OK Computer Review: विजय वर्मा, राधिका आप्टे और जैकी श्रॉफ की अजीब sci-fic वेब शो को मिला है अच्छी एक्टिंग का सहारा

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वेब शो: ओके कंप्यूटर

कास्ट: जैकी श्रॉफ, राधिका आप्टे और विजय वर्मा

निर्देशक: पूजा शेट्टी, नील पेदर और आनंद गांधी

ओटीटी: डिज्नी + हॉटस्टार

रेटिंग: 3 मून्स

आने वाले समय में तकनीक इतनी आगे बढ़ जाएगी कि ज्यादातर काम हम रोबोट द्वारा करते हुए देख पाएंगे. फिलहाल की बात करें तो, इसकी झलक आप पूजा शेट्टी, नील पेदर और आनंद गांधी के डिज्नी + हॉटस्टार शो में देख सकते हैं. आनंद के साथ डेब्यूटेंट निर्देशकों ने एक कॉमिक -साइंस फिक्शन ओके कंप्यूटर विजय वर्मा, राधिका आप्टे और जैकी श्रॉफ के साथ लाया है. शो 2031 में सेट भविष्य की कहानी पर सेट है, जिसमे दो तरह के मनुष्यों को देखा गया है, जो मानते हैं कि रोबोट भविष्य हैं और अन्य जो मानते हैं कि रोबोट मानव जाति की मृत्यु होगा. जबकि दुनिया विभाजित है, जीवन चलता रहता है, निगम एरर फ्री श्रम का लाभ उठाता है और सेवाओं को रोबोटों द्वारा मनुष्यों को बेचा जाता है.

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कहानी की शुरुआत 2031 से होती है. गोवा वह नहीं है जिसे हम जानते हैं, ऐसा लगता है कि किसी ने इसे सिर्फ एक न्यूयॉर्क मेकओवर दिया है जिसमे हर तरफ रोबोट शामिल हैं. कारें खुद ड्राइव कर सकती हैं, रोबोट ने इंसानों की नौकरियों पर कब्जा कर लिया है, सबसे अच्छा आविष्कार किया गया रोबोट मंदिरों में पूजा जाता है और जैकी भिडू नग्न हैं. इस सब के बीच, एक AI कार एक अज्ञात व्यक्ति को मार डालता है और उसके सर को कुचल देता है, ताकि उसकी पहचान ना हो पाए. ऐसे में मृत शख्स को उसके पहचान के बिना 'डेड बॉडी' नाम से बुलाया जाता है (बाद में पाव भाजी कहा जाता है). जल्द ही, साइबर सेल अधिकारी, साजन कुंडू (विजय वर्मा) द्वारा हत्यारे की तलाश शुरू कर दी जाती है, एक साइबर सेल ऑफिसर, जिसे लक्ष्मी सूरी (राधिका आप्टे) जॉइन करती है.

कार के डायरेक्शन को पढ़कर साजन को बहुत जल्दी समझ में आ जाता है कि कार को हैक करके इस हत्या को अंजाम दिया गया है. दूसरी तरफ लक्ष्मी को यकीन है कि रोबोट इंसानों को तब तक नहीं मार सकते जब तक कि ऐसा करने में किसी और इंसान का हाथ ना हो. खुद की चलाई गई कार के डिटेल को ट्रैक करते हुए दोनों मेन हैकर का पीछा करते हैं, जिसके बाद उन्हें पता चलता है कि रोबोनॉईट कहां थे इसके पीछे है. जैसे-जैसे उनकी जांच पड़ताल आगे बढ़ती है सीरीज अजीब मोड़ लेते हुए दिखाई देता है और इस तरह से हमें सभी रोबोट के बॉस अजीब (उल्लास मोहन द्वारा आश्चर्यजनक रूप से आवाज दी गई) से मिलते हैं.अजीब को पहले हत्या के लिए दोषी ठहराया जाता है और उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है, हालांकि, उसकी राहत के लिए, पुष्पक शकूर (जैकी श्रॉफ) नाम का व्यक्ति खून करना का दोषी खुद को कहता है. आगे क्या होता है घटनाओं की एक सीरीज है, जो आपको यह कहेगी कि सच में अजीब है.

