाना गोस्वामी, अमृता सुभाष, प्लबिता बोरठाकुर और आध्या आनंद ने मुश्किल नींव पर खड़ा किया अपना साम्राज्य

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वेब सीरीज: बॉम्बे बेगम
कास्ट: पूजा भट्ट, शाहाना गोस्वामी, अमृता सुभाष, प्लबिता बोरठाकुर, आध्या आनंद 
डायरेक्टर: अलंकृता श्रीवास्तव
OTT: नेटफ्लिक्स 
रेटिंग्स: 3 मून्स 

पूजा भट्ट उर्फ रानी सिंह ईरानी डायरेक्टर अलंकृता श्रीवास्तव की इंटरनेशनल वूमेंस डे पर रिलीज़ सीरीज 'बॉम्बे बेगम्स' के पहले 30 मिनट में कहती हैं, 'जीने के लिए हर महिला की एक लड़ाई है.' ये एक बयान अगले 6 एपिसोड को देखने के लिए बहुत एक्साइटेड करता है. पूजा के साथ-साथ शाहाना गोस्वामी, अमृता सुभाष, प्लबिता बोरठाकुर, आध्या आनंद अपनी इसी कहानी को सुनाते है. मुकुट के बिना हर 'बेगम' या 'रानी' को जीतने की लड़ाई होती है, एक आदमी की दुनिया में स्वतंत्रता और अस्तित्व की लड़ाई.

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बॉम्बे बेगम में, हर किरदार रॉयल बैंक की सीईओ रानी सिंह ईरानी (पूजा) के साथ जुड़ा हुआ है. रानी के लिए, शीर्ष पर बने रहने के लिए और अपनी स्थिति को सुरक्षित करने के लिए खुद को साबित करती है. वहीं सिस्टम के भीतर कुछ भेड़िये उसे खींचने के लिए लगाताक रणनीति बनाते हैं.

वहीं पर्सनल लाइफ में, रानी अपनी सौतेले बच्चे ज़ोरावर और शाई के लिए माँ बनने की कोशिश कर रही है. इन बच्चों को अपनी बॉलोजिकल मां के निधन के बारे में अभी तक पता नहीं है, जिस वजह से उन दोनों के अंदर गुस्सा है. स्कूल जाने वाली लड़की (आध्या आनंद) एक विद्रोही के रूप में सामने आती है लेकिन अंदर ही अंदर वह चाहती है कि वह सच्चा प्यार और स्नेह करे. 

बॉम्बे बेगम, एक नेटफ्लिक्स ओरिजिनल सीरीज़, जो महिलाओं को एक ऐसे नौसैनिक को दिखाती है जो स्वतंत्रता, मान्यता, समानता और गरिमा के लिए अपनी खोज के खिलाफ संघर्ष करता है. काल्पनिक रूप से लिपिबद्ध और एड्रोइट प्रदर्शनों से प्रेरित, शो में ख्याति के लिए संघर्ष की कई परतें होती हैं और लगातार आकर्षक नाटक है जो विवेकपूर्ण रूप से ओवरकिल से दूर होता है. इसके द्वारा फेंके गए घूंसे को अच्छी तरह से मापा और निर्देशित किया जाता है.
 

रानी की कंपनी में आयशा अग्रवाल (प्लबिता बोरठाकुर) काम करती है.जो रानी के रूप में सीढ़ी पर दौड़ने के लिए उत्सुक है. एक छोटे शहर से और एक कुलीन बी-स्कूल की डिग्री के बिना, उसे अपने पैरों को खोजने में कठिन समय लगता है. वह कॉर्पोरेट लीडर बनाना चाहती है. लेकिन इस सफलता के लिए क्या-क्या कुर्बानी देनी पड़ती है, वो इन बातों से अनजान है. एक सीन में आयशा कहती है, 'सोसायटी हमारी बॉडी और च्वाइसेस के आगे देख ही नहीं सकती है'. उसकी इस बात में दर्द और महत्वाकांक्षा दोनों झलकती है. रानी और आयशा सहकर्मी होने के नाते कई बार अपने सुख-दुख एक-दूसरे साझा करते हैं. रानी आयशा से कहती है, 'बॉम्बे शहर सबको बदल देता है माई डियर.' इस पर आयशा कहती है, 'शायद बॉम्बे में सर्वाइव करने के लिए हम सभी को बदलना पड़ता है.' इतना सुनते ही रानी बोलती है, 'अस्तित्व हर महिला की लड़ाई है'. इस तरह ये कहानी बताती है कि कैसे ये पांचों औरतें इस पितृसत्तात्मक समाज से लड़ते हुए पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में अपनी पहचान बना पाती हैं, कैसे अपने हालात से लड़ते हुए जीत जाती हैं?


 

आयशा आपको उन सभी लड़कियों की याद जरूर दिलाएंगी जो घर से दूर रहकर खुद का नाम बना रही हैं. लेकिन, उसके लिए और भी बहुत कुछ है. वह बायसेक्सुअल है. पेशेवर मोर्चे पर, आयशा लक्ष्मी उर्फ़ लिली (अमृता) की मदद करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लिली एक सेक्स वर्कर होती है. 
 

