The Empire Review: मिताक्षरा कुमार ने दमदार तरीके से पेश किया मुगल एरा का ड्रामा, शबाना आज़मी, कुणाल कपूर, डिनो मोरिया, दृष्टि धामी ने किया बेहतरीन काम

By  
on  

वेब सीरीज: द एम्पायर 
डायरेक्टर: मिताक्षरा कुमार
कास्ट: शबाना आज़मी, कुणाल कपूर, डिनो मोरिया, दृष्टि धामी, राहुल देव
ओटीटी: डिज्नी प्लस हॉटस्टार 
ड्यूरेशन: 8 एपिसोड (45 मिनट्स का हर एक एपिसोड है)
रेटिंग्स: 3 मून्स 
(ये रिव्यू सीरीज ' द एंपायर' के 3 एपिसोड पर बेस्ड है)
फैमिली ड्रामा बॉलीवुड कल्चल का एक अभिन्न अंग रहा हैं. कुछ छल के बारे में हैं और कुछ इमोशन्स के बारे में हैं. मिताक्षरा कुमार ने अब फैमिली ड्रामा को मुगल टच दिया है. डेब्यूटेंट डायरेक्टर मिताक्षरा ने 'बाजीराव मस्तानी' और 'पद्मावत' जैसी फिल्मों में फिल्मणेकर संजय लीला भंसाली को असिस्ट किया था. मिताक्षरा ने अब बाबर के क्षेत्र में कदम रखा है और राजनीति, अंदरूनी सूत्रों के डरा देने वाले एजेंडे और परिवार के लिए किए गए बलिदानों पर रोशनी डाली हैं. 

Chehre Review: अमिताभ बच्चन और इमरान हाशमी स्टारर फिल्म है रहस्यपूर्ण और दिलचस्प अपराध और न्याय के खेल की कहानी


द एंपायर एलेक्स रदरफोर्ड के छह ऐतिहासिक उपन्यासों की सीरीज ‘एंपायर ऑफ द मुगल’ की पहली कड़ी ‘राइडर्स फ्रॉम द नॉर्थ’ पर आधारित है. इस कहानी का पहला सीजन आज रिलीज हुआ है. इसमें उत्तर दिशा/मध्य एशिया से भारत आने वाले पहले मुगल बादशाह बाबर की जिंदगी की दास्तान है. आठ एपिसोड लंबे शो में शबाना आज़मी, कुणाल कपूर, डिनो मोरिया, दृष्टि धामी, राहुल देव और अन्य अहम किरदारों में हैं. 

 

इसकी शुरुआत पानीपत की पहली लड़ाई अप्रैल 1526 से होती है, जहां मैदान में करीब-करीब हथियार डाल चुका जहीरुद्दीन-मोहम्मद-बाबर अपनी जिंदगी के सफर को याद कर रहा है. दरअसल बाबर (कुणाल कपूर) ने इस उम्मीद को छोड़ दिया है कि वह इब्राहिम लोदी से बच जाएगा. सेना की मदद से उसे बचा लिया गया है. बाबर अपने लोगों के लिए बहुत चिंतित हैं. बाद में हमें पता चलता है कि बाबर ने हिंदुस्तान के लिए इब्राहिम लोदी के खिलाफ लड़ाई लड़ी.