ओके कंप्यूटर शैली के साथ सही नहीं जाता जिससे निर्माताओं ने चुना है- एक साइंस फिक्शन. कुछ बिंदुओं पर या एक कॉमेडी के रूप में सामने आता है, लेकिन जल्दी ही कहानी के आगे बढ़ने के साथ आप असली सार कहीं ना कहीं खोते हुए देखते हैं. इसे एक तरह से भारत की साइंस फिक्शन पर बनाई गई फिल्म के तरफ एक कदम के रूप में देखा जा सकता है. टैलेंटेड एक्टर जैसे विजय, जैकी और राधिका के साथ इसमें बहुत कुछ किया जा सकता था.

शो के हर एक एक्टर को उनकी एक्टिंग के लिए सराहना मिलनी चाहिए. बात करें विजय वर्मा द्वारा निभाए गए साजन की किरदार की तो, वह एक व्यक्ति है जो असल में मनुष्य पर राज करने वाले रोबोट का समर्थन नहीं करता है. ऐसे में एक्टर ने अपने किरदार में जान फूंकते हुए एक चिड़चिड़ा स्वभाव वाले व्यक्ति की भूमिका अच्छी तरह से निभाई है. राधिका ने लक्ष्मी की भूमिका निभाई है एक ऐसी औरत जो Als और टेक की दीवानी होती है. एक्ट्रेस ने अपने किरदार को इतनी अच्छी तरह से निभाया है कि एक बार के लिए आप भी रोबोटों के फायदे मैं विश्वास करने लगेंगे, भले ही उसके फायदे कुछ ना हो. हालांकि, जैकी श्रॉफ नग्न आदमी पुष्पक के किरदार में हैं, जिन्होंने अपनी एक्टिंग से एक अलग छाप छोड़ी है. भले ही शो में उनकी एंट्री 2 एपिसोड के बाद होती है, लेकिन उन्हें देखना अपने आप में रोमांच से भरा है.

मोनालिसा के रूप में कानी कुसरुति आपकी पसंदीदा बनकर उभरेंगी, एक बार के लिए अगर आपके मन में शो ऑफ करने का भी ख्याल आता है, तो वो इनकी वजह से जरूर दूर हो जाएगा. शो में उनके डायलॉग्स से आपको एंटरटेनमेंट का एहसास होगा. सारंग सथाये एक ऐसे इंसान का रूप धारण करते हैं, जो अपने आत्मविश्वास को खो चुका है, जिसे स्क्रीन पर देखना बेहद मजेदार है. वहीं, अपने शॉर्ट और स्वीट रोल के लिए रसिका दुगल को हम मिस नहीं कर सकते हैं.

ओके कंप्यूटर के साथ, लेखक और निर्देशक पूजा शेट्टी, नील पेदर और आनंद गांधी ने हमारे समाज पर साफ़ तौर से टिप्पणी की है. हालांकि, बहुत सारे प्लॉट, ट्विस्ट और किरदार के साथ एक अच्छी कहानी खराब हो जाती है. डिएगो गुइजारो की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है, ज्यादातर काम वीएफएक्स टीम के हैं. एडोर चारु टककर ने रोबोट से भरी दुनिया को दिखाने में एक अद्भुत काम किया है. कास्टिंग डायरेक्टर वैभव विशांत की बात करें तो, उन्होंने शो के लिए टैलेंटेड एक्टर्स को ढूंढा है. गेब्रियल प्रोकोफ़िएव का संगीत शो के टोन से भी मेल खाता है.

हालांकि, अगर आप सच में आने वाले भविष्य की दुनिया की सैर करना चाहते हैं, तो 'ओके कंप्यूटर' को एक बार जरूर देख सकते हैं.

PeepingMoon ओके कंप्यूटर को 3 मूंस देता है!

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