लिली  की कहानी रानी से जुड जाती है, दरअसल रानी के सौतेले बेटे ज़ोरावर की कार से एक लड़के का एक्सीडेंट हो जाता है. ये लड़का लक्ष्मी यानी लिली का बेटा होता है. मुआवजे के रूप में, लिली रानी से अपने बेटे की शिक्षा और चिकित्सा खर्चों के लिए पैसा माँगती है. ज़ोरावर को कानून से बचाने के लिए रानी लिली की मांगें मान लेती है. एक सेक्स वर्कर लिली, अपने 'धंधे' के साथ अमीर तो बनना चाहती है पर उसके अंदर एक मां होती है जिसे अपने बेटे और उसकी इज्जत की बहुत परवाह होती है. लिली की महत्वाकांक्षा अपने 11 साल के बेटे को एक अच्छे स्कूल में लाने की है. लेकिन लड़के को स्कूल में धमकाया जाता है क्योंकि वह कहाँ से आया है और उसकी माँ कौन है. वह एक 'बेगम' है जो समाज में सम्मान और इज्जत के लिए प्रयास करती रहती है. 

अलंकृता के साम्राज्य में पांचवीं बेगम फातिमा वारसी (शाहाना गोस्वामी) है. फातिमा की लड़ाई खुद और उसके पति अरिजय (विवेक गोम्बर) के साथ है. रॉयल बैंक की एक महत्वाकांक्षी कर्मचारी, फातिमा अपनी नौकरी और अपने परिवार के बीच फंस गयी है. उसे डिप्टी एमडी के पद पर पदोन्नत किया गया है लेकिन यह उसके कम सफल पति के साथ उसकी बॉंडिंग अच्छी नहीं होती है. वह अपने करियर में बहुत आगे बढ़ना चाहती है. अपनी पहचान बनाना चाहती है. लेकिन पर्सनल लाइफ उसकी महत्वाकांक्षा के आड़े आ जाती है.

सीरीज की कहानी कुल मिलाकर प्यार, मातृत्व, असुरक्षित इच्छाओं, बेवफाई, बढ़ते दर्द, कार्यस्थल प्रतियोगिता, यौन उत्पीड़न और गंभीर कठिनाइयों के माध्यम से समझने और स्थिर रहने के लिए दैनिक लड़ाई पर केंद्रित है. लेकिन नियंत्रित लेखन के साथ, विभिन्न तत्व जो किंवदंती टेपेस्ट्री के प्रवाह को एक दूसरे के रास्ते में लाए बिना सहजता से प्रवाहित करते हैं. अलंकृता श्रीवास्तव इस बार पांच महिलाओं की कहानी लेकर आई हैं, जो अलग-अलग पृष्ठभूमि से संबंध रखती हैं. ये पांच महत्वाकांक्षी महिलाएं, आज के मुंबई में अपने सपनों, इच्छाओं और निराशाओं के बीच झूल रही हैं. सामाजिक मानदंडों को चुनौती देते हुए अपने करियर और रिश्तों में आ रही बाधाओं से लड़ रही हैं. उम्मीद है कि देश दुनिया की महिलाएं इस कहानी से खुद को जोड़ पाएंगी. ये भारतीय महिलाओं की एक दुरूह यात्रा की कहानी बयां करती है. इसमें इन कामकाजी महिलाओं की सत्ता और सफलता की महत्वाकांक्षाओं की बात की गई है.
 

वहीं खामियों की बात करें तो, लगभग 6 एपिसोड। 1 घंटे प्रत्येक को एक सख्त, आकर्षक और मनोरंजक कहानी की आवश्यकता होती है, लेकिन हम एक चरित्र से संबंधित और समझने की कोशिश करते हैं, तो मेकर्स करैक्टर को आधे-पके हुए छोड़ कर दूसरे कैरेक्टर में चले जाते है.
 

अपने जमाने की मशहूर अदाकार पूजा भट्ट ने साल 2010 में बॉलीवुड से ब्रेक ले लिया था. पूजा एक रॉक-सॉलिड परफ़ॉर्मर है. उनकी खामोशी शब्दों से ज्यादा बुलंद है. वह खुद को इनायत करती है और उन्हे एक रानी के रूप में देखने में खुशी होती है. पूजा ने शानदार काम किया है. एक्ट्रेस अमृता सुभाष लिली के किरदार में नजर आ रही हैं. अमृता को मराठी सिनेमा के साथ-साथ हिंदी फिल्मों में उनके बेहतरीन काम के लिए जाना जाता है. रणवीर सिंह की फिल्म गली बॉय में मां के किरदार में इनको देखा गया था. 
फातिमा के रूप में शाहाना बिल्कुल शानदार हैं. वह एक ऐसे किरदार को जीवंत करती है, जो भरोसेमंद है. अमृता प्रतिभा का पावरहाउस है और बॉम्बे बेगम इसका प्रमाण है. प्लबिता आयशा के साथ न्याय करती है। वह एक सरप्राइज पैकेज है. आध्या आनंद भी अपने काम से इम्प्रेस्ड करतीं है. 

प्रोडक्शन डिजाइनर श्रुति गुप्ते ने बेहतरीन काम किया है. एडिटर चारु श्री रॉय की सीरीज की टाइमिंग को कम रख सकते थे क्योंकि सीरीज को कई जगह लम्बा खींचा गया है. फोटोग्राफी के निदेशक अक्षय सिंह ने शहर को खूबसूरती से कैद किया.
 

'क्वींस' पूजा, शाहना, अमृता, प्लबिता और आध्या एक मुश्किल नींव पर बने राज्य के शासक हैं. ऐसा लगता है कि बॉम्बे बेगम का दूसरा सीजन भी आएंगा. पर तब तक, कुछ अद्भुत परफोर्मेंस के लिए आप बैठें और शो देखें.
 

PeepingMoon की तरफ से 'Bombay Begums' को 3 मून्स 

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