वहीं फिर कहानी फ्लैशबैक में समरकंद और फरगना पहुंचती है. एक बच्चे के रूप में  बाबर के लिए हिंदुस्तान एक सपना था जिसका वह बड़ा होने पर भी पीछा करता रहा. उमर शेख मिर्जा द्वितीय के बेटे, फरगना के बादशाह के लिए, बाबर अपने पिता की तरह बहुत ही सीधे और दयालु थे, जो लोगों पर बहुत आसानी से भरोसा करते थे. बाबर, जो अपने पिता के शासन में रक्षा विधियों को खुशी-खुशी सीख रहा था, उसके जीवन में एक दम बदलाव आ जाता है. पिता उमर शेख मिर्जा की मृत्यु के बाद 14 बरस के बाबर को नानी (शबाना आजमी) फरगना के तख्त पर बैठा देती है परंतु फरगना के दुश्मन शैबानी खान (डिनो मोरिया) की नजरें यहां गड़ी है. वह फरगना और समरकंद, दोनों पर कब्जा चाहता है. बाबर अमन पसंद है. उसे परिवार तथा अवाम की चिंता है. वह खून-खराबा नहीं चाहता. उसे पिता का दिखाया ख्वाब भी याद है. बाबर शैबानी खान के सामने प्रस्ताव रखता है कि अगर उसे परिवार और शुभचिंतकों समेत किले से निकल जाने दे, वह हमेशा के लिए चला जाएगा. शैबानी मान जाता है मगर इस शर्त पर कि बाबर अपनी खूबसूरत बहन खानजादा (दृष्टि धामी) वहीं उसके पास छोड़ जाए.


15वीं सदी के अंत और 16वीं सदी की शुरुआत में स्थापित, साम्राज्य बाबर के बारे में है. सीरीज में बाबर की कहानी उसकी जिंदगी में आए उतार-चढ़ावों और संघर्षों को दिखाती है. कैसे वह बर्फीले-पहाड़ी-कठोर-बर्बर इलाके से निकल कर काबुल होते हुए हिंदुस्तान पहुंचा. उसका पारिवारिक और राजनीतिक संघर्ष कैसा था. नानी के अतिरिक्त बहन और बेगमों ने उसके जीवन पर कैसा असर डाला. एक अच्छी  कलाकारों की टुकड़ी पर बहुत अधिक भरोसा करते हुए, एक मजबूत दृष्टि जो मिताक्षरा ने अपने निर्देशन की शुरुआत के लिए देखी थी और निश्चित रूप से, वेशभूषा, सेटिंग्स और माहौल, द एम्पायर बिना किसी हलचल के बिंदु पर पहुंच जाता है. सीरीज के कुछ सीन्स हैं जो आपको उन फिल्मों की याद दिलाएंगे जिनमें रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण कॉमन कनेक्टिंग थ्रेड के रूप में थे.

मिताक्षरा अपने किरदारों को साफ रखती हैं. मुगल परिवार के ड्रामे को दोहराते हुए, निर्देशक द एम्पायर से जो उम्मीद की जाती है, वह पूरी होती है- एक ऐसा शो जहां छल, पावरप्ले और जीवन, मृत्यु और दुश्मनों के खिलाफ लड़ाई को दिखाता है. मिताक्षरा ने कहानी को इतिहास के नजदीक रखने के बजाय भावनाओं के करीब रखा है. तख्त के लिए लड़ाई के एडिशन में बाबर को सरल सिंपल बनाया गया है जबकि शैबानी खान को देखना काफी दिलचस्प लगे है. 

बचपन में जुल्मो-सितम सहते हुए पत्थर दिल-क्रूर बन गए शैबानी खान बने डिनो ने अपने रोल में जान फूंक दी है. ये कहमा गलत नहीं होगा की ओटीटी पर वो बेस्ट खलनायकों में से एक बन सकते हैं. डिनो मोरिया हर फ्रेम में राज करते हैं. अपनी एक्टिंग से वो कई बार रोंगटे खड़े कर देते है. आपको जरूर उनका ये लुक रणवीर सिंह की खिलजी की याद दिला देगा. लेकिन उनकी बॉडी लैन्वेज उनको अलग बनाती है. डिनो का शानदार काम वाक्य में सीरीज को दमदार बनाता है. 

दृष्टि धामी सुंदर दिखी हैं और उन्होंने बाबर की बहन खानजादा का किरदार जीवंत किया है. दृष्टि जितनी सुंदर दिखीं है उतनी ही सुंदरता के साथ उन्होंने अपने किरदार को भी बेहद खूबसूरत बनाया है. बेगम के साथ डिनो के दृश्यों को खूबसूरती से किया गया है. दोनों कलाकार अपना बेस्ट देते हैं. यहां जरूर दृष्टि की एक्टिंग आपको चौंका देगी. अपने परिवार की सुरक्षा और भलाई के लिए बलिदान करते हुए, द्रष्टि ने खुद को उस चरित्र में ढाल लेती हैं. इस किरदार के लिए साहसी होने के साथ-साथ संयमित और प्रभावशाली होने के साथ-साथ संवेदनशील होने की जरूरत थी और दृष्टि हर सीन में अपनी छाप छोड़तीं हैं.


शबाना आजमी बाबर की सख्त दिल नानी के रूप में असर छोड़ती हैं. ये कास्टिंग शानदार है. अपने पहले ऐतिहासिक शो में दिग्गज कलाकारा ने साबित कर दिया कि ये किरदार सिर्फ और सिर्फ उनके लिए बनाया गया था. वह अपनी बॉडी लैंग्वेज से सबका ध्यान खींचती हैं और लाइमलाइट चुराती हैं.

 

कुणाल ने बाबर के रूप में अच्छा काम किया है और कई जगहों पर उनके भावुक दृश्य बढ़िया हैं. अभिनेता बाबर की भावनाओं को अच्छी तरह से व्यक्त करते है. उनके लुक्स और आंखों से बात करने के तरीके में कुछ हद तक मासूमियत झलकती है. कुणाल के जरिए दर्शकों को बाबर का मानवीय पक्ष देखने को मिलेगा.
 

राहुल देव भी उतना ही अच्छा प्रदर्शन करते हैं, जितना वो अपनी एक्टिंग के लिए जाने जाते है. वज़ीर खान में राहुल जान फूंक देते है. महरूस मीर और ग्रेसी गोस्वामी युवा बाबर और खानजादा की भूमिका निभाने के लिए जरूर तालियों के हकदार है. उन्होंने अपने अनुभवी सीनियर को-स्टार्स को कड़ी टक्कर दी है. ऋषभ सावनी और स्वाती ठाकुर ने महमूद और निश्का की भूमिकाओं को बहुत ही खूबसूरती से निभाया है. अभिनेताओं ने अपने कैरेक्टर्स के इमोशन्स को पूरी तरह से सही दिखाया है. कल्लिर्रोई तज़ियाफ़ेटा, अक्षय नागोरी और नावेद असलम ने भी अपने किरदारों को बेहतरीन तरीके से निभाया है. 

विजुअल इफेक्ट्स विनय चुफाल और अशोक चौधरी द्वारा किया गया, प्रोडक्शन डिजाइन प्रिया सुहास द्वारा किया गया, कैमरावर्क डीओपी निगम बोमजान और कॉस्ट्यूम का जिम्मा शीतल शर्मा और चंद्रकांत सोनवणे ने सम्भाला. सभी ने मिलकर एम्पायर को ऊंची उड़ान भराने में कामयाब होते है. हालांकि, जब पेसी एक्शन और स्क्रीनप्ले की बात आती है तो यह कम हो जाता है. ऐतिहासिक शो के लिए, उच्च-ऑक्टेन एक्शन दृश्यों, अप्रत्याशित ट्विस्ट और टर्न की उम्मीद की जाती है, लेकिन यह उस स्तर तक कभी नहीं पहुंच पाता है. 
कुछ चूकों के बावजूद, यदि आप किसी ऐसी चीज़ की तलाश में हैं जो थ्रिलर या क्राइम-बेस्ड ड्रामा नहीं हो तो ये शो आप देख सकते है. शानदार कलाकारो के साथ, द एम्पायर को आपको हफ्ते का समय बिताने में मदद करेंगी.

 

 

PeepingMoon.com 'द एम्पायर' को 3 मून्स देता है

Recommended

Loading...
